हरियाणा: बाजरा खरीद नहीं हुई शुरू, किसान आज दे रहे मंडी के सामने धरना, मांग- एमएसपी भी लागू हो
बाढ़डा। बाजरा खरीद शुरू नहीं होने पर आज किसान हरियाणा के बाढ़डा उपमंडल में भाकियू (भारतीय किसान यूनियन) की अगुवाई में धरना-प्रदर्शन करने के लिए जुट रहे हैं। जिसमें उनकी ओर से कस्बे भावांतर योजना को वापस लेने, बाजरे की खरीद एमएसपी पर शुरू करने व रबी सीजन के समय डीएपी व बिजली आपूर्ति का पर्याप्त प्रबंधन करने की मांग की जा रही है। भाकियू के पदाधिकारियों ने बताया कि, सभी किसान संगठनों के आह्वान पर आज 50 गांवों के 11 सौ किसान बाजरे से भरी ट्रेक्टर ट्रालियों के साथ मंडी के समक्ष विरोध प्रदर्शन के साथ आंदोलन शुरू कर रहे हैं। जिसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए किसान संगठनों ने पूरी ताकत झौंक दी है।

100% बाजरा खरीद शुरू करने की मांग
बाजरे की पैदावार करने वाले किसानों ने इससे 2 दिन पहले भाकियू प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई में प्रशासन को चेतावनी दी थी। जिसमें कहा गया कि, सरकार ने 2 दिन में 100% बाजरा खरीद शुरू नहीं की तो सोमवार को 1100 ट्रैक्टरों के साथ किसान बाढ़डा अनाज मंडी के सामने प्रदर्शन करते हुए आंदोलन शुरू करेंगे। उस रोज किसानों ने एसडीएम से मुलाकात कर ये दिक्कत बताई थी। वहीं, किसान भवन में भाकियू अध्यक्ष धर्मपाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए महासचिव हरपाल ने कहा कि, भाजपा सरकार बार-बार एमएसपी का दावा कर रही है, लेकिन दुर्भाग्य है कि बाजरे की खरीद में अब भावांतर के नाम पर किसानों को अपनी फसलों को बेचने के लिए राम-भरोसे छोड़ दिया है।

भाकियू ने चेताया था सरकार को
भाकियू जिला महासचिव हरपाल ने कहा कि, परेशान किसानों के सामने आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। लिहाजा किसान संगठन भाकियू ने बाजरा खरीद में बरती जा रही मनमर्जी के विरोध में एसडीएम को मांगपत्र देकर 10 अक्टूबर तक खरीद शुरू करने का अल्टीमेटम देते हुए निश्चित समय पर कदम न उठाने पर 11 अक्टूबर से बाजरे के साथ उपमंडल कार्यालय के समीप मंडी के मुख्य द्वार पर ही पड़ाव डालने का ऐलान किया। किसान भाकियू जिला प्रधान धर्मपाल, जिला सचिव हरपाल ने कहा कि, हमारे लिए खरीद एजेंसी ने कोई कदम नहीं उठाया जिससे मजबूरीवश आंदोलन शुरु करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि, किसान अब चुप्प नहीं बैठेंगे और आज सोमवार से बाढड़ा मंडी के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।

सरकार ने आखिर क्या किया?
सरकार द्वारा बाजरा उत्पादक किसानों का 'मेरी फसल मेरा पोर्टल' पर पंजीकृत फसलों के पंजीकरण के बाद राजस्व व कृषि विभाग से पंजीकरण के बाद उनको एमएसपी दरों पर खरीद करने का खाका तैयार किया गया था। हालांकि, जब किसान अपनी फसलों को बेचने की तैयारी में जुटे तो एक सप्ताह पहले अचानक ही सरकार ने बाजरा खरीद कार्य को भावांतर योजना में तब्दील कर प्रत्येक किसान के कुल उत्पादन के एक चौथाई हिस्से की खरीद करने व शेष बकाया तीन हिस्सों को भावांतर योजना में प्रति क्विंटल छह सौ रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा कर दी। जिससे किसानों की नींद उड़ गई। बहरहाल, सरकार के फैसले के विरोध में किसान नेताओं ने किसानों से बाजरे को ट्रैक्टर ट्राली में भरकर धरनास्थल पर ले आने की अपील की है।












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