पूरी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा गीता प्रेस- पीएम मोदी
PM Modi Gorakhpur Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को गोरखपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस के शताब्दी समापन समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होने गीता प्रेस को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। गीता प्रेस का इन सौ सालों में देश के विकास व निर्माण में क्या योगदान रहा पीएम ने इस पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व सीएम योगी भी मौजूद रहे।
एक जीवंत आस्था है गीता प्रेस
समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गीता प्रेस विश्व का इकलौता प्रिटिंग प्रेस है जो सिर्फ एक संस्था नहीं है बल्कि एक जीवंत आस्था है। गीता प्रेस का कार्यालय करोड़ों लोगों के लिए किसी मंदिर से जरा सा भी कम नहीं है। इसके नाम में भी गीता है और काम में भी गीता है। जहां गीता है वहां साक्षात कृष्ण हैं। जहां कृष्ण हैं वहां कर्म है और करुणा है। वहां ज्ञान का बोध भी है और विज्ञान का शोध भी है।

पूरी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा गीता प्रेस
पीएम ने कहा कि गीता प्रेस के रुप में जो आध्यात्मिक ज्योति जली आज उसका प्रकाश पूरी मानवाता का मार्गदर्शन कर रहा है। हमारा सौभाग्य है कि हम सभी इस मानवीय मिशन की शताब्दी के साक्षी बन रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर ही गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार भी दिया है। जिससे मुझे बेहद प्रसंन्नता है। यह गीता प्रेस का सम्मान है इसके योगदान का सम्मान है और इसकी सौ वर्षों की विरासत का सम्मान है।
गांधी जी का गीता प्रेस से था लगाव
पीएम मोदी ने कहा कि गांधी जी का गीता प्रेस से भावनात्मक लगाव था। एक समय था गांधी जी कल्याण पत्रिका के माध्यम से गीता प्रेस के लिए लिखा करते थे। मुझे बताया गया कि गांधी जी ने ही सुझाव दिया था कि कल्याण पत्रिका में विज्ञापन न छापे जाए। गीता प्रेस आज भी उनकी बात का शत- प्रतिशत पालन कर रहा है। इसकी करोड़ों प्रतियां प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तकें लागत से भी कम मूल्य पर बिकती हैं। और घर घर पहुंचाई जाती है। इसने समाज के लिए समर्पित नागरिकों का निर्माण किया होगा।
भारत को जोड़ती है गीता प्रेस
पीएम मोदी ने कहा कि गीता प्रेस जैसी संस्था सिर्फ धर्म और कर्म से नहीं जुड़ी है बल्कि इसका एक राष्ट्रीय चरित्र भी है। यह भारत को जोड़ती है। यहां की एक जुटता को सशक्त करती है। यह भारत के मूल चिंतन को जन- जन तक पहुंचाती है। इसने सौ वर्षो की यात्रा ऐसे समय में तय की है जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इसने आजादी के समय भी सनातन मूल्यों को जिंदा रखा। समाज में नैतिकता व मूल्यों को कायम रखा। गीता प्रेस का देश निर्माण में सर्वोपरि योगदान है।












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