गुजरात में किसानों के लिये सरकार अब खुद बीमा कंपनी बनाएगी, निजी कंपनियों को बाय-बाय
गांधीनगर। गुजरात सरकार एक महत्वपूर्ण बड़ा निर्णय लेने जा रही है। ये निर्णय किसानों के हित में है। हर साल किसानों की फसल खराब होने की वजह से किसान मुआवजा मांगता है और हर साल केंद्र और राज्य सरकार को निजी बीमा कंपनी पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन अब गुजरात सरकार खुद अपनी बीमा कंपनी शुरू करने की तैयारी में है। गुजरात में किसानों के लिये राज्य सरकार सालाना 3100 करोड़ रूपये का फसल बीमा प्रीमियम भुगतान करती है। ऐसे में सरकार को निजी कंपनियों के आगे झुकना पडता है और किसानों के विरोध का सामना भी करना पड़ता है।

जानिए क्यों, सरकार अपनी बीमा कंपनी शुरू करने की तैयारी में
निजी बीमा कंपनीओं से बचने के लिये और किसानों को फायदा देने के लिये राज्य सरकार अपनी बीमा कंपनी शुरू करने की तैयारी में है। औचित्य यह है कि राज्य सरकार अच्छी फसल वाले वर्षों में एक बड़ा कोष बना सकती है, जो वर्तमान में बड़े मुनाफे के रूप में निजी बीमा कंपनियों को जाता है। निजी कंपनीओं के बीमा प्रीमियम में यह भी पाया गया है कि, किसानों को जब रुपया चाहिये तब भुगतान नहीं होता है। कई बार सरकार की गलती की वजह से बीमा प्रीमियम की राशि कंपनी में जमा नहीं की जाती है, ऐसे में किसानों को अपनी फसल का बीमा नहीं मिल पाता। कई मामलों में तो किसानों को एक या दो साल बाद भुगतान किया जाता है।

वो बड़े पैमाने पर प्रीमियम प्राप्त करते हैं
राज्य के कृषि और सहकारिता विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि, निजी बीमाकर्ताओं द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के दावों पर हर साल विवाद होते हैं, इसके बावजूद कि वे बड़े पैमाने पर प्रीमियम प्राप्त करते हैं। पिछले दो वर्षों में, राजनैतिक मजबूरियों के कारण, बीमा दावों का भुगतान नहीं किए जाने के बाद, सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और इसने राज्य के संसाधनों से भुगतान करके विवाद को समाप्त करने की कोशिश की, इसके बावजूद उसने प्रीमियम का भुगतान किया।

कई कंपनियां उच्च जोखिम और कम कृषि उत्पादकता के कारण काम नहीं करतीं
कई बीमा विनियामक मुद्दे हैं, लेकिन सरकार भारत सरकार की कृषि बीमा कंपनी के साथ फसल बीमा निधि या तो अपनी कृषि बीमा इकाई शुरू करने की योजना बना रही है। यह अच्छे वर्षों में बड़ी रकम बचा सकता है। इस कंपनी से सरकार लाभ कमाने का लक्ष्य नहीं रखती है। यह सभी किसानों के दावों को मंजूरी दे सकती है। कई कंपनियां उच्च जोखिम और कम कृषि उत्पादकता के कारण उन किसानों के बीमा आवेदन नहीं ले रही हैं जिन्होंने पहले के वर्षों में दावे किए थे।

सरकार को इस मुद्दे को तत्काल हल करने की आवश्यकता
सरकार एक कॉर्पस बना सकती है जो अच्छे वर्षों में विकसित होगा और बुरे वर्षों में उदारतापूर्वक दावों को मंजूरी देगा। सरकार बेहतर उत्पादकता के लिए कई अन्य किसान कल्याण योजनाओं के प्रीमियम को लिंक कर सकती है। इसमें बहुत सारे कानूनी मुद्दे शामिल हैं, लेकिन समस्या की गंभीरता को देखते हुए, सरकार को इस मुद्दे को तत्काल हल करने की आवश्यकता है।
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