Uniform Civil Code: क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड और क्यों इस पर विवाद उठता है?

यूसीसी का विरोध करने वालों का मानना है कि ये सभी धर्मों पर हिन्दू कानून मानने को बाध्य करने अथवा थोपने जैसा है। जबकि यूसीसी का उद्देश्य सभी को एक समान न्याय दिलाना है। कुछ यूसीसी को लागू करने के पक्ष में नहीं है।

Uniform Civil Code: ''भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के पालन और चर्चाओं के बाद देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को प्रतिबद्ध है।'' भारतीय गृहमंत्री अमित शाह के उक्त बयान के बाद देश में यूसीसी यानि 'एक देश, एक कानून' को लेकर चर्चा गर्म हो गई है।

What is Uniform Civil Code and why controversy over UCC implementation

'यूसीसी को संविधान में शामिल किया जाए या नहीं' इस विषय को लेकर करीब 73 साल पहले 23 नवंबर 1948 को संविधान सभा में विमर्श हुआ। लेकिन विभिन्न मतभेदों के चलते अंततः इस पर कोई नतीजा सामने नहीं आ सका। अभी कुछ समय से यह मुद्दा फिर उठा है। क्या देश की एकता, अखण्डता व विकास के लिए यूसीसी जरूरी है, आईये इन तमाम बातों पर चर्चा करें।

यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) क्या है?

यूसीसी का अर्थ है कि भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। इस कानून में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे आदि में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। इसका तात्पर्य है - एक निष्पक्ष कानून, जिसका किसी धर्म/जाति से कोई ताल्लुक नहीं है।

यूसीसी क्यों जरूरी है?

भारत को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश में जाति और धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून नहीं है। जबकि भारत में अलग-अलग पंथों के मैरिज एक्ट हैं। जिस कारण से भारत में विवाह, जनसंख्या समेत कई तरह का सामाजिक ताना-बाना भी बिगड़ा हुआ है। इस कारण हमारे देश के कानून में एक ऐसे समान कानून की जरूरत है जो सभी धर्मों, वर्गों, जाति व संप्रदायों को एक ही व्यवस्था में लाए। भारत के पंथ निरपेक्ष होने का अर्थ भी तब तक स्पष्ट तौर पर नजर नहीं आएगा, जब तक देश के संविधान में यह सुधार नहीं होगा।

यूनिफॉम सिविल कोड़ के फायदे

यूनिफार्म सिविल कोड के लागू होने पर सभी समुदायों को एक समान अधिकार दिए जायेंगे। अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग कानूनों से न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस व्यवस्था के लागू होने पर इन परेशानियों से राहत मिलेगी और अदालतों में लंबित पड़े मामलों का निवारण होगा। अभी हर धर्म के लोग मामलों का निवारण अपने पर्सनल लॉ (निजी कानूनों) के तहत करते हैं।

यूनिफॉर्म सिविल कोड से महिलाओं की स्थिति में भी सुधार होगा। कुछ धर्मों के निजी कानूनों में महिलाओं के अधिकार सीमित हैं। इसके अलावा महिलाओं का अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार और गोद लेने जैसे अनेक मामलों में भी एक समान नियम लागू होंगे।

यूसीसी विरोध के कारण

यूसीसी का विरोध करने वालों का मानना है कि ये सभी धर्मों पर हिन्दू कानून मानने को बाध्य करने अथवा थोपने जैसा है। जबकि यूसीसी का उद्देश्य सभी को एक समान न्याय दिलाना है। अनेक मुस्लिम धर्म प्रचारक व विशेषज्ञ यूसीसी को लागू करने के पक्ष में नहीं है।

उनका यह मत है कि प्रत्येक धर्म की अपनी मान्यताएं और आस्थाएं होती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड़ ने तो कई बार इसका विरोध करते हुए कहा है कि 'समान नागरिक संहिता असंवैधानिक है, इसको किसी भी सूरत में लागू नहीं किया जाए'।

किन-किन देश में लागू है यूसीसी

भारत में यूसीसी पर आये दिन बहस होती रहती है लेकिन उसको अभी तक लागू नहीं किया गया है। भारत में अभी केवल गोवा राज्य ही एक ऐसा राज्य है जहाँ यूनिफार्म सिविल कोड लागू है। गोवा में पुर्तगाल सरकार के समयकाल से ही यूसीसी लागू किया गया था। वर्ष 1961 में जब गोवा सरकार बनी थी तो वह यूनिफार्म सिविल कोड के साथ ही बनी थी।

यूसीसी को दुनिया के अनेक देशों में यह लागू किया जा चुका है। यहां तक कि अपने पड़ौसी देश पाकिस्तान व बांग्लादेश में यूसीसी लागू है। इसके साथ ही साथ मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान और मिस्र जैसे कई देशों में यूसीसी लागू किया जा चुका है।

यह बहुत ही खेद का विषय है कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 44 यह प्रावधान करता है कि सरकार सभी नागरिकों के लिए एक 'समान नागरिक संहिता' बनाए, लेकिन इसको क्रियान्वित करने हेतु सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाने के कोई ठोस प्रमाण अभी तक नहीं मिले हैं।

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