देश में मंदी के कारण गुजरात की 2 हजार से ज्यादा फाउंड्री प्रभावित, 4 लाख लोगों की नौकरियों पर संकट
गांधीनगर। वैश्विक मंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को तगड़ी चोट पहुंचाई है। इसी की आड़ में लाखों लोगों से रोजगार छिन चुका है। जबकि, सैकड़ों कंपनियां छंटनी में लगी हुई हैं। ऐसे में गुजरात में सक्रिय फाउंड्री इकाइयां भी प्रभावित हुई हैं। कई फाउंड्री ठप भी हो चुकी हैं। राज्य में 2 हजार से ज्यादा फाउंड्री इकाइयां संचालित हैं, जो संकट का सामना कर रही हैं। इन फाउंड्रीज में चार लाख से अधिक कर्मचारी हैं। कर्मचारियों को नौकरी खोने का डर सता रहा है। ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट के मुताबिक, वाहनों की बिक्री में गिरावट के साथ ऑटो कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया है। जिसके परिणामस्वरूप फाउंड्री उद्योग में भी असर शुरू हो गया है। ऑटोमोबाइल में मंदी के चलते ही यह दुष्प्रभाव पड़ा है।

उद्योगों के वार्षिक उत्पादन में 20% की कमी हो सकती है
अगर रिकवरी नहीं होगी तो फाउंड्री इंडस्ट्री में मजदूरों की छंटनी शुरू होने की संभावना है। गुजरात सहित पूरे देश में फाउंड्री क्लस्टर्स को कठिन समय का सामना करना पड़ रहा है। उद्योगों को वार्षिक उत्पादन में 20% की कमी का डर है। 'द इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमैन' के एक अध्ययन के अनुसार, ऑटोमोबाइल उद्योग में मंदी का सीधा असर फाउंड्री उद्योग में देखा गया है। इस साल भारत के फाउंड्री प्रोडक्शन में भी 20% की कमी आने की आशंका है।

40% की क्षमता पर काम कर रहीं फाउंड्री इकाइयां
भारत के कुल फाउंड्री उत्पादन में लगभग 35% ऑटोमोटिव फाउंड्री खातों और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में काम करने वाली फाउंड्री इकाइयां पिछले तीन महीनों में केवल 40% की क्षमता पर काम कर रही हैं। इसके साथ गैर-ऑटोमोबाइल फाउंड्री इकाइयों के उत्पादन में भी लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है।

देश भर में 6,000 से ज्यादा फाउंड्री इकाइयां
संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में लगभग 6,000 फाउंड्री इकाइयाँ हैं और उनमें से अधिकांश MSME इकाइयाँ हैं। कोयम्बटूर और बेलगाम सहित फाउंड्री क्लस्टर में MSME उद्योगपति अब श्रमिकों के लिए एक छंटनी पर विचार कर रहे हैं। देश में फाउंड्री उद्योग 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है।

अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए
सरकार ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं। उद्योग के लिये ये अच्छी बात है, हालांकि, सरकार को MSME इकाइयों के लिए विशेष कदम उठाने की आवश्यकता है। क्योंकि MSME इकाइयों को बड़ा नुकसान होता है और उनके लिए पुनरुद्धार मुश्किल होता है।
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