3700 एकड़ में फैले देश के इस अभ्यारण्य में पनप रही शेरों की नई पीढ़ी, अब तक 22 शावक जन्मे

मोरबी। शेर को जंगल का राजा कहा जाता है। शेरों की देश-दुनिया में दो प्रजातियां ही बहुतायत में मिलती हैं- एक अफ्रीकी शेर और दूसरे एशियाई शेर। एशियाई शेर को एशियाटिक लॉयन भी कहा जाता है और मौजूदा समय में भारत का "गिर-जंगल" इन शेरों का एकमात्र बसेरा माना जाता है। एशियाई शेर आकार में अफ्रीकी शेरों की तुलना में छोटे होते हैं। इनका रंग भी अफ्रीकी शेरों के मुकाबले ज्यादा गहरा होता है। हमारे यहां के शेर दुनिया के कई देशों के जंगल में ले जा जा चुके हैं और वहां इन शेरों की नई प्रजातियां (अथवा पीढ़ी) पैदा करने की कोशिशें भी होती रही हैं।

3700 एकड़ में पनप रही सिंहों की नई पीढ़ी

3700 एकड़ में पनप रही सिंहों की नई पीढ़ी

शेर की जो नई पीढ़ी अभी दुनिया की नजरों में नहीं आई है, वो भी अपने ही देश में पनप रही है। जी हां, उन शेरों तक अभी पर्यटकों यहां तक कि उस इलाके के लोगों की भी पहुंच नहीं है। शेर की इस पीढ़ी को तैयार किया जा रहा है- गुजरात के रामपरा अभ्यारण्य में। रामपरा अभ्यारण्य करीब 3700 एकड़ में फैला है। यह अभ्यारण्य मोरबी जिले के वांकानेर में पड़ता है। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि, रामपरा अभ्यारण्य चिंकारा हिरण और नीलगाय के लिए जाना जाता रहा है।

गुजरात के मोरबी जिले में हैं रामपरा अभ्यारण्य

गुजरात के मोरबी जिले में हैं रामपरा अभ्यारण्य

अब रामपरा अभ्यारण्य में सिंहों की नई पीढ़ी तैयार हो रही है। ताजा गणना के अनुसार, यहां सिंहों की नई पीढ़ी के 22 शावक मौजूद हैं। शेरों के लिए चैंबर जैसे यहां अलग-अलग छोटे-छोटे जंगल हैं। जहां 11 वयस्क शेर हैं और उनसे नई पीढ़ी वाले शावक जन्मे हैं। इस अभ्यारण्य पर 1988 में काम शुरू हुआ था, उसके बाद 2011 में शेरों के लिए मंजूरी दी गई थी।

सिर पर घने बाल, ऐसे होते हैं एशियाई शेर

सिर पर घने बाल, ऐसे होते हैं एशियाई शेर

एशियाई शेर को आपने कहीं देखा तो होगा, भारत में शेरों की सैंक्चुअरी तो कई स्थानों पर हैं। हालांकि, गिर के जंगल इनका एकमात्र स्थाई निवास माने जाते हैं। एशियाई शेर का रंग मटमैला और बाल घने-लंबे होते हैं। यह ऐसा जंगली जानवर है, जिसका नाम तो सभी लेते हैं, लेकिन इसकी जिंदगी के बारे में कम ही लोग जानते हैं। आज hindi.oneindia.com आपको बताएंगा शेरों से जुड़ी सभी जरूरी बातें...

गुजरात में हैं ऐसे 600 से ज्यादा शेर

गुजरात में हैं ऐसे 600 से ज्यादा शेर

सामान्यत: पश्चिमी देशों के लोग ही गुजरात के शेरों को 'एशियाटिक लायंस' कहते हैं। ये आकार में अफ्रीकी शेरों से छोटे होते हैं, लेकिन काफी फुर्तीले होते हैं। गुजरात में इनकी संख्या 100-150 नहीं, बल्कि 675 है। और इसलिए यह भी सच है कि, पूरे एशिया महाद्वीप में सबसे ज्यादा शेर यहीं पर हैं। हर साल दुनिया भर से हजारों की संख्या में सैलानी यहां आते हैं। यह अलग बात है कि, इस बार कोरोना के कारण मूवमेंट पर रोक है।

इतना बड़ा है गुजरात में शेरों का इलाका

इतना बड़ा है गुजरात में शेरों का इलाका

शेरों के लिए गुजरात में वनविभाग ने गिर अभ्यारण्य संरक्षित क्षेत्र का ख्याल रखा है। जिसके चलते यह अब महज 1,400 वर्ग किलोमीटर तक ही सीमित नहीं रह गया, बल्कि यहां शेर अब 21,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में घूमते देख जा सकते हैं। वन विभाग की एक रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया कि, गिर के वन एवं उसके आसपास शेरों के विचरण वाले क्षेत्र में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 9 जिलों में यह बढ़कर 30,000 वर्ग किमी हो गया है। इससे पहले 2015 में शेरों के पदचिह्न पाए जाने का कुल क्षेत्र पांच जिलों में 22000 वर्ग किमी ही था।

सक्करबाग जू दुनिया का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर

सक्करबाग जू दुनिया का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर

गुजरात में जूनागढ़ स्थित साकारबाग प्राणी उद्यान, जिसे सक्करबाग चिड़ियाघर या जूनागढ़ चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है, एक 84 हेक्टेयर (210 एकड़) का चिड़ियाघर है, जो 1863 में खोला गया था। अब यह शेरों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर माना जाता है। यहां हफ्तेभर में शेर के जन्म की खबर आ जाती है।

देश के इस जंगल में शेरों से ज्यादा शेरनियां

देश के इस जंगल में शेरों से ज्यादा शेरनियां

वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 30 साल में शेरों की संख्या ढाई तक गुना बढ़ गई है। मगर, इससे भी ज्यादा खुशी की खबर यह है कि, शेरों के मुकाबले शेरनियां ज्यादा पैदा हुईं। अब कुल 674 सिंहों में 161 नर हैं, जबकि मादा 260 हैं। अल्प व्यस्क शेरों की संख्या 94 है, जिनमें 45 नर और 49 मादा हैं। वहीं, शावकों की संख्या 137 है और अचिन्हित लिंग वाले 22 शेर हैं।

कितना होता है शेर में वजन?

कितना होता है शेर में वजन?

एक शेर (Lion) का वजन 190 किलोग्राम तक होता है और शेरनी का वजन 130 किलोग्राम तक होता है। हालांकि, गुजरात में कुछ शेरों का वजन 200 किलो तक भी पाया गया है। गुजरात में शेर की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घण्टा तक मानी गई है।

  • क्या होता है शेर का पसंदीदा शिकार?

शेर के पसंदीदा शिकारों में हिरण, नीलगाय जैसे पशु आते हैं। शेर बारहसिंगा, गाय और अपने से छोटे मांसाहारी पशु को भी चाव से खाते हैं। वैसे तो शेर को जंगल का राजा कहते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि शेर घास के मैदानों में रहते हैं।

  • कितने तरह के होते हैं शेर?

दुनिया में खासकर दो तरह के शेर देखे जा सकते हैं- एक एशियाटिक और दूसरे अफ्रीकन। इनके अलावा कुछ मटमैले या सफेद रंग के शेर भी मिलते हैं। मगर, ज्यादातर शेर की दो प्रजाति होती हैं- एशियाई और अफ्रीकन।

हाथी का शिकार अकेले नहीं करते?

हाथी का शिकार अकेले नहीं करते?

कहा जाता है कि शेर जंगल के राजा होते हैं। शेर अक्सर अकेले ही शिकार करते हैं। मगर, हाथी जैसे बड़े जानवर का शिकार शेर अकेले नहीं करता है। वो उनका शिकार झुंड में करता है। एक फैक्ट यह भी है कि, शिकार शेरनी करती है और शेर का कार्य परिवार की रक्षा करना होता है।

  • कितनी दूर तक सुना सकते हैं दहाड़?

हट्टा-कट्टा शेर जंगल में सुबह-सुबह दहाड़े तो उसकी आवाज 7 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है। शेर की सुनने की क्षमता भी बहुत होती है। ऐसा कहते हैं कि वो एक मील दूर से भी अपने शिकार की आवाज़ सुन लेते हैं।

  • एक दिन में कितने समय तक सोता है?

शेर दिन में ज्यादातर समय सोकर गुजारता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शेर पूरे 20 घण्टे सोता है। ऐसा भी कहा जाता है कि, शेर एक बार में 50 से अधिक बार शेरनी से संभोग करते हैं।

कितने साल जी सकता है शेर?

कितने साल जी सकता है शेर?

शेर सामान्यत: डेढ़ दशक तक जीते हैं। स्वस्थ शेर की उम्र 16 से 20 वर्ष होती है। दुख की बात यह है कि, गुजरात में शेरों की मृत्यु काफी पहले हो जाती है।

  • कई देशों के राष्ट्रीय पशु हैं शेर

भारत में बाघ राष्ट्रीय पशु है। लेकिन शेर भी कई देशों का राष्ट्रीय पशु है। जिनमें- अल्बानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, इथोपिया, नीदरलैंड इत्यादि शामिल हैं। ऐसा कहा जाता है कि, 1972 से पहले शेर भारत का राष्ट्रीय पशु था, लेकिन बाद में बाघ को राष्ट्रीय पशु बना दिया गया।

  • अशोक के स्तम्भ में हैं शेर

भारत का राष्ट्रीय चिन्ह जो कि अशोक स्तम्भ है, उसमें शेर का चित्र अंकित है। शेरों के बारे में यह भी अच्छी बात है कि, ज्योतिष शास्त्र में सिंह नामक राशि होती है। इस राशि के नाम वाले लोगों को काफी भाग्यशाली माना जाता है।

शेर और शेरनी की बड़ी पहचान

शेर और शेरनी की बड़ी पहचान

नर शेर की गर्दन पर बाल होते हैं, लेकिन मादा की गर्दन पर बाल नहीं होते हैं। गुजरात में शेरनियां नदी पार भी कर लेती हैं और आपको शायद पता ना हो, तो बता दें शेर तैर भी सकता है। सामान्यत: इन्हें पानी में जाने से डर ही लगता है।

बड़ी बिल्ली भी कहे जाते हैं शेर
शेर बिल्ली की प्रजाति में आता है। इन्हें बिग कैट कहा जाता है। शेर का वैज्ञानिक नाम पैंथेरा लियो (Panthera Leo) है। बड़ी रोचक बात यह भी है कि दुनिया मे शेरों से ज्यादा उनकी मूर्तिया हैं।

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