UP : 11 फरवरी को है दीनदयाल उपाध्याय की पुण्य तिथि, स्मृति सप्ताह का हुआ शुभारंभ

गोरखपुर विश्वविद्यालय में दीनदयाल उपध्याय की पुण्य तिथि से पूर्व स्मृति सप्ताह का शुभारंभ हुआ।

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Gorakhpur News: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्य तिथि 11फरवरी को है। जिससे पूर्व गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्मृति सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। आज से इस सप्ताह का शुभारंभ हुआ। पहले दिन"पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार दर्शन " विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रोफेसर संजीत कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को शोधपीठ के उद्देश्यों से परिचित कराते हुए कहा कि दीनदयाल के कृतित्व और विचारों में एकात्मता थी, वे राजनीति में भारतीय तत्व के विवेचक और प्रवक्ता थे। राष्ट्र को दिशा देने में दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का बड़ा योगदान हो सकता है।

अंत्योदय की संकल्पना एक ऐसा विचार दर्शन है जिसके अंतर्गत समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता की जाती है। उसी को ध्यान में रखकर सारी योजनाएं बनाई जाए ,तो निश्चित रूप से देश और पूरे विश्व का कल्याण संभव है उक्त बातें हैं प्रोफेसर एच के सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय,वाराणसी ने बतौर मुख्य अतिथि कही। यह दर्शन ऐसे तन्त्र की बात करता है जिसमें अन्तिम व्यक्ति को शरीर, मन, बुद्धि एवं आत्मा के आवश्यकता की पूर्ति एवं उसके सर्वांगीण विकास का अवसर मिल सकता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ रामकृष्ण उपाध्याय ,निदेशक, दीनदयाल शोध पीठ जननायक विश्वविद्यालय, बलिया ने कहा कि दीनदयाल का विचार दर्शन एक राजनीतिक विचार दर्शन से अधिक आर्थिक विचार दर्शन है दीनदयाल आर्थिक लोकतंत्र की बात करते हैं यही वर्तमान समय का सबसे महत्वपूर्ण समस्या भी है, संघर्षो से जीवन निखरता है। दीनदयाल जी के जीवन से हम सभी को यह प्रेरणा लेना चाहिए। सभी का सभी से प्रेम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन का मूल मंत्र है, प्रो. फतेह बहादुर सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा कही गयी। डॉ. रंजनलता ने कहा कि दीनदयाल एक राजनीतिज्ञ नहीं वरन महान अर्थशास्त्री एवं समाज सुधारक थे। उन्होंने वर्तमान आर्थिक समाज में समाज को कैसे एक सूत्र में पिरोया जाए के लिए मन्त्र बताए है।

अमित उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य केवल अर्थलोलुप प्राणी नहीं है वरन एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए समाज के मूल्यों की स्थापना दीनदयाल जी के विचारों का एक महत्वपूर्ण अंग है, सरकार को राष्ट्र की चिति के अनुसार रीति नीति बनानी चाहिए। रिशु ने कहा कि ग्लोबल के साथ लोकल का भी महत्व है और लोकल से ही सही विकास होगा। मनीष ठाकुर ने कहा कि हमारी संस्कृति से ही हमारा विकास सम्भव है।

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    इस अवसर पर प्रोफेसर अनुभूति दुबे, प्रो विजय चाहल, डॉ दीपेंद्र कुमार, डॉ अनुपमा कौशिक , रोशनी वर्मा ,नूरी ,अंकित शर्मा, प्रवीण तिवारी, परमवीर मिश्रा, सतीश कुमार यादव, रविकान्त तिवारी, बीनू सिंह अंशिका सिंह ,अनिकेत जयसवाल ,हर्षित, मो कफियाज, आदि छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।सभी के प्रति आभार ज्ञापन डॉ रंजनलता द्वारा किया गया।

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