जिन सीटों पर राहुल गांधी ने किया चुनाव प्रचार, वहां क्या रहा कांग्रेस का हाल? 12 में से मिले इतने नंबर
Haryana Chunav Result: हरियाणा में भाजपा ने एक बार फिर बहुमत हासिल कर सरकार बना ली है। इस बीच, कांग्रेस को राज्य में लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों और एग्जिट पोल के पूर्वानुमानों के विपरीत, कांग्रेस को हरियाणा में सत्ता से अपनी 10 साल की अनुपस्थिति को खत्म करने का भरोसा था। हालांकि, उनके प्रयासों को वांछित परिणाम नहीं मिले।
कांग्रेस के प्रमुख नेता और प्रचारक राहुल गांधी ने हरियाणा में 12 चुनावी कार्यक्रम किए। इनमें रैलियां, जनसभाएं और दौरे शामिल थे। उनकी सक्रिय मौजूदगी के बावजूद, कांग्रेस उन 12 विधानसभा सीटों पर कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई।
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राहुल ने जहां चुनाव प्रचार किया उनमें महेंद्रगढ़, नूंह, सोनीपत, गोहाना, थानेसर, नारायनगढ़, बरवाला, गन्नौर, बहादुरगढ़ और असांध विधानसभा सीट शामिल थी जिनमें से पार्टी के हिस्से केवल थानेसर, नूंह और नारायनगढ़ की सीट आई।
वो 12 विधानसभा क्षेत्र जहां राहुल गांधी ने प्रचार किया उनमें से केवल पांच पर ही कांग्रेस जीत दर्ज कर पाई। इन इलाकों में भाजपा को चार सीटें मिलीं। गनौर, सोनीपत और बहादुरगढ़ में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए, जिससे कांग्रेस को निराशा हाथ लगी। गनौर में खास तौर पर कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा। इस नतीजे ने पार्टी के भीतर लगातार गुटबाजी को उजागर किया, जिसे राहुल गांधी का अभियान हल नहीं कर सका।
कांग्रेस के भीतर आंतरिक संघर्ष
प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा से हाथ मिलवाकर एकता को बढ़ावा देने की कोशिश की। हालांकि, यह इशारा अंदरूनी मतभेदों को दूर करने में विफल रहा। पार्टी की अंदरूनी कलह तब स्पष्ट हो गई जब वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खेमे की रणदीप सुरजेवाला के समर्थकों से झड़प हो गई।
कुमारी शैलजा का असंतोष विशेष रूप से ध्यान आकर्षित क्र रहा था। उनके खेमे ने चुनावों के दौरान एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने लंबे समय तक खुद को अभियान से अलग रखा और जब शामिल हुईं तो अनिच्छा से भाग लिया।
प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों का प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में सिर्फ़ चार रैलियां कीं, लेकिन मतदाताओं पर उनका काफ़ी प्रभाव पड़ा। 16 अगस्त को चुनाव घोषित होने के बाद 14 सितंबर को उनकी पहली रैली हुई। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मोदी ने प्रचार किया, वहां जीत की दर 75 प्रतिशत रही। प्रधानमंत्री के भाषणों ने हरियाणा के लोगों को प्रभावित किया, जिससे इन क्षेत्रों में भाजपा को सफलता मिली।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति
कांग्रेस ने अपने अभियान के दौरान बेरोजगारी, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना और महंगाई जैसे मुद्दों को उठाकर एक दशक पुरानी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने जोश के साथ शुरुआत की, लेकिन धीरे-धीरे अंदरूनी कलह उजागर हो गई।
आम आदमी पार्टी की मौजूदगी ने कांग्रेस की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा, राज्य के शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद ने भी उनकी स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
कुमारी शैलजा ने पार्टी नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाते हुए दलित और महिला कार्ड खेलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्ज़ा करने का लक्ष्य बनाया। इस महत्वाकांक्षा ने चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही आंतरिक तनाव को बढ़ा दिया। इस वजह से यह स्पष्ट हो गया कि हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार में आंतरिक कलह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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