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62 साल की नवलबेन चौधरी 1 साल में बेच रहीं 1 करोड़ रु. से ज्यादा का दूध, बिना पढ़े ही बनीं प्रेरणा

बनासकांठा। कोरोना महामारी की वजह से ठप हुए रोजगार-धंधों के बीच इन दिनों "आत्मनिर्भर भारत" का नारा दिया जा रहा है। ऐसे में बनासकांठा जिले की वडगाम तहसील के नगाणा गांव की एक अनपढ़ महिला का नाम हर किसी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन सकता है। यहां 62 वर्षीय नवलबेन चौधरी, दूध बेचकर सालाना लाखों रुपए कमाती हैं। बीते एक साल में उन्होंने 1 करोड़ 10 लाख रुपए का दूध बेचा। हर महीने लगभग 3.50 लाख रुपए कमाए। बता दिया जाए कि, नगाणा गांव राजस्थान राज्य के निकट पड़ता है और यहीं वह पशुपालन का व्यवसाय करती हैं। जिसमें उनके पास मुख्य पशु गाय-भैंस हैं।

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    62 साल की नवलबेन चौधरी 1 साल में बेच रहीं 1 करोड़ रु. से ज्यादा का दूध, बिना पढ़े ही बनीं प्रेरणा
    सालाना 1 करोड़ रु. से भी ज्यादा दूध की बिक्री

    सालाना 1 करोड़ रु. से भी ज्यादा दूध की बिक्री

    नवलबेन का पूरा नाम नवलबेन दलसंगभाई चौधरी है। उनकी डेयरी में 80 भैंस और 45 गायें है, जिनसे रोजाना सुबह-शाम का 1 हजार लीटर दूध मिलता है। वो बताती हैं कि 'मेरे चार बेटे हैं और एमए, बीएड कर चारों अब शहरों में नौकरी कर रहे हैं। वो भी मदद करने लगे हैं। साल 2019 मैंने 87.95 लाख रुपए का दूध बेचा था। जिसके लिए मैं बनासकांठा जिले में सबसे ज्यादा दूध बेचने वाली विक्रेता बताई गई। इसी तरह इस साल (2020) में 1 करोड़ 10 लाख रुपए का दूध बेचकर भी पहले नंबर पर ही हूं। अभी मैं 80 भैंस और 45 गायों की डेयरी चलाती हूं।'

    आस-पड़ोस के इलाकों में भी ऐसे धंधे शुरू

    आस-पड़ोस के इलाकों में भी ऐसे धंधे शुरू

    ताज्जुब की एक बात यह भी है कि, बीते 2 सालों में नवलबेन को 2 लक्ष्मी अवॉर्ड और 3 बेस्ट पशुपालक के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। इन दिनों उनकी डेयरी से रोज लगभग हजार लीटर निकलता है। दूध की वजह से ही उन्हें सालाना 75 लाख रुपए से भी ज्यादा की कमाई हुई। उनकी देखा-देखी आस-पड़ोस के इलाकों में भी लोगों ने ऐसे ही व्यवसाय शुरू कर दिए हैं। उनके इस व्यवसाय में उच्च तकनीक एवं आधुनिक तरीके से काम किया जा रहा है।

    साल में 2.21 लाख किलो दूध उत्पादन

    साल में 2.21 लाख किलो दूध उत्पादन

    गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) के मातहत बनासकांठा जिले में बनास डेयरी चलती है। जिसे नवलबेन प्रतिदिन 750 लीटर दूध बेचती हैं। इस तरह वह वहां के अधिकारियों व प्रबंधकों से भी कई गुना ज्यादा कमाई कर लेती हैं। एक स्थानीय न्यूज पोर्टल के मुताबिक, वो साल में 2.21 लाख किलो दूध का उत्पादन करती हैं।

    'आत्मनिर्भर भारत' में योगदान दे रही हूं'

    'आत्मनिर्भर भारत' में योगदान दे रही हूं'

    नवलबेन को बनास डेयरी की ओर से बनासकांठा जिले में दूध की कमाई के मामले में प्रथम स्थान दिया गया है। पशुपालन व दूध की बिक्री से प्रतिदिन 30 हजार रुपए और वर्ष में एक करोड़ 10 लाख रुपए कमाने वाली नवलबेन कहती हैं कि, मैं भी 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार कर रही हूं।

    इस तरह मुख्य व्यवसाय बन गया पशुपालन

    इस तरह मुख्य व्यवसाय बन गया पशुपालन

    जब ब्याह हुआ था तो ससुराल नगाणा गांव में मात्र 15-20 पशु थे। फिर नवलबेन की मेहनत व सूझबूझ से ससुराल में पशुपालन का व्यवसाय ही उस परिवार का सबसे बड़ा जरिया बन गया। दिलचस्प बात यह भी है कि, यहां पिछले पांच वर्षों में एक लाख से अधिक महिलाएं पशुपालन के साथ दूध के व्यवसाय से जुड़ी हैं। जिनमें से कई महिलाओं ने अन्य 5-10 महिलाओं को जोड़ा है।

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