Haryana Election: कुमारी शैलजा को अबकी बार कैसे रोकेंगे भूपेंद्र हुड्डा? कांग्रेस में घमासान के संकेत!

Haryana Chunav 2024: हरियाणा में कांग्रेस का बड़ा दलित चेहरा और सिरसा लोकसभा से पार्टी सांसद कुमारी शैलजा विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। इस जानकारी से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमा जितना ही चिंतित हो रहा होगा, सत्ताधारी बीजेपी को शायद उतनी ही राहत मिल रही होगी।

लोकसभा चुनावों के परिणामों को देखें तो हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होने के आसार हैं, जिसमें एक-एक सीट विधानसभा का गुणा गणित बदल सकती है। ऐसे में कांग्रेस महासचिव के चुनाव लड़ने का मतलब है कि पार्टी के अंदर की खेमेबाजी से उसे नुकसान पहुंच सकता है।

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हां मैं विधानसभा चुनाव लड़ने की कर रही तैयारी- कुमारी शैलजा
पांच बार की सांसद कुमारी शैलजा ने ईटी को अपनी योजना के बारे में बताया है, 'हां, इस बार मैं हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रही हूं। सच तो यह है कि इसकी तैयारी तो मैं लोकसभा चुनावों से भी पहले से ही कर रही हूं। लेकिन, सिरसा और अंबाला के कांग्रेसी चाहते थे कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं, इसलिए मैंने सिरसा से लड़ा, इससे भी ज्यादा ये था कि यह एक देश और हमारी पार्टी के लिए एक अहम चुनाव था।'

प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने का दबाव- शैलजा
उन्होंने आगे बताया, 'अब प्रदेश कांग्रेस में मेरे समर्थक और शुभ चिंतकों का मुझसे आग्रह है कि मैं प्रदेश की राजनीति में ज्यादा सक्रिय होऊं और विधानसभा का चुनाव लड़ूं। इसलिए मैं इसके बारे में सोच रही हूं। आखिरी फैसला कांग्रेस नेतृत्व का होगा।'

हरियाणा में आपसी गुटबाजी से परेशान रही है कांग्रेस
हरियाणा में कांग्रेस के भीतर भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला का तीन खेमा बताया जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शैलजा की नजर भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रही है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस में अभी भी दबदबा हुड्डा खेमे का ही है। दिल्ली दरबार में ही उनका ही जलवा दिखता रहा है। खुद शैलजा भी लोकसभा चुनावों के बाद आरोप लगा चुकी हैं कि अगर सही उम्मीदवारों को टिकट मिलता तो पार्टी और ज्यादा सीटें भी जीत सकती थी।

हुड्डा के लिए सियासी चुनौती बन सकती हैं शैलजा
ऐसे में हुड्डा किसी भी कीमत पर नहीं चाहेंगे कि शैलजा विधानसभा चुनाव लड़कर उनका या उनके सांसद बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा की सीएम पद पर दावेदारी पर सियासी पेच फंसा दें।

क्योंकि, अगर कांग्रेस को लगता है कि हुड्डा के पास जाट वोट बैंक है, तो शैलजा उसके लिए हरियाणा और यहां से बाहर भी महत्वपूर्ण दलित चेहरा हैं। कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में विधायक रहते शैलजा की जगह हुड्डा को आगे करना राजनीतिक तौर पर कांग्रेस के लिए आसान नहीं रहेगा।

गुटबाजी पर नहीं रहा कंट्रोल, तो कांग्रेस का हो सकता है डिब्बा गोल!
2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें तभी कम हुई थीं, जब कांग्रेस ने किसी तरह से समझा-बुझाकर प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर शैलजा और विधायक दल के नेता के रूप में हुड्डा के नेतृत्व में एकजुटता दिखाते हुए चुनाव लड़ा था।

लेकिन, आज की तारीख में दोनों नेताओं की सियासी खाई ज्यादा गहरी लग रही है और लोकसभा चुनावों के बाद शैलजा ने सार्वजनिक तौर पर हुड्डा के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने से भी पहेज नहीं किया है।

तथ्य यह है कि विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले दोनों खेमा अलग-अलग यात्राएं भी निकाल रहा है, जिससे कम से कम हरियाणा कांग्रेस में एकजुटता का संदेश तो नहीं ही जा रहा है।

विधानसभा चुनाव लड़ने की शैलजा क्या दे रही हैं दलील?
कुमारी शैलजा अभी-अभी लोकसभा के लिए चुनी गई हैं, फिर वह विधानसभा चुनाव लड़ने में दिलचस्पी क्यों दिखा रही हैं? इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं, 'कांग्रेस पार्टी में कई उदाहरण हैं, जब लोकसभा सांसद समेत पार्टी का एक संसद सदस्य विधानसभा का भी चुनाव लड़ा हो। इसलिए यह कोई मुद्दा नहीं है। यह भी है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है और मैं समझती हूं कि राज्य के वरिष्ठ पार्टी नेताओं को बीजेपी का कुशासन खत्म करने के लिए कांग्रेस के प्रयासों में सक्रिय योगदान देना चाहिए।'

हालांकि, इस सवाल का वह सीधा जवाब देने से बच रही हैं कि विधानसभा चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा के पीछे असल में मुख्यमंत्री पद पर उनकी नजर है। उन्होंने कहा है, 'कांग्रेस के मुख्यमंत्री का फैसला चुनावों के बाद पार्टी की ओर से लिया जाएगा।'

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