विक्रमादित्य, अकबर से यह सीख लें अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे ही मुख्यमंत्री बने, वैसे ही बिजली का बिल आधा कर दिया और जरूरतमंद परिवारों को 5 हजार लीटर पानी देने का वादा पूरा कर दिया। यही नहीं एक टीवी चैनल द्वारा स्टिंग ऑपरेशन के तुरंत बाद केजरीवाल ने घूसखोर अध‍िकारी को सस्पेंड कर दिया। अब तक केजरीवाल 800 से ज्यादा ट्रांसफर कर चुके हैं। लेकिन अब तक केजरीवाल सरकार में जितना काम हुआ है उससे कहीं ज्यादा उसका ढोल पीटा गया है। ढोल केजरीवाल नहीं बल्कि उनके साथी पीट रहे हैं।

अगर राजनीति की भाषा में कहें तो आप की सरकार में काम कम और हर चीज का प्रोपोगैंडा ज्यादा हो रहा है। दिल्ली में आगे क्या करें, क्या नहीं, यह जानना है, तो हमारी सलाह केजरीवाल को है कि वो भारत में इतिहास रचने वाले राजा विक्रमादित्य और जलाल-उद-दीन अकबर को पढ़ें। इन दोनों शासकों में एक समानता थी। दोनों ही दिन में दरबार में आम आदमी से दूरी बना कर निष्पक्ष होकर निर्णय लेते थे और रात को वेश बदल कर आम आदमी के घर जाकर रोटी खाते थे और उनकी समस्याएं सुनते थे।

खास बात यह थी कि जब राजा विक्रमादित्य रात को निकलते थे, तभी उन्हें वेताल मिलता था जो उनका मार्गदर्शन करता था। वहीं मुगल शासन में अकसर राजा अकबर अपनी सल्तनत की समस्याओं को जानने के लिये रात के अंधेरे में निकलते थे। लोगों के बीच बैठकर उनके दर्द को समझने की कोश‍िश करते थे।

गहराई तक जाना है तो प्रोपोगैंडा से बचें केजरीवाल

चूंकि आज ना तो वैसा माहौल रहा और न ही वैसी परिस्थतियां लेकिन हां देश भी वही है और समाज भी। आज बात अगर केजरीवाल की करें, तो भले ही वो आम आदमी पार्टी के हैं, लेकिन अगर सही शासन करना है, तो आम आदमी से थोड़ी बहुत दूरी बनानी पड़ेगी। यानी सुरक्षा तो लेनी ही पड़ेगी। अगर वो वीआईपी कल्चर में नहीं ढलना चाहते, तो न सही, लेकिन एक मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें इतना भी आम नहीं होना चाहिये, कि आम लोगों के लिये वो कुछ कर ही न पायें।

केजरीवाल वेश बदल कर जनता के बीच न जायें, लेकिन कम से कम हर चीज का ढिंढोरा तो न पीटें। केजरीवाल या उनके नेता-विधायक जहां भी जाते हैं, मीडिया उनके साथ चल पड़ता है। पार्टी के पलपल की गतिविध‍ियों का लाइव टेलीकास्ट होने लगता है। ऐसे में कई सही चीजें गलत साबित हो सकती हैं, और गलत चीजें सही।

ताज़ा उदाहरण राखी बिड़ला की कार पर हमला है। वो बच्चे की गेंद थी, लेकिन इस घटना को ऐसे प्रस्तुत कर दिया गया, मानो सही में किसी ने राखी पर हमला किया हो। और अगर जनता ने एक बार झूठे आंकड़े देना शुरू कर दिये, तो सरकार का सारी प्लानिंग किनारे लग जायेगी और हर जगह सिर्फ अव्यवस्था होगी और कुछ नहीं।

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