गुजरात में एक साल में लापता हुए 2307 बच्चे, मंत्री जी बोले- प्यार में पड़कर भाग रहे हैं घर से

गांधीनगर। गुजरात में पिछले एक साल में 2307 बच्चों के लापता होने के केस सामने आए हैं। सरकार का दावा है कि पुलिस की सतर्कता की वजह से 1804 बच्चे वापस मिल गए। जबकि, 497 बच्चों का अभी भी पता नहीं चल पाया है। गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि ज्यादातर बच्चे प्रेम-प्रसंग की वजह से गायब हुए। छोटी सी ही उम्र में उनका किसी न किसी से प्रेम संबंध स्थापित हुए और वे घर छोड़कर निकलते रहे। कुल लापता बच्चों में से 90% बच्चे इसी तरह लापता हुए।''

गुजरात में एक साल में 2307 बच्चे लापता हुए

गुजरात में एक साल में 2307 बच्चे लापता हुए

प्रदीपसिंह जडेजा के बयान के मुताबिक, लापता होने वाले अधिकांश बच्चे 14 से 18 वर्ष की आयु के हैं। पिछले एक साल में सबसे ज्यादा बच्चे अहमदाबाद से लापता हुए। यहां लापता 431 बच्चों में से 369 बच्चों की सुरक्षित वापसी हुई। इसी तरह राजकोट के 247 बच्चों में से 176 बच्चे वापस आ गए हैं। बच्चों के लापता होने के मामलों में पुलिस को प्रथमदृश्या लगता था कि बच्चों के अंगों को निकालने के लिए उनको किडनैप किया जा रहा है, हालांकि जांच में बच्चों के अंगों को निकालने का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

42,899 लापता बच्चो में से 40,108 को खोज निकाला

42,899 लापता बच्चो में से 40,108 को खोज निकाला

राज्य के गृह विभाग के आंकड़ों में यह भी बताया गया कि सरकार ने वर्ष 2007 से लेकर अब तक 18 वर्ष तक के 42,899 लापता बच्चो में से 40,108 बच्चों को खोज निकाला है। पिछले साल गांधीनगर से 112 और बनासकांठा से 106 बच्चे गायब हुए थे। बकौल गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा, ''15 जिलों में 10 साल के लापता बच्चों को खोजने का अब एक भी मामला लंबित नहीं है। बच्चों को खोजने के लिए राज्य सरकार ने स्पेशल ड्राइव टीम का गठन किया है।

घर से भागने के बयान पर आईं ऐसी प्रतिक्रियाएं

घर से भागने के बयान पर आईं ऐसी प्रतिक्रियाएं

प्रदीपसिंह जडेजा द्वारा दिए गए इन बयानों के बीच विधानसभा के अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि बच्चों के माता-पिता को उन बच्चों के बारे में सोचना होगा, जो उनसे छुपकर कच्ची उम्र में अनजाने में प्रेम की जाल में फंसते हैं। वहीं, जब प्रदीपसिंह का यह बयान आया कि बच्चे प्यार में पड़कर घर से भाग रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर यूजर्स की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ ने इसे हास्यास्पद करार दिया।

राजकोट में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित

राजकोट में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित

बच्चों के लापता होने के मामलों का खुलासा किए जाने के साथ ही महिलाओं से दुष्कर्म से जुड़े आंकड़े भी विधानसभा में पेश किए गए। आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के शहर राजकोट में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित पाई गईं हैं। वर्ष 2017 के दौरान राजकोट में दुष्कर्म की 74 और छेड़छाड़ की 68 घटनाएं दर्ज हुईं। जबकि वर्ष 2018 में दुष्कर्म के 64 और छेड़छाड़ के 39 मामले सामने आए।

सेफ सिटी अहमदाबाद में भी दुष्कर्म की वारदातें बढ़ीं

सेफ सिटी अहमदाबाद में भी दुष्कर्म की वारदातें बढ़ीं

सबसे बड़े दो शहरों अहमदाबाद और गांधीनगर में भी दुष्कर्म के मामले बढ़े हैं। वर्ष 2017-18 में अहमदाबाद में शहर में दुष्कर्म के 131 मामले दर्ज हुए थे और वर्ष 2018-19 में यह आंकड़ा बढ़कर 180 पर पहुंच गया। गांधीनगर में वर्ष 2017-18 में दुष्कर्म के 12 मामले दर्ज हुए और वर्ष 2018-19 में दुष्कर्म के 14 मामले सामने आए।

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