अनिल विज के ग़दर वाले बयान पर किसान नेता ने कहा- ये एतिहासिक ग़दर है, जीतकर ही ख़त्म होगा आंदोलन
कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलनरत हैं। इसमें ज़्यादातर सियासी पार्टियां किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रही हैं।वहीं हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज का किसान आंदोलन को ग़दर कहा जा सकता है वाले बयान पर सियासत गरमा गई है।
चंडीगढ़, सितंबर 16, 2021। कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलनरत हैं। इसमें ज़्यादातर सियासी पार्टियां किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रही हैं। इसी बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज का किसान आंदोलन को ग़दर कहा जा सकता है वाले बयान पर सियासत गरमा गई है। इसी कड़ी में हरियाणा के किसान नेता विकल पचार ने वन इंडिया हिंदी से बात की उन्होंने अनिल विज पर कई कटाक्ष भी किए।

अनिल विज को शब्दों का चयन नहीं आता- विकल पचार
हरियाणा के किसान नेता विकल पचर ने कहा कि अनिल विज किसान आंदोलन को ग़दर बोल रहे हैं उनको शब्दों का चयन नहीं आता है। अगर वह इस आंदोलन को ग़दर कह रहे हैं तो हां हम लोग क़बूल करते हैं कि ये ग़दर ही है। क्योंकि 1857 की क्रांति को उस दौर का ग़दर ही कहा जाता है। ग़दर का मतलब है जन विरोध, राजा और तानाशाह के ख़िलाफ़ विरोध को ग़दर कहते हैं। 1857 में जिस तरह सिपाहियों ने तलवार और भाला लेकर लड़ाई की थी। किसान आंदोलन दुनिया में एक अलग तरह का ग़दर है। इसके अंदर लाखों की तादाद में किसान एक तानाशाह के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस की लाठियां खा कर लगाकार शहादतें दे रहे हैं।

'किसान कर रहे शांतिपूर्ण तरीक़े से आंदोलन'
विकल पचार ने कहा कि इस ग़दर में किसान जिस पुलिसवाले से लाठी खाते हैं उस पुलिस वाले खाना खिलाने का काम, उस पुलिस वाले को पानी पिलाने का काम भी हमारे किसान साथी कर रहे हैं। उन्होंने कहा की लगातार 700 किसानों के शहादत के बाद आंदोलन के 9 महीने से ज़्यादा होने के बावजूद आज तक किसानों ने किसी पुलिस वाले या फ़ौजी पर हमला नहीं किया है। विकल पचार ने अनिल विज पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये ऐतिहासिक ग़दर है। हमलोगों के शांतिपुर्ण प्रदर्शन को देख कर केन्द्र और हरियाणा सरकार बेतुकी बयानबाज़ी कर रही है। कहीं आपको देश छोड़ कर नहीं भागना पड़ जाए, आत्महत्या ना करनी पड़ जाए। इसलिए जनता के ग़दर को समझें।

'किसानों की मांगों को पूरा करे सरकार'
विकल पचार ने कहा कि सरकार देश की 70 फ़ीसद आबादी को उनके हक़ों को पूरा कराने का काम करे। वहीं उन्होंने कहा कि हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ का बयान आया कि बॉर्डरों पर आंदोलन की वजह से हरियाणा के अंदर नशा बढ़ रहा है। विकल पचार ने इस बयान पर तंज़ कसते हुए कहा कि बिल्कुल हरियाणा में नशा बढ़ा है। हरियाणा में नशा बढ़ा है अपने हक़ की लड़ाई लड़ने का, हरियाणा में नशा बढ़ा है तानाशाह के ख़िलाफ़ डट कर खड़े होने का, नशा बढ़ा है अपने हक़ और उसूलों की लड़ाई लड़ने का, नशा बढ़ा है शहादतें देकर भी अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हटने का, नशा बढ़ा है लगातार ज़ुल्म सहते हुए शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का, उन्होंने कहा कि ये नशा बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक है।

'अपने विधानसभा में जनसभा करें धनखड़'
विकल पचार ने कहा कि धनखड़ कह रहे थे कि हरियाणा में ड्रग्स, शराब का नशा करके किसान बॉर्डरों पर शरारतें कर रहे हैं। अगर आपकी यह बात जायज़ है तो इसके लिए ज़िम्मेदार हरियाणा की पुलिस व्यवस्था. सीएम मनोहर लाल खट्टर, गृहमंत्री अनिल विज, उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला हैं। उन्होंने कहा कि धनखड़ ने किसानों पर ग़लत आरोप लगाए हैं अगर आरोप लगाने हैं तो अपने सरकार पर लगाएं जिन्होंने कोरोना काल में करोड़ों रुपये की शराब बेच दी और उस पर कोई जांच नहीं कराई गई। विकाल पचार ने कहा कि ओम प्रकाश धनखड़ अपने विधानसभा में सभाएं करें और वहां किसानों पर आरोप लगा कर दिखाएं।

'आरोपों का जवाब देते रहेंगे किसान'
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज अम्बाला में जनसभा कर के ये आरोप लगा कर उन्हें साबित कर के दिखाएं। अगर आप आरोपों को साबित नहीं कर पाए तो इसका मतलब है कि किसान मज़बूती के साथ आंदोलन कर रहे हैं। आप लोगों ने आंदोलन को कभी जाटों का आंदोलन कहा, कभी नशेड़ियों का आंदलोन कहा, कभी आंदोलनकारियों को हिंसाकारी कहा। आप लोगों ने सभी कोशिशें कर के देख लीं लेकिन ये आंदोलन बिना जीत के ख़त्म नहीं होने वाली है। कृषि कानूनों को वापस होने तक ये आंदोलन इसी तरह चलता रहेगा और किसान आपके आरोपों का जवाब देते रहेंगे।
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