Gorakhpur: सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सीएम योगी ने किया शुभारंभ
सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखनाथ मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ सभा को संबोधित किया।

Gorakhpur News: गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ के प्रथम दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सीएम योगी ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर अयोध्या सहित देश के कई हिस्सों से संत आए हुए हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपने हजारों वर्षों की पूर्वजों की थाती को समेटकर आज श्रद्धालुओं के लिए प्रस्तुत कर रहे पूज्य कथा व्यास डॉ॰ श्यामसुन्दर पाराशर जी भावपूर्ण कथा का श्रवण हम सभी को करा रहे हैं।
गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष अलग- अलग समय पर प्रभु की कथाओं का श्रवण विभिन्न कथा व्यास के माध्यम से कराया जाता है। आज हमारे सौभाग्य से डॉ॰ पाराशर जी उसी परम्परा की पीढ़ी के रूप में हमारे बीच में आये हैं जहां से हमें अष्टादश पुराणों के रूप में परमात्मा के स्वरूपों का ज्ञान प्राप्त होता है, आपका मैं गोरक्ष पीठ की तरफ से तथा गोरखपुर की जनता की तरफ से हार्दिक स्वागत करता हूं। भागवत कथा के आधिकारिक वक्ता डॉ॰ पराशर जी को सुनने की इच्छा आज देश के हर व्यक्ति को रहती है, आज हमें उनकी कथा के श्रवण का आनंद प्राप्त हो रहा है और वह तब जब इस पीठ में विभिन्न देव विग्रहों के मंदिर का निर्माण कर प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। मैं इस अवसर पर आए हुए समस्त संत गणों का भी स्वागत करता हूं और इसके लिए समस्त यजमान गण का धन्यवाद करता हूं साथ ही गुरु गोरखनाथ जी से कामना करता हूं कि उनकी कृपा आप सभी लोगों पर सदा बनी रहे।

कथा मंच पर श्री अयोध्या धाम से पधारे जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री राघवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण की साक्षात शब्दमयी मूर्ति है। हमारा सौभाग्य है कि हम भगवान की इस दिव्य मूर्ति का साक्षात दर्शन व श्रवण कर रहे हैं। बड़े भक्तमाल श्री अयोध्या धाम से पधारे अवधेश दास जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म को व्यवस्थित करने के लिए गोरक्षपीठ निरन्तर कार्य करती रही है। आज मंदिर में दिव्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा सनातन धर्म व हमारी संस्कृति को मजबूती प्रदान करेगी।
श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए कथा व्यास डॉ॰ श्यामसुन्दर पाराशर जी ने कहा कि गोरक्षपीठाधीश्वर पूज्य योगी जी न केवल गोरक्षपीठ व अवधपीठ में हीं अपितु पूरे उत्तर प्रदेश में प्राण फूकने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे मुख्यमंत्री के सान्निध्य में कथा का श्रवण कराना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि भगवान सच्चिदानंद घन हैं, उनके इस वास्तविक स्वरूप का इस कथा के माध्यम से श्रवण करके अनुभव किया जा सकता है। भगवान ने हमें यह जो मानव शरीर दिया है उसको चलाने के लिए हमें ब्रह्मा जी ने वेद आदि शास्त्र दिये हैं। जैसे किसी मशीन को चलाने के लिए हमें बुकलेट मिलती है उसी बुकलेट के अनुसार मशीन का संचालन करते हैं तो वह मशीन अच्छी चलती है, उसी प्रकार से हमारे जीवन जीने के लिए शास्त्र रूपी बुकलेट हमें मिली है, हमें इनके अनुसार अपना जीवन यापन करना चाहिए।

कथा व्यास ने कहा कि मरने का भय उसी को होता है जो आगे की यात्रा के लिए तैयारी नहीं किया रहता है, सन्त लोग भगवान के कीर्तन मनन के द्वारा अपने आगे की तैयारी किये रहते हैं इसलिए उन्हें मरने का डर नहीं ।
कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ। संचालन डॉ॰ श्रीभगवान सिंह ने किया।
कथा में प्रमुख रूप से बड़ा भक्तमाल अयोध्या से स्वामी अवधेश कुमारदास जी महाराज, अयोध्या से डॉ स्वामी राघवाचार्य जी महाराज, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ जी, देवीपाटन से महंत मिथलेशनाथ जी महाराज, वाराणसी से संतोषदास सतुआबाबा, कटक उड़ीसा से महंत शिवनाथ, बलिया से महंत सुजीतदास जी, स्वामी अनुपानंद जी महाराज, स्वामी अर्जुनानंद जी, महंत पंचानन पुरी, महंत रामदास, नवनिर्वाचित महापौर गोरखपुर डॉक्टर मंगलेश श्रीवास्तव, पुष्पदंत जैन, रामजनम सिंह तथा यजमान विष्णु अजीतसरिया, ओम जालान, अतुल सराफ, चंद्र प्रकाश अग्रवाल, तन्मय मोदी, राजेश मोहन सरकार, शंभू शाह, श्रवण जालान, प्रदीप जोशी सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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