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Lokender Singh Funeral: तिरंगे में लिपटकर लौटा शहीद, दुधमुंहे ने पिता को दी अंतिम विदाई, पत्थर बन गई पत्नी!

Lokendra Singh Sindhu Funeral: हरियाणा के रोहतक जिले के खेरी साध गांव का सपूत, स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु (32), तिरंगे में लिपटकर अपने आखिरी सफर पर चला गया। राजस्थान के चुरू में 9 जुलाई को जगुआर फाइटर जेट क्रैश में को-पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज सिंह देवड़ा के साथ लोकेंद्र शहीद हुए।

लोकेंद्र का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ हुआ। बड़े भाई ज्ञानेंद्र सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी, जबकि हजारों आंसुओं भरी आंखों और 'जय हिंद' के नारों के बीच गांव ने अपने शहीद को अलविदा कहा।

Lokendra Singh Sindhu Funeral

घर लौटा वीर: आंसुओं में डूबी विदाई

10 जुलाई 2025 शाम 6 बजे जब लोकेंद्र की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर खेरी साध पहुंची, तो गांव का हर दिल सिसक रहा था। पत्नी डॉ. सुरभि, अपने एक महीने के नवजात बेटे को गोद में लिए, अपने शहीद पति के अंतिम दर्शन करने पहुंचीं। उनकी आंखें पत्थर सी थीं, जैसे दर्द को दिल में समेटकर वे अपनी मांग के 'सिंदूर' की आखिरी झलक देख रही हों। श्मशान घाट में वायुसेना ने सुरभि को तिरंगा और लोकेंद्र की कैप सौंपी। सुरभि ने इसे माथे से लगाया, मानो अपने वीर पति की शहादत को गले लगा रही हों। बड़े भाई ज्ञानेंद्र ने बहन अंशी का हाथ थामकर कहा, 'हमारा लोकेंद्र मुस्कान के साथ हमें छोड़कर गया है, उसे मुस्कान के साथ ही विदा करेंगे।' मगर, नारों और सम्मान के बीच हर आंख नम थी।

हादसा, जिसने छीन लिया गांव का गौरव

लोकेंद्र 30 जून को ड्यूटी जॉइन करने के बाद प्रशिक्षण उड़ान पर थे। वे ट्रेनी पायलट ऋषिराज सिंह देवड़ा को प्रशिक्षण दे रहे थे, जब जगुआर फाइटर जेट क्रैश हो गया। बड़े भाई ज्ञानेंद्र ने बताया कि हादसे की खबर टीवी से मिली। उन्होंने नासिक में तैनात वायुसेना के विंग कमांडर जीजा से संपर्क किया।

ज्ञानेंद्र के अनुसार, पुराने जगुआर जेट की तकनीकी खामी थी कि 500 फीट से नीचे पायलट इजेक्ट नहीं कर सकता। लोकेंद्र ने आखिरी पल तक जेट को आबादी से दूर ले जाने की कोशिश की, ताकि नीचे रहने वाले लोग सुरक्षित रहें। मगर, तकनीकी खराबी ने उन्हें मौका नहीं दिया। ज्ञानेंद्र ने गमगीन स्वर में कहा, 'पुराने जेट्स को बदलना होगा, ताकि हमारे और बेटों को न खोना पड़े।'

लोकेंद्र: एक सपूत, जिसने देश को सब कुछ दिया

  • जन्म: 9 नवंबर 1992, रोहतक, हरियाणा
  • परिवार: पत्नी डॉ. सुरभि, एक महीने का बेटा, माता-पिता, और भाई ज्ञानेंद्र
  • शिक्षा और करियर: बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल, एनडीए में तीन साल की कठिन ट्रेनिंग, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक-एक साल की ट्रेनिंग। 2015 में वायुसेना में कमीशंड, 10 साल तक देश की सेवा।
  • स्वभाव: मिलनसार, हमेशा मुस्कुराता चेहरा, बदला लेने की आदत से कोसों दूर।
  • दादा की यादें: बलवान सिंह ने सिसकते हुए बताया, 'लोकेंद्र बचपन से नेकदिल था। उसका सपना था देश की सेवा करना, और उसने इसे पूरा किया।'

लोकेंद्र और उनकी बहन अंशी एक ही पद पर वायुसेना में थे, हालांकि अंशी अब रिटायर हो चुकी हैं। उनके जीजा अभी भी विंग कमांडर के पद पर देशसेवा में जुटे हैं।

एक महीने पहले बने थे पिता

लोकेंद्र की शादी को साढ़े चार साल हुए थे। 10 जून 2025 को ही वे अपने बेटे के पिता बने थे। शहीद होने से पहले उन्होंने वीडियो कॉल पर अपने नन्हे बेटे का चेहरा देखा था। उस मासूम को शायद कभी न पता चले कि उनके पिता ने देश के लिए क्या बलिदान दिया। सुरभि की चुप्पी और आंखों में ठहरा दर्द बयां कर रहा था कि वे अपने शहीद पति की विरासत को गर्व के साथ संभालेंगी।

गांव का दर्द: 'हमारा लाल अमर रहे'

हादसे की खबर ने खेरी साध गांव को शोक में डुबो दिया। ग्रामीणों के लिए लोकेंद्र सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि गांव का गौरव थे। दादा बलवान सिंह ने कहा, 'वह बचपन से ही देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहता था। उसने अपने सपने को जिया और शहादत दी।' परिवार और ग्रामीणों ने सरकार से पुराने जेट्स को बदलने की गुहार लगाई, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।

सैन्य सम्मान के साथ अलविदा

श्मशान घाट पर वायुसेना के अधिकारियों ने लोकेंद्र को पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी। हजारों लोग जमा हुए और "लोकेंद्र सिंह अमर रहें" के नारे गूंजे। यह दृश्य हर दिल को झकझोर गया। तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जब अग्नि को समर्पित हुआ, तो मानो एक सपूत की शहादत ने पूरे देश को गर्व और दर्द का मिश्रित अहसास कराया।

लोकेंद्र सिंह सिंधु की शहादत एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की अपूरणीय क्षति है। उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि हमारे वीर जवान हर पल अपनी जान दांव पर लगाकर देश की रक्षा करते हैं। उनके नवजात बेटे और पत्नी सुरभि के लिए यह दर्द भले ही कभी कम न हो, मगर लोकेंद्र का नाम देश के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

ये भी पढ़ें- '500 फीट नीचे गए तो नहीं बच सकते', Jaguar Crash में शहीद लोकेंद्र के भाई ने बताई चूक की जड़, 9 नंबर बना अनलकी

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