Morbi Bridge Collapse: मोरबी हादसे पर गुजरात सरकार का बड़ा कदम, पूरी निकाय को किया भंग
Morbi Bridge Collapse: गुजरात के मोरबी में ब्रिज टूट जाने की वजह से कई लोगों की मौत हो गई थी। अब इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मोरबी निकाय को भंग कर दिया गया है।

Gujarat Morbi Accident: गुजरात के मोरबी में पिछले साल बड़ा हादसा सामने आया था, यहां पुल टूट जाने की वजह से कई लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में अब बड़ी जानकारी सामने आई है। गुजरात सरकार ने मोरबी निकाय को भंग कर दिया है। गौर करने वाली बात है कि मोरबी में निकाय में भी भारतीय जनता पार्टी का शासन है।
मोरबी में हादसे के पांच महीने के बाद प्रदेश सरकार ने मोरबी निकाय को भंग करने का फैसला लिया है। बता दें कि इस हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग इस हादसे में घायल हो गए थे। यह हादसा पिछले साल 30 अक्टूबर को हुआ था।
मोरबी के डीएम ने बताया कि प्रदेश सरकार ने मोरबी निकाय को भंग कर दिया है। मोरबी के मोछू नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज टूट गया था। इस ब्रिज की मरम्मत का काम ओरेवा ग्रुप ने निकाय के साथ करार किया था।
इस हादसे के बाद से लगातार मोरबी निकाय पर सवाल खड़े हो रहे थे। जनवरी माह में प्रदेश के शहरी विकास विभाग ने इस मुद्दे पर निकाय को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और पूछा था कि आखिर क्यों निकाय को भंग ना किया जाए, जब वह अपने जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर सकी है।
इस हादसे के बाद इसकी जांच में कई तरह की खामियां सामने आई थी। निकाय की ओर से भी लापरवाही की बात भी सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार ओरेवा ग्रुप की ओर से दी गई चेतावनी पर निकाय ने ध्यान नहीं दिया। ग्रुप ने निकाय को कई बार पत्र लिखा था, यह पत्र 2018 से 2020 के बीच लिखा गया था, जिसमे चेतावनी दी गई थी कि अगर ब्रिज को आम जनता के लिए जारी रखा गया तो कई हादसे हो सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निकाय ने चेतावनी के बाद किसी भी तरह का एक्शन नहीं लिया। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। निकाय ने अपने जवाब में कहा कि हम निर्दोष हैं, हमने ओरेवा ग्रुप को ब्रिज हैंडओवर नहीं किया था। 52 में से 41 पार्षदों ने व्यक्तिगत जवाब दिया है, जिसमे अधिकतर पार्षदों ने कहा है कि हमे अग्रीमेंट की जानकारी नहीं थी जिसके तहत ओरेवा ग्रुप को ब्रिज दिया गया था। बता दें कि सभी 52 पार्षद भाजपा के पार्षद हैं।












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