Ghaziabad: 20 साल बाद इंसाफ, हत्या के मामले में 5 को आजीवन कारावास

Ghaziabad की अदालत ने 20 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया है। इस केस के पांचों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 20 साल पहले एक शख्स की हत्या कर दी गई थी। जिसमें अब अतिरिक्त सत्र अदालत का फैसला आया है। कोर्ट ने इस मामले में 5 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर जुर्माना भी लगाया।

मामला 2002 का है। चांदकिरण नाम के शख्स आरोपी जाहिद के साथ कपड़े का व्यापार करते थे। वो कपड़े खरीदते और उसे अलग-अलग शहरों में बेचते। एक नवंबर 2002 को जाहिद एक अन्य शख्स शकील के साथ चांदकिरण के घर पहुंचा। उसने व्यापार की बात करते हुए उन्हें साथ चलने के लिए मना लिया।

चांदकिरण की पत्नी माया देवी के मुताबिक जाहिद उनके पति को पानीपथ चलने को बोल रहा था। उस दिन दोनों चले गए और एक दिन बाद आने की बात कही। अगले दिन केवल जाहिद वापस लौटा और माया को बताया कि उनका पति काम में फंसा है और वो बाद में आएगा।

कई दिनों तक जब चांदकिरण नहीं लौटा, तो उसकी पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद जाहिद को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस की जांच में पता चला कि दोनों ने आसिफ से एक कैब बुक की थी। जाहिद और शकील के साथ उनके साथी अबरार और प्रमोद भी थे।

इसके बाद 11 नवंबर 2002 को पुलिस ने अबरार और प्रमोद को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने हत्या की बात कबूल की और बताया कि शव को मथुरा के एक कुएं में फेंक दिया गया था। उसके अगले दिन पुलिस ने उसे बरामद कर लिया। मृतक की शर्ट, पैंट, घड़ी और तौलिये में लिपटी टेलीफोन डायरी पास के जंगल से बरामद हुई।

चंदकिरण के बेटे जिसकी उम्र उस वक्त 15 साल की थी, उन्होंने भी कोर्ट में गवाही थी। साथ ही बताया कि वारदात वाले दिन जाहिद और शकील उनके घर आए थे। उनके पापा दोनों के कहने पर चले गए और लौटकर नहीं आए।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सीमा सिंह ने शुक्रवार को पांचों को दोषी करार दिया। जाहिद, शकील, आसिफ, अबरार और प्रमोद को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उनके ऊपर 10-10 हजार रुपये के जुर्माना भी लगा।

उन्हें आईपीसी की धारा 364 (अपहरण) के तहत सात साल के सश्रम कारावास की भी सजा हुई। आरोपियों ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की थी, ऐसे में धारा 201 के तहत उन्हें सश्रम पांच साल की सजा हुई। कोर्ट ने साफ किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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