US Congress: अमेरिकी ‘संसद’ को दूसरी बार संबोधित करेंगे मोदी, जानें किन नेताओं को मिल चुका यह अवसर

22 जून 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस और सीनेट के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे, जो इस अधिवेशन को दोबारा संबोधित करेंगे।

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार स्टेट विजिट पर अमेरिका की यात्रा पर जाएंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका में अन्य राष्ट्रों के प्रमुखों की आधिकारिक यात्रा को कई कैटेगरी में बांटा गया है और उनमें स्टेट विजिट को सबसे ऊपर रखा जाता है। अपने चार साल के कार्यकाल में अमरीकी राष्ट्रपति केवल एक बार ही किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को स्टेट विजिट पर आमंत्रित कर सकते हैं। स्टेट विजिट के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं और यात्रा पर आ रहे राष्ट्रध्यक्ष को विशेष सम्मान दिया जाता है। इसी विशेष सम्मान के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमरीकी संसद (यूएस कांग्रेस) के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर केविन मैक्कार्थी ने पीएम मोदी को भेजे गये निमंत्रण के बारे में ट्वीट कर जानकारी दी।

मैक्कार्थी ने कहा कि यह मेरा सम्मान है कि मैं भारत के प्रधानमंत्री मोदी को 22 जून को यूएस कांग्रेस के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित कर रहा हूं। यह भारत और अमेरिका की दोस्ती के उत्सव को मनाने का अवसर होगा। साथ ही दोनों देश जिन वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं उन पर भी बात करने का अवसर होगा।

अमेरिकी कांग्रेस और अधिवेशनों की शुरुआत

संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार में द्विसदनी विधायिका है। इसके दो सदन - सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स हैं और इन दोनों को यूएस कांग्रेस कहा जाता है। यूएस कांग्रेस की बैठकें देश की राजधानी वाशिंगटन डीसी में होती हैं। साधारण शब्दों में समझें तो अमेरिकी कांग्रेस एक प्रकार से वैसी ही होती है जैसे भारत की संसद।
4 जुलाई 1776 को संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन के उपनिवेश से आजाद हुआ। इसके तकरीबन 13 साल बाद 4 मार्च 1789 को अमेरिकी कांग्रेस की स्थापना हुई। शुरुआती सालों में अमेरिका अपने देश में बदलावों के लिए दूसरे देशों के गणमान्यों से विचारों का आदान-प्रदान करता था।

इसी सिलसिले में अमेरिकी कांग्रेस की यह परंपरा बनी कि दोनों सदनों के सदस्य साल में एक या दो बार इकट्ठा होंगे। इसी दौरान राष्ट्रपति और हाउस के वरिष्ठ मेंबर की सहमति से कुछ गणमान्य लोगों को सदनों को संबोधित करने का निमंत्रण दिया जाने लगा। जिसका उद्देश्य यह था कि उनके हाउस मेंबर यह जानने की कोशिश करते थे कि एक विदेशी नेता उनके देश के बारे में क्या विचार रखते हैं? साथ ही उनका विचार उनके विकास के लिए कैसे अग्रसर होगा? इसी बहाने अमेरिका दोस्ती का भी हाथ बढ़ाता था।

इसी क्रम में 10 दिसंबर 1824 को फ्रांसीसी जनरल और क्रांतिकारी युद्ध नायक मार्क्विस डे लाफायेट पहले विदेशी गणमान्य व्यक्ति बने, जिन्होंने 'हाउस ऑफ चैम्बर' को संबोधित किया। दरअसल अमेरिकी क्रांति के दौरान ब्रिटेन के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी थी।

राष्ट्राध्यक्ष और गणमान्यों को 1874 से मिला न्यौता

एक राष्ट्राध्यक्ष के रुप में पहली बार 18 दिसंबर 1874 को हवाई के राजा कलाकौआ ने कांग्रेस की एक संयुक्त बैठक को संबोधित किया था। इसके बाद 20 मई 1934 को फ्रांस के राजदूत आंद्रे डी लाबौले ने लाफायेट की मृत्यु की शताब्दी वर्षगांठ को मनाने के लिए कांग्रेस के एक संयुक्त सत्र को संबोधित किया। फिर 1945 से विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को बुलाने की प्रक्रिया स्थायी रूप से अपनायी गई। आपको बता दें कि 1945 से पहले वर्ष 1941 और 1943 में ब्रिटिश पीएम विंस्टन चर्चिल ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था।

पांच बार किया गया अनौपचारिक संबोधन

  • 26 दिसंबर 1941 को यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल
  • 22 सितंबर 1987 को कोस्टारिका के राष्ट्रपति ऑस्कर एरियस
  • 15 अक्टूबर 1987 को अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति जोस नेपोलियन डुआर्टे
  • 16 मार्च 2022 को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की
  • 20 जुलाई 2022 को यूक्रेन की प्रथम महिला ओलेना जेलेंस्का

अब तक 123 लोगों ने किया संबोधित

27 अप्रैल 2023 को कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति यून सुक येओल ने पिछली बार अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था। इन्हें मिलाकर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या गणमान्य व्यक्तियों द्वारा 123 संयुक्त बैठकों को संबोधित किया जा चुका हैं। वहीं 8 जून 2016 में पीएम मोदी 118वें विदेशी मेहमान बने थे, जिन्होंने यूएस कांग्रेस को संबोधित किया था।

कब-कब भारत के नेताओं ने किया संबोधित?

भारत की आजादी के 38 सालों बाद अमेरिकी कांग्रेस को राजीव गांधी ने 13 जुलाई 1985 को पहली बार संबोधित किया था। इसके बाद पी.वी. नरसिम्हा राव (18 मई 1994), अटल बिहारी वाजपेयी (14 सितंबर 2000), मनमोहन सिंह (19 जुलाई 2005) और नरेंद्र मोदी (8 जून 2016) ने अपने भाषण दिए।

बड़ी बात यह है कि पीएम मोदी 22 जून 2023 को फिर से अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हैं तो दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला और इजरायल के इत्जाक राबिन की बराबरी कर लेंगे। जिन्होंने दो बार संयुक्त सत्रों को संबोधित किया हैं।

इन गणमान्यों ने किया सबसे ज्यादा बार संबोधित

अमेरिकी कांग्रेस को फ्रांस के नेताओं ने सर्वाधिक नौ बार संबोधित किया हैं। जबकि ब्रिटेन और इजरायल की तरफ से आठ-आठ बार संबोधन हुआ है। साउथ कोरिया ने 7 बार और मैक्सिको, इटली तथा आयरलैंड ने छह-छह बार संयुक्त सत्रों को संबोधित किया हैं। भारतीय नेताओं ने भी पांच बार संबोधन दिया है।

व्यक्ति विशेष के रुप में विंस्टन चर्चिल (ब्रिटेन) और बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल) ने सर्वाधिक तीन-तीन बार अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्रों को संबोधित किया हैं। इसके बाद नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका) और इत्जाक राबिन (इजरायल) ने दो-दो बार संबोधित किया हैं। अब नरेंद्र मोदी भी उन नेताओं में आ गए हैं जो यूएस कांग्रेस को दूसरी बार संबोधित करेंगे।

पड़ोसी देशों - चीन, पाकिस्तान और नेपाल के संबोधन

रूस के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी माने जाने वाले देश चीन के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष ने आजतक अमेरिका कांग्रेस के किसी भी सत्र को संबोधित नहीं किया है। जबकि पाकिस्तान की तरफ से जनरल अयूब खान 12 जुलाई 1961 को और पीएम बेनजीर भुट्टो 7 जून, 1989 को संयुक्त सत्रों को संबोधित कर चुके हैं। साथ ही 28 अप्रैल 1960 को पड़ोसी देश नेपाल के राजा महेंद्र भी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित कर चुके है।

2016 में पीएम मोदी के भाषण का ब्योरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 जून 2016 को अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था। तब उनके भाषण के दौरान 64 बार सदन के सदस्यों द्वारा तालियां बजाई गयी थी। पीएम मोदी ने अमेरिका और भारत को दोस्त बताया था। पीएम ने अपने पूरे भाषण में कुल 2754 शब्द बोले। जबकि इससे पहले मनमोहन सिंह ने 2005 में संबोधन दिया तो उन्होंने 3264 शब्द बोले थे। पीएम मोदी ने अपने पूरे भाषण के दौरान आठ महापुरुषों का जिक्र किया था। साथ ही तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी तारीफ की थी।

अपने 45 मिनट के भाषण में पीएम मोदी ने पाकिस्तान और आतंकवाद पर पुरजोर हमला बोला था। साथ ही भारत और अमेरिका के बढ़ते संबंधों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आयामों की चर्चा की, जिसमें विशेषतौर पर असैन्य परमाणु सहयोग शामिल था।

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