Haryana Assembly Election: कब तक 'न्यूट्रल' रहेंगे दुष्यंत चौटाला? बीजेपी-कांग्रेस को रहेगा JJP का इंतजार!
Haryana Chunav: हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव से किसी सियासी दल का राजनीतिक वजूद सबसे ज्यादा कम हुआ है तो वह पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी है। पार्टी के 70% विधायक उनका साथ छोड़ चुके हैं। लेकिन, फिर भी दुष्यंत किसी न किसी रूप में भाजपा और कांग्रेस के 'चहेते' बने हुए हैं!
जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने ईटी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया है कि वह अब भाजपा के साथ भविष्य में भी गठबंधन नहीं करेंगे। उनका कहना है कि 'हम बीजेपी या कांग्रेस किसी के साथ नहीं जाएंगे। पिछली बार भी हमने सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इस बार भी हम सभी विधानसभा क्षेत्रों से उम्मीदवार उतारेंगे।'

जनता का साथ मिलने के भरोसे में दुष्यंत
बीते पांच वर्षों में बदलाव ये हुआ है कि जेजेपी का वोट शेयर 2019 के लोकसभा चुनावों के 5% से घटकर 2024 के लोकसभा चुनाव में महज 0.87% रह गया है। लेकिन, दुष्यंत चौटाला का कहना है कि विधानसभा चुनाव, लोकसभा से अलग होते हैं। इसलिए उन्हें यकीन है कि जनता फिर से उनका साथ दे सकती है।
10 में से 7 विधायक छोड़ गए दुष्यंत चौटाला का साथ
उनके मुताबिक, 'कांग्रेस में इसकी कोई गारंटी नहीं कि हुड्डा (भूपेंद्र सिंह हुड्डा) सीएम बनेंगे। इसी तरह से बीजेपी में मुख्यमंत्री को भी नहीं पता कि वह करनाल में जीत जाएंगे।' 2019 में जेजेपी 10 सीटें जीती थी और 40 सीटों वाली बीजेपी ने इसी के समर्थन से सरकार बनाई थी। इस साल मार्च में दोनों का गठबंधन अचानक टूट गया।
आज उन 10 विधायकों में से जेजेपी के पास सिर्फ 3 एमएलए बच गए हैं इनमें से एक खुद दुष्यंत (ऊंचा कलां) हैं। दूसरी उनकी मां नैना चौटाला (बाढ़डा) हैं और तीसरे अमरीज धांडा (जुलाना) हैं।
किसके साथ जाएंगे दुष्यंत?
जेजेपी और बीजेपी का सियासी रिश्ता टूटने के बाद भी कांग्रेस शुरू से दोनों के संबंधों को शक की निगाहों से देखती रही है। शायद इसकी वजह ये है कि भाजपा का जेजेपी को लेकर भरोसा अभी भी कायम है।
भाजपा अभी से डाल रही है डोरे!
सोमवार को ही जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को रोहतक में बीजेपी के साथ नहीं जाने वाली दुष्यंत चौटाला के बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 2019 में बीजेपी ने 'हरियाणा के लोगों को एक पारदर्शी और मजबूत शासन देने के लिए जेजेपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन किया था।'
वे बोले, 'मैं उनसे आग्रह करूंगा कि कांग्रेस की ओर न जाएं, क्योंकि कांग्रेस जेजेपी को खत्म करना चाहती है। मैं दुष्यंत चौटाला से कहना चाहूंका कि आपको मजबूत बनना चाहिए। पिछली बार आपको 10 सीटें मिली थीं, इस बार भी आपको कुछ सीटें मिलनी चाहिए।'
हालांकि, उन्होंने अपने बयान को और स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैं कह रहा हूं कि इस बार बीजेपी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बना रही है। हरियाणा के लोगों ने पहले ही तय कर लिया है। मैं यह इसलिए कह रहा हूं कि दुष्यंत हुड्डा (भूपेंद्र सिंह हुड्डा) के करीब जा रहे हैं, जबकि दोनों एक-दूसरे पर आरोप भी लगा रहे हैं।'
बीजेपी से रिश्ता टूटने के बाद कांग्रेस के करीब जाते दिख चुकी है जेजेपी
भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद दुष्यंत उसपर 'धोखा' देने का आरोप लगाते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कम से कम दो बार कांग्रेस को समर्थन देने की भी बात कही है।
पहले तो उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर सैनी सरकार को गिराती है तो वह कांग्रेस का समर्थन देंगे और राज्यसभा के उपचुनाव में विपक्ष का साझा उम्मीदवार देने का भी प्रस्ताव रखा था। हालांकि, हुड्डा ने उनके प्रस्तावों को ठुकरा दिया था। वहीं दुष्यंत भी इन अटकलों से इनकार करते रहे हैं कि उनकी कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ रही हैं।
चुनाव के बाद गठबंधन के विकल्प खुले रहेंगे!
लेकिन, कुछ समय पहले दुष्यंत यह भी कह चुके हैं कि '2019 में जेजेपी ने किंगमेकर की भूमिका निभाई थी और इस विधानसभा चुनाव में भी सबसे महत्वपूर्ण पार्टी बनकर उभरेगी।'
हाल ही में दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय चौटाल यह खुलासा भी कर चुके हैं कि 2019 में भी उन्होंने पहले सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस के साथ डील करने की कोशिश की थी। उन्होंने इस बात के सबूत होने का भी दावा किया है।
हरियाणा की राजनीति को समझने वाले जानकारों का कहना है कि भाजपा हो या कांग्रेस चुनाव के बाद के लिए दोनों ही पार्टियों के गठबंधन के विकल्प खुले रहेंगे; और जिस तरह से लोकसभा चुनावों में दोनों के बीच कांटे का मुकाबला देखने को मिला है, उसके बाद इस बात की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ गई है; और शायद दुष्यंत चौटाला ऐसे ही चुनाव परिणाम पर आस लगाए बैठे हैं!












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