World Bicycle Day( 19 अप्रैल): जानिए साईकिल का इतिहास और रोचक बातें
आज विश्व साईकिल दिवस है, इस मौके पर आईये जानते हैं इस दोपहिया वाहन के बारे में खास बातें जिस पर सवारी करने से इंसान दिल-दिमाग और शरीर पूरी तरह से स्वस्थ रहता है।
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साईकिल का इतिहास..
- साईकिल का प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी में यूरोप में आरम्भ हुआ था।
- इस समय पूरे विश्व में अनुमानतः दस करोड़ साईकिल हैं।
- चीन और नीदरलैण्ड आदि देशों में साईकिल ही यातायात का मुख्य साधन है।
यह हैं पीके जो प्यार के लिए नई दिल्ली से स्वीडन साइकिल चलाकर पहुंचे
साईकिल के बारे में और रोचक बातें करते हैं नीचे की स्लाइडों में...

विश्व की पहली साईकिल
1839 में स्कॉटलैंड के एक लुहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन ने विश्व की पहली साईकिल बनायी थी जिसमें पहिये को चलाने के लिए पैडल नहीं था।

ड्रेसियेन
1817 में जर्मनी के बैरन फ़ॉन ड्रेविस ने मौजूदा साईकिल को रेखांकित किया था इसका नाम ड्रेसियेन रखा गया था।

1830 से 1842 के बीच
इस साईकिल की गति 15 किलो मीटर प्रति घंटा थी, जिसका प्रयोग केवल 1830 से 1842 के बीच हुआ था।

पियरे लैलमेंट
वैसे कुछ इतिहासविद कहते हैं कि साईकिल की खोज 763 में ही फ्रांस के पियरे लैलमेंट ने की थी।

1872 में एक सुंदर रूप
इसकी बढ़ती मांग को देखकर इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका के यंत्रनिर्माताओं ने इसमें अनेक महत्वपूर्ण सुधार कर सन् 1872 में एक सुंदर रूप दे दिया और ये प्रचलन में आ गई है।

1960 से लेकर 1990 तक
1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साईकिल थी।

चीन के बाद भारत
चीन के बाद दुनिया में आज भी सबसे ज्यादा साइकिल भारत में बनती हैं।

फिटनेस के लिए साईकिल वॉक
आज भी साईकिल की अहमियत कम नहीं हुई है इसलिए आज लोग अपनी फिटनेस बनाये रखने के लिए साईकिल चलाते हैं।

आधे घंटे साईकिल जरूर चलायें
साईकिल पूरे शरीर के मांसपेशियों को पूरी तरह से सक्रिय रखती है इसलिए प्रतिदिन संभव हो तो आधे घंटे साईकिल जरूर चलानी चाहिए।

विश्व साईकिल दिवस
19 अप्रैल को विश्व साईकिल दिवस की शुरूआत हुई जो कि ना केवल शरीर को स्वस्थ रखती है बल्कि पर्यावरण को भी साफ-सुथरा और प्रदूषण मुक्त रखती है।












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