94 वर्षीय मोतीराम ने बताई विभाजन की दर्दभरी कहानी, कैसे पाक के हजारा जिले से निकलकर पहुंचे गोरखपुर

मोतीराम कहते हैं, उस वक्‍त वो मात्र 20 साल के थे।पिताजी गुजर चुके थे और ताऊ जी का गल्ले का जमा-जमाया कारोबार था।बंटवारा हुआ तो परिवार को रातों-रात घर छोड़कर भारत के लिए निकलना पड़ा।मेरा घर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हजा

गोरखपुर,16अगस्त: 14 अगस्‍त, 1947, इतिहास की वो तारीख जिसने देशवासियों को ऐसा दर्द दिया, जिसे वो ताउम्र नहीं भूल पाए। यह वो दिन था जब भारत दो टुकड़ों में बंट गया। भारत और पाकिस्‍तान।14 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त, 1947 को भारत को अलग राष्‍ट्र घोष‍ित किया गया। बंटवारे के वक्‍त लोगों के चेहरे पर मायूसी थी। यह बंटवारा सिर्फ देश का नहीं, बल्कि दिल, रिश्‍तों और भावनाओं का था।बंटवारा इतना भी आसान नहीं था। इस दौरान दंगे हुए जिनमें लाखों लोग मारे गए। देश ने ऐसा दौर भी देखा जब एक आजादी की जंग शुरू करने वाले एक-दूसरे के दुश्‍मन बन गए। गोरखपुर के मोतीराम ने अपनी आपबीती बताई।

पाकिस्तान के हजारा से गोरखपुर का सफर

पाकिस्तान के हजारा से गोरखपुर का सफर

मोतीराम कहते हैं, उस वक्‍त वो मात्र 20 साल के थे।पिताजी गुजर चुके थे और ताऊ जी का गल्ले का जमा-जमाया कारोबार था।बंटवारा हुआ तो परिवार को रातों-रात घर छोड़कर भारत के लिए निकलना पड़ा।मेरा घर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हजारा जिले में था। एबटाबाद से ट्रेन के जरिये पटियाला पहुंचे। पटियाला के रिफ्यूजी कैंप में करीब महीना भर गुजारने के बार गोरखपुर से रिश्तेदारों का बुलाया आया तो यहां चले आए।

लूटपाट और हिंसा होने से हुए थे प्रताड़ित

लूटपाट और हिंसा होने से हुए थे प्रताड़ित

मोतीराम बताते हैं कि जैसे ही बंटवारे के हालात बने, उनके साथ हिंसा होने लगी। इस दौरान कई लोगों को लूटा गया। मारपीट भी की गई जबकि पुलिस और कानून के लोग सब चुप होकर देखते रहे। उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पाकिस्तान से भारत आने वालों की तादाद बढ़ गई।

शुरु किया पुराना कारोबार

शुरु किया पुराना कारोबार

उन्होंने बताया कि गोरखपुर पहुंचने के बाद भी उन्हें रिफ्यूजी कैंप में कुछ माह रहना पड़ा था। फिर मोहद्दीपुर में किराए का घर लेकर अनाज बेचने का पुराना काम शुरू किया। इसी बीच किरोसिन तेल और नमक की कोटे की दुकान मिल गई ।इस दुकान से आर्थिक मजबूती मिली और जीवन में कुछ सुधार होना शुरु हुआ।कारोबार थोड़ा और बढ़ा तो कूड़ाघाट में किराने की दुकान खोली।इस तरह कारोबार बढ़ता गया।

सत्ता परिवर्तन की रस्में

सत्ता परिवर्तन की रस्में

15 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत और पाकिस्तान कानूनी तौर पर दो स्वतन्त्र राष्ट्र बने। लेकिन पाकिस्तान की सत्ता परिवर्तन की रस्में 14 अगस्त को कराची में की गई ताकि आखिरी ब्रिटिश वाइसराॅय लुइस माउण्टबैटन, करांची और नई दिल्ली दोनों जगह की रस्मों में हिस्सा ले सके। इसलिए पाकिस्तान में स्वतन्त्रता दिवस 14 अगस्त और भारत में 15 अगस्त को मनाया गया।

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