मोस्‍ट फेवर्ड नेशन: जानिए क्‍या होता है (MFN) और क्‍या है इसका मतलब

नई दिल्‍ली। । पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्‍तान के खिलाफ सख्‍त कदम उठाया है। पाकिस्‍तान से मोस्‍ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले लिया गया है। गुरुवार को दक्षिण कश्‍मीर के पुलवामा में नींद उड़ा देने वाले आतंकी हमले में 44 जवान शहीद हो गए हैं। ये सभी जवान अपनी छुट्टी से ड्यूटी पर वापस लौट रहे थे। जैश-ए-मोहम्‍मद के हमलावर ने जवानों के काफिले को निशाना बनाया और देखते ही देखते यह हमला घाटी में हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में तब्‍दील हो गया। उरी आतंकी हमले के बाद भी भारत ने इस फैसले पर विचार किया था लेकिन उस समय भारत ने यह फैसला नहीं लिया था। जानिए आखिर क्‍या होता है मोस्‍ट फेवर्ड नेशन और कैसे पाकिस्‍तान को इससे फायदा मिलता है। यह भी पढ़ें-जैश के इसी आतंकी आदिल ने ली सीआरपीएफ के 20 से ज्‍यादा जवानों की जान!

क्या है एमएफएन का दर्जा ?

क्या है एमएफएन का दर्जा ?

व‍िश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश (एमएफएन) का दर्जा दिया जाता है। एमएफएन का दर्जा दिए जाने पर देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि उसे व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। भारत ने पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था। पाकिस्‍तान को जब यह दर्जा मिला तो इसके साथ ही पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा देने के साथ और उत्‍पादों को कम ट्रेड टैरिफ पर बेचे जाने की छूट मिलती है। बता दें कि भारत की ओर से पाक को दिया गया यह दर्जा एकतरफा है। पाकिस्तान ने भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया है। पाकिस्तान ने वर्ष 2012 में भारत को एमएफएन यानी विशेष तरजीह देश का दर्जा देने का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक वो वादा नहीं निभाया है।

आंकड़ों पर एक नजर

आंकड़ों पर एक नजर

साल 2015-16 में भारत का कुल विश्व व्यापार 643.3 अरब डॉलर था। फिलहाल भारत का पाकिस्तान के लिए 2.67 अरब डॉलर का निर्यात है, जो कि कुल निर्यात का महज 0.41 फीसदी है। वहीं पाकिस्‍तान, भारत को 40 करोड़ डॉलर का निर्यात करता है। अगर भारत पाकिस्‍तान से एमएफएन का दर्जा वापस लेता है तो इसका सबसे ज्‍यादा नुकसान भारत के कारोबारियों को ही होगा। क्‍योंकि भारत के कारोबारी पाकिस्‍तान की तुलना में छह गुना तक पाकिस्‍तान में निर्यात करते हैं। पाकिस्‍तान भी भारत की तरह ही डब्‍लूटीओ का संस्‍थापक सदस्‍य रहा है। पर अभी तक उसने भारत और इजरायल को एमएफएन का दर्जा नहीं दिया है।

कब वापस लिया जा सकता है एमएफएन का दर्जा

कब वापस लिया जा सकता है एमएफएन का दर्जा

डब्‍लूटीओ के आर्टिकल 21 बी के तहत कोई भी देश तब किसी देश को दिया मोस्‍ट फेवर्ड नेशन का दिया गया दर्जा वापस ले सकता है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दे पर विवाद हो। पर डब्‍लूटीओ के नियम के मुताबिक किसी भी देश को दिया गया एमएफएन का दर्जा वापस लेने के लिए सारी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इससे पहले इस डब्‍लूटीओ के नियम को अमेरिका ओर निकारगुआ के बीच हुए विवाद वर्ष 1983 और 1985 में और यूरोपियन कम्‍युनिटी और युगोस्‍लाविया के बीच वर्ष 1992 में लगाया गया था।

क्‍या होगा असर

क्‍या होगा असर

एमएफएन का दर्जा वापस लेना इतना ज्‍यादा आसान इसलिए भी नहीं है क्‍योंकि भारत और पाकिस्‍तान के बीच होने वाले व्‍यापार का असर दक्षिण एशिया के अन्य देशों पर भी आ सकता है। अगर भारत पाकिस्‍तान से एमएफएन का दर्जा वापस लेता है तो पाकिस्‍तान से आने वाला ड्यूटी फ्री सीमेंट के आयात पर भी असर पड़ सकता है।

भारत, पाकिस्‍तान से क्‍या करता है आयात और क्‍या करता है निर्यात

भारत-पाकिस्‍तान को चीनी, चाय, ऑयल केक, पेट्रोलियम ऑयल, कॉटन, टायर, रबड, समेत 14 वस्‍तुओं का प्रमुख रूप से निर्यात करता है। वहीं भारत, पाकिस्‍तान से कुल 19 प्रमुख उत्‍पादों का आयात करता है। इन उत्‍पादों में अमरूद, आम, अनानास, फ्रेबिक कॉटन, साइक्लिक हाइड्रोकॉर्बन, पेट्रोलियम गैस, पोर्टलैंड सीमेंट, कॉपर वेस्‍ट और स्‍क्रैप, कॉटन यॉर्न जैसे उत्‍पाद शामिल हैं।

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