West Bengal Politics: क्या बीजेपी ने बंगाल में ममता को पटखनी देने की तैयारी कर ली है?
West Bengal Politics: प्रधानमंत्री का पहली मार्च को बंगाल का दौरा, बीजेपी के लिए उत्साह पैदा करने वाला सिद्ध हुआ है। पीएम मोदी ने संदेशखाली में टीएमसी को घेरते हुए यह जब कहा कि इस समय ममता की पार्टी के नेताओं के प्रति देश भर में गुस्सा और दुख फैल गया है, तो जनता ने जबर्दस्त प्रतिक्रिया दिखाई।
मां-माटी-मानुष का नारा देने वाली ममता बनर्जी अब संदेशखाली की महिलाओं के साथ स्थानीय टीएमसी नेताओं के दुस्साहस पर जवाब नहीं दे पा रही हैं। शाहजहाँ शेख को पार्टी से छह साल के लिए निकालने के फैसले को ममता का रक्षात्मक कदम माना जा रहा है, जो उनकी फायर ब्रांड पॉलिटिक्स के विपरीत व्यवहार है।

शायद अब ममता के लिए संदेशखाली से हुए नुकसान से बचने का समय निकल गया है, क्योंकि ममता दीदी ने पीड़ित महिलाओं द्वारा मांगी गई मदद के प्रति उदासीनता का भाव दिखाया था। उलटे पश्चिम बंगाल की सरकार ने टीएमसी के बदनाम नेता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
अपराध और भ्रष्टाचार बनेंगे ममता के खिलाफ मुद्दे
अब बीजेपी यह भुनाने में लगी है कि उसके दबाव में बंगाल पुलिस ने आरोपी शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार किया। टीएमसी ने अपने इस आपराधिक नेता को 55 दिनों तक संरक्षण दिया।
यही नहीं मोदी ने अपने भाषण में ''इंडी अलायंस" पर भी सख्त टिप्पणी की और कहा कि इनके बड़े नेता संदेशखाली पर अपनी आंख, कान और मुंह बंद करके बैठे हैं। न तो वामपंथी और ना तो कांग्रेस ने इस मामले पर मुख्यमंत्री से कोई जवाब मांगा। ममता के राज में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है, इसका भी एक संदेश नीचे तक गया है। प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में घोटाला अब सबकी नजर में है।
मोदी के आसरे पर भाजपा
बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में भी सबसे बड़े प्रचारक रहने वाले हैं। पीएम मोदी बंगाल की जनता से सीधा जुड़ना पसंद भी करते हैं। फिर एनडीए की सरकार के पास दर्जनों महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं की सफलता का श्रेय है।
बीजेपी बार बार यह संदेश दे रही है कि पीएम मोदी पश्चिम बंगाल को बदलने की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को ममता बनर्जी के अड़ियल रुख के कारण लागू नहीं कर पाते। पीएम मोदी ने भी यह टिप्पणी की है कि जब मैं बंगाल आया हूं तो कह सकता हूं कि आज का भारत उनके सपने को पूरा कर रहा है।
पिछले 10 वर्षों में भारत द्वारा हासिल की गई उत्कृष्ट ऊंचाइयों के कारण विदेशों में भी भारत की धाक बनी है। भारत 11वें स्थान की अर्थव्यवस्था से 5वें स्थान की आर्थिक शक्ति बन चुका है और जल्दी ही तीसरी अर्थव्यवस्था तक पहुंचने वाला है। G20 की अध्यक्षता, चंद्रयान की सफलता और राम मंदिर का निर्माण बीजेपी बंगाल में भी भुनाने के लिए तैयार है। बीजेपी के अनुसार मोदी ने जो काम किया है, दुनिया के किसी और देश के नेता ने नहीं किया।
ममता कई मोर्चों पर घिरी
ममता आंतरिक रूप से कई मोर्चों पर घिरी हुईं हैं। अटकलें तो यह भी लगाई गई हैं कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच भी इन दिनों संवादहीनता बनी हुईं है। काफी समय से अभिषेक ने अपनी गतिविधियां सीमित कर दी है। वह ज्यादातर समय अपने निर्वाचन क्षेत्र डायमंड हार्बर को दे रहे हैं।
खासकर बंगाल को केंद्र की ओर से कथित रूप से कम संसाधन धन देने के मामले में ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन से अभिषेक बनर्जी गायब नजर आए। उनकी यह अनुपस्थिति पार्टी के भीतर दरार की अफवाह को और हवा दे रही है। सभी पार्टी सांसदों को भाग लेने के निर्देश के बावजूद, अभिषेक बनर्जी नहीं आए थे।
कहा जा रहा है कि पार्टी में दो गुट बन गए हैं। टीएमसी के दो दिग्गज पार्थ चटर्जी और सुब्रत बख्शी काफी समय से अभिषेक बनर्जी से नाराज चल रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने पद छोड़ने की धमकी भी दी थी। संसद सदस्य सुदीप बंदोपाध्याय भी काफी दिनों से खुद को अलग थलग महसूस कर रहे हैं।
मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से ममता बनर्जी का आधार कमजोर
इंडिया टुडे के अनुसार एक सर्वे में शामिल बंगाल में लगभग 55 प्रतिशत उत्तरदाता मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि बंगाल के मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग केंद्र में भाजपा सरकार चाहता है और वह ममता बनर्जी की पार्टी को दूसरी प्राथमिकता पर रखता है।
बंगाल के 42 लोकसभा क्षेत्रों में से पिछले चुनाव में 18 सीटें जीतने में सफल रही थी तब उसे 40.25 प्रतिशत वोट मिले थे। अब जो सर्वेक्षण आ रहे हैं उससे पता चलता है कि बंगाल में ज्यादातर लोग नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। बीजेपी अभी से कह रही है कि बंगाल में उसे जबरदस्त सीटें मिलेगी।
बंगाल के लोग ममता को संभावित प्रधानमंत्री की पहली पसंद नहीं मान रहे हैं। टीएमसी के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। हालांकि पश्चिम बंगाल विधान सभा में टीएमसी के पास प्रचंड बहुमत है और पिछले साल पंचायत चुनावों में भी उसे बहुत बड़ी जीत मिली थी। लोकसभा में भी इस समय टीएमसी के पास 22 सीटें हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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