गुजराती IAS अफसरों को रास आई दिल्ली, ज्यादातर मोदी सरकार में कर रहे हैं ड्यूटी, गुजरात में टोटा

गांधीनगर। गुजरात सरकार में 313 स्वीकृत पदों के समक्ष 65 आईएएस अधिकारियों की कमी है, फिर भी केंद्र सरकार ने गुजरात के 21 राज्य अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर बुला लिया है। अब दो और अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर चले जाने से प्रतिनियुक्ति का आंकड़ा बढ़कर 23 हो गया है। गुजरात से गये अफसरों में से ज्यादातर मोदी सरकार में ड्यूटी कर रहे हैं। बढ़ती संख्या से यह स्पष्ठ हो गया है कि राज्य के अफसरों को दिल्ली ज्यादा रास आ रही है।

मोदी के पास लगी गुजराती आईएएस अफसरों की लाइन

मोदी के पास लगी गुजराती आईएएस अफसरों की लाइन

मालूम हो कि गुजरात में 13 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी का सरकारी अफसरों से अच्छा संबंध बन गया था। अब उसी की झलक मोदी सरकार में देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके नजदीकी अफसरों को दिल्ली में प्राइम पोस्टिंग मिल रही है। गुजरात के दो आइएएस अधिकारी अजय भादू और टी नटराजन हालही में प्रतिनियुक्ति पर गए हैं और जीआइडीसी के एमडी डी थारा समेत अन्य छह अधिकारी भी दिल्ली जाने की लाइन में हैं।

अनिल मुकीम और मोहपात्रा जैसे अधिकारी भी गुजरात में नहीं रुके

अनिल मुकीम और मोहपात्रा जैसे अधिकारी भी गुजरात में नहीं रुके

गुजरात के वरिष्ठ अधिकारी अब मोदी सरकार में सेवा देने दिल्ली जा रहे हैं। राज्य में महत्वपूर्ण विभागों में आईएएस ओफिसरों की कमी महसूस हो रही है। एक अधिकारी को दोहरा प्रभार दिया गया है क्योंकि सरकार के पास अतिरिक्त आईएएस अधिकारी नहीं हैं। प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी तीन साल की अवधि के बाद ही गुजरात लौट सकते हैं, हालांकि वे लौटने से पहले ही सेवानिवृत्त हो सकते हैं। अनिल मुकीम और मोहपात्रा ऐसे अधिकारी है जो गुजरात में होते तो मुख्य सचिव बन सकते थे, लेकिन दोनों का प्रतिनियुक्ति का समय दिल्ली में ही समाप्त हो जाएगा।

6 से ज्यादा अधिकारी गुजरात छोड़कर दिल्ली जाएंगे

6 से ज्यादा अधिकारी गुजरात छोड़कर दिल्ली जाएंगे

सचिवालय के सूत्र बता रहे हैं कि वर्तमान मुख्य सचिव जेएन सिंघ सहित राज्य के छह से अधिक अधिकारी गुजरात छोड़कर दिल्ली जा रहे हैं। जेएन सिंघ का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है, इसलिए उनकी नवंबर के बाद दिल्ली जाने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो गुजरात में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की ज्यादा कमी हो जाएगी। यह कहा जाता है कि अफसरों के लिए दिल्ली गुजरात राज्य की तुलना में बहुत अच्छी जगह है। दिल्ली में कार्यरत एक अधिकारी देश के सभी राज्यों के संपर्क में आता है। जो लोग काम करना चाहते है, वह ओफिसर दिल्ली अधिक पसंद करते हैं।

35 अधिकारी दिल्ली चले गए

35 अधिकारी दिल्ली चले गए

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद, उन्होंने न केवल गुजरात के IAS अधिकारियों को बल्कि आइपीएस और आइएफएस अधिकारियों को दिल्ही भी बुलाया था। पहले तीन वर्षों में, गुजरात के 18 से अधिक IAS अधिकारी केंद्र सरकार में शामिल हुए। इसके अलावा, गुजरात के वरिष्ठ अधिकारियों समेत कुल 35 अधिकारी दिल्ली चले गए हैं। गुजरात कैडर के एक आईएएस अधिकारी हसमुख अढिया हैं जिन्होंने मोदी सरकार के पहले पांच वर्षों में वित्त विभाग संभाला और नोटबंदी और जीएसटी जैसे कानूनों को लागू किया।

गुजरात के पांच से अधिक अधिकारी पीएमओ में

गुजरात के पांच से अधिक अधिकारी पीएमओ में

गुजरात में अधिकारियों को दिल्ली में प्रमुख पोस्टिंग मिलने की वजह से अन्य राज्यों के अधिकारीओं का नाराज होना स्वाभाविक है। गुजरात के पांच से अधिक अधिकारी पीएमओ में ड्यूटी करते हैं। अन्य अधिकारी विभिन्न विभागों में शीर्ष पद पर कार्यरत हैं।

गुजरात में हैं 70% युवा आईएएस अधिकारी

गुजरात में हैं 70% युवा आईएएस अधिकारी

गुजरात को एक ऐसा राज्य कहा जाता है जहाँ 70% आईएएस अधिकारी युवा हैं, क्योंकि पिछले 10 वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त हुए हैं। राज्य में हर साल करीबन 10 से 12 अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं। इसका मतलब यह है कि गुजरात में IAS अधिकारियों का दूसरा कैडर तैयार हो गया है।

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