FEMA: क्या होता है फेमा, और ईडी इसके तहत क्या कार्यवाही कर सकता है?
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी मुख्य रूप से तीन अधिनियमों - पीएमएलए, फेमा व एफईओए के तहत जांच करता है। विदेशी मुद्रा का लेनदेन ‘फेमा’ अधिनियम के तहत होता है, जिसके उल्लंघन पर ईडी कार्यवाही करता है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने BYJU'S (बाईजूस) के सह-संस्थापक रवींद्रन बायजू व उनकी कंपनी 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' के कार्यालयों पर छापेमारी की। ईडी ने यह कार्यवाही बाईजूस द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानि 'फेमा' के नियमों का उल्लंघन करने पर की है। ईडी के अनुसार कंपनी को साल 2011 से 2023 के दारौन ₹28000 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला और इसी अवधि में कंपनी ने भी ₹9754 करोड़ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नाम पर विभिन्न विदेशी प्राधिकारों को भेजे हैं।
इस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बायजूज ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी, जबकि कंपनी को ईडी ने इस बाबत कई बार सम्मन भेजें। जिसका कोई जवाब नहीं दिया गया और आखिरकार ईडी ने फेमा के तहत कार्यवाही की।
प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी मुख्य रूप से तीन तरह के अपराधों पर काम करती है। पहला, मनी लॉन्ड्रिंग यानी पीएमएलए (पैसों की हेराफेरी कर कमाई गई संपत्ति की जांच करना और उसे जब्त करना), दूसरा, विदेशी मुद्रा कानून (फेमा) का उल्लंघन रोकना और तीसरा, एफईओए के तहत भगौड़े अपराधियों पर शिकंजा कसना, जिसमें विदेश भाग चुके अपराधियों की संपत्ति को कुर्क करना शामिल है।
फेमा क्या होता है?
'फेमा' का पूरा नाम फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) है। यह विदेशी मुद्रा प्रबंधन और विदेशी व्यापार एवं भुगतान संबंधी एक अधिनियम है।
यह देश के बाहर व्यापार और भुगतान तथा भारत में विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित विकास और रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया एक नागरिक कानून है। इस अधिनियम के तहत ईडी को विदेशी मुद्रा कानूनों और नियमों के संदिग्ध उल्लंघनों की जांच करने, उल्लंघन करने वालों पर कार्यवाही करने और उन पर जुर्माना लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसकी शुरुआत विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 में हुई थी। जिसके तहत 1 मई 1956 को इन्फोर्समेंट यूनिट नामक संगठन का गठन किया गया था। जो 1957 में संशोधित होकर प्रवर्तन निदेशालय (इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट - ईडी) बन गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली स्थित है।
फिर फेरा-47 को निरस्त कर फेरा-73 को साल 1973 में भारतीय संसद में पारित किया गया, जो 1 जनवरी 1974 से लागू हुआ। फिर इस 'फेरा-73' को 1998 में निरस्त कर 1999 में भारतीय संसद ने 'फेमा' को पारित किया और 1 जून 2000 से यह देशभर में लागू हुआ।
फेमा का उद्देश्य
यह विदेशी मुद्रा के संरक्षण व विनियमन पर जोर देता है। दरअसल, फेमा-1999 की धारा 3 के अुनसार कोई भी व्यक्ति किसी भी तरीके से भारत के बाहर किसी भी व्यक्ति अथवा खाते में धन नहीं डाल सकता और न ही भारत में बाहर से धन ला सकता है। भारत से बाहर कोई संपत्ति प्राप्त करने, निर्मित करने या हस्तांतरित करने के उद्देश्य से भारत में कोई व्यक्ति किसी वित्तीय सौदे मे शामिल नहीं हो सकता। केवल अधिकृत व्यक्ति ही विदेशी विनिमय कर सकता है।
फेमा में व्यक्ति के अधिकृत संबंधी प्रावधान
फेमा अधिनियम में इस बात का प्रावधान है कि व्यक्ति को विदेशी विनिमय या विदेशी प्रतिभूतियों अथवा मुद्रा परिवर्तन हेतु रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) में आवेदन करना होता है। रिजर्व बैंक इससे संबंधी सभी जांच के उपरांत ही इसके लिए व्यक्ति को अधिकृत करता है। अगर आरबीआई को लगता है कि व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला कार्य सार्वजनिक हित में नहीं है, अथवा अधिकृत व्यक्ति को नियमों की अवहेलना का दोषी पाया जाता है, तो वह व्यक्ति की अधिकृतता समाप्त कर सकता है।
फेमा के तहत कार्यवाही के प्रावधान
फेमा के अंतर्गत लेनदेन का दो रूप में उल्लेख हैं - पहला, पूंजी खाता लेन-देन और भारत के बाहर देनदारियां, जिसे फेमा की धारा 6 के तहत निपटाया जाता है। दूसरा, चालू खाता लेन-देन, पूंजी खाते के अलावा लेन-देन, इसे फेमा की धारा 5 द्वारा निपटान किया जाता है। फेमा के उद्देश्यों के लिए आरबीआई नियामक की भूमिका निभाता है।
फेमा के तहत दण्ड प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति/संस्था फेमा के प्रावधानों/नियमों का उल्लंघन करते पाया जाता है, तो फेमा की धारा 13 में दंडात्मक प्रावधान है। इसके अंतर्गत जांच में जिस व्यक्ति/संस्था द्वारा राशि के खिलाफ अपराध सिद्ध होता है, तो उसे राशि के तीन गुना देना होता है। इसके अलावा जहां राशि की मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती है, वहां दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि अपराध सिद्ध होने के उपरांत भी फेमा के नियमों का उल्लंघन जारी रहता है तो उल्लंघन के पहले दिन से प्रतिदिन पांच हजार रुपए दंड हो सकता है। इसके साथ-साथ दोषी व्यक्ति/संस्था की राशि या अतिरिक्त संपत्ति को जब्त करने का अधिकार है। वहीं अधिकृत अधिकारी के पास नियमों के उल्लंघन कर विदेशी मुद्रा से अर्जित धन को विदेशों से भारत में स्थानांतरित करने की भी शक्ति है।
ईडी द्वारा 'फेमा' के तहत पिछले 5 वर्षों में दर्ज मामले
अप्रैल 2023 में बीबीसी और साल 2022 में चीनी कंपनी Xiaomi के खिलाफ भी ईडी ने फेमा के उल्लंघन पर कार्यवाहियां की थी। अगर हम आंकड़ों में देखें तो ईडी की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में 'फेमा' के तहत दर्ज मामलों की सख्यां 3627 थी। जो 2018-19 में मामलों में कमी के साथ यह संख्या 2659 तक आ गई। वहीं, वित्तीय वर्ष 2019-20 में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कुल 3360 मामलों में कार्यवाही की गयी। वित्तीय वर्ष 2020-21 में दर्ज मामलों की संख्या 2747 थी लेकिन लगभग दोगुना वृद्धि के साथ 2021-22 में 5313 मामले दर्ज किये गये।
इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक लगभग 3541 प्रति वर्ष की दर से कुल 17708 मामले दर्ज हुए। गौरतलब है कि 31 जनवरी 2023 तक दर्ज मामलों की कुल संख्या 33988 हो गई है। जिसमें से 16148 मामलों का निस्तारण हुआ, 8440 को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किये गये और 6847 मामले अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं।












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