Mother's Day 2025: एक 'सिंगल मदर ' जिसने हर कदम पर किया संघर्ष, कई बार हुईं कमजोर, बच्चों को दिया मुकाम
Mother's Day Special Story Sarika Singh Gorakhpur: आज मदर्स डे है। मां के लिए खास दिन। एक मां ही होती है जो बच्चों की पूरी दुनिया होती है। मां जिसके लिए शब्द भी छोटे है और ऐसा शब्द जिसमें पूरी सृष्टि समाहित है। मदर्स डे पर आज हम एक ऐसी मां की कहानी खुद उसकी जुबानी सुनाएंगे जिसने शादी के कुछ साल में ही पति को खो दिया। अकेली पड़ गईं लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी और बच्चों को अच्छी शिक्षा दी एक मुकाम दिया। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने गोरखपुर के धरमपुर को रहने वाली सारिका सिंह से खास बातचीत की।
शादी के कुछ साल बाद ही छूट गया पति का साथ
सारिका सिंह बताती हैं कि शादी के 5 साल बाद ही पति की दुर्घटना में मौत हो गई। मै बिल्कुल अकेली पड़ गई। एक बच्चा गोद में था। बेटी भी छोटी थी। ऐसे में मेरे ऊपर पहाड़ टूट पड़ा।

सामने अचानक से आ गईं कई चुनौतियां
सारिका कहती है इस हादसे के बाद जीवन में अचानक कई चुनौतियां आ गई। खुद को संभालना , बच्चों को देखना ये सब बहुत कठिन हो गया।
मां ने दी हिम्मत
सारिका कहती है इस विपरीत परिस्थिति में मेरी मां ढाल बनकर मेरे साथ खड़ी रही। उसने मुझे हिम्मत दी मेरा हौसला बढ़ाया और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों को देख बढ़ी आगे
सारिका कहती हैं इस विपरीत परिस्थिति में मैने खुद के बारे में सोचना छोड़ दिया और बच्चों का मुंह देखा। अब मैने बच्चों के लिए जीना शुरू कर दिया। सारे ग़म सीने में दबाए बच्चों को खुश रखने लगी।
समाज के ताने भी सुने
उन्होंने कहा कि जब समय खराब रहता है तो अपनी परछाई भी साथ नहीं देती। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी था। पति की मौत के बाद कई ताने भी सुनने पड़े।
नहीं हारी हिम्मत
लाख विपरीत परिस्थितियों के बाद भी मैने हिम्मत नहीं हारी। बच्चों के लिए अपना संघर्ष जारी रखा।
बच्चों को दी बेहतर शिक्षा
सारिका कहती हैं धीरे धीरे समय गुजरता गया। बच्चे बड़े होते गए मैंने इन्हें शहर के टॉप स्कूल में शिक्षा दी।
बेटी कर रही जॉब
सारिका बताती हैं कि आज बच्चे मुकाम पर हैं। बेटी जॉब कर रही है। मेरा संघर्ष सफल हुआ।












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