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Unicorns in India: 55 भारतीय यूनिकॉर्न घाटे में, जानिए किन्हें हुआ भारी नुकसान

पिछले एक दशक में भारत स्टार्टअप का बड़ा हब बनकर उभरा है। एक दशक में भारत में 100 से ज्यादा स्टार्टअप कंपनियां यूनिकॉर्न बन चुकी हैं। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2021-22 में इनमें से ज्यादातर कंपनियां नुकसान में रही हैं।

Unicorns in India 55 Indian unicorns suffered heavy loss in 2021 22 financial year

Unicorns in India: वित्तीय वर्ष 2021-22 में 50 से ज्यादा यूनिकॉर्न (Unicorn) बन चुकी भारतीय स्टार्टअप (Startup) हजारों करोड़ के नुकसान में हैं। फाइनेंशियल इंडेक्स रिपोर्ट 2023 के मुताबिक, 74 में से 55 यूनिकॉर्न बन चुके स्टार्टअप नुकसान में हैं। इस अवधि में इन कंपनियों को करीब $5.9 बिलियन का नुकसान हुआ है।

गौरतलब है कि इन घाटे वाली 55 कंपनियों में से 53 यूनिकॉर्न को $3 बिलियन का नुकसान उठाना पड़ा है। पहले भी सामने आई कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत की 90 प्रतिशत स्टार्टअप 5 सालों के अंदर फेल हो जाती हैं।

पिछले एक दशक में भारत में स्टार्टअप की बाढ़ सी आ गई है। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू और ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स की संयुक्त स्टडी कहती है कि भारत के करीब 90 प्रतिशत स्टार्टअप महज 5 सालों में बंद हो जाते हैं। केवल 10 प्रतिशत स्टार्टअप ही मार्केट में सर्वाइव कर पाते हैं। जिनमें से चंद कंपनियां ही यूनिकॉर्न का तमगा हासिल करती हैं। ध्यान रहे कि यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप को कहा जाता है, जिनका मार्केट वैल्यूएशन एक अरब डॉलर या इससे अधिक है।

स्टार्टअप फेल होने की वजह

साल 2021 में आई केपीएमजी (KPMG) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बड़ी संख्या में स्टार्टअप के फेल होने की कुछ वजह बेहद कॉमन हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि करीब 14 प्रतिशत स्टार्टअप अपने औसत प्रोडक्ट, कमजोर बिजनेस मॉडल और मार्केटिंग में कमी की वजह से फेल हो जाते हैं। वहीं, 19 प्रतिशत स्टार्टअप मार्केट में पहले से मौजूद प्रतिस्पर्धा (कम्पीटिशन) की वजह से बंद होते हैं। जबकि 23 प्रतिशत स्टार्टअप सही टीम नहीं होने और 29 प्रतिशत स्टार्टअप फंडिंग की कमी की वजह से फेल हो रहे हैं।

2020 की शुरुआत में वैश्विक कोरोना महामारी की वजह से भी स्टार्टअप की फंडिंग पर बुरा असर पड़ा था। जिसकी वजह से कई कंपनियों को या तो बंद करना पड़ा है या फिर आईपीओ (IPO) के जरिए निवेश लाने की कोशिश की गयी। 2021 के इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक 2020 के बाद स्टार्टअप के रेवेन्यू में भी 80 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई, जो इनके बंद होने की मुख्य वजहों में से एक है।

इन यूनिकॉर्न को हुआ भारी नुकसान

यूपीआई (UPI) पेमेंट सेवा प्रदान करने वाली फिनटेक स्टार्टअप यूनिकॉर्न भारतपे (BharatPe) के लिए 2021-22 सबसे बुरा साल रहा। इस यूनिकॉर्न को $726 मिलियन का ऑपरेटिंग नुकसान हुआ है। साथ ही, इसका एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो 11.5 तक पहुंच गया है। जिसका मतलब है कि कंपनी को एक रुपया कमाने के लिए 11.5 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इंस्टैंट मैसेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (ShareChat) सहित ओयो (OYO) का एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो क्रमशः 8.2 और 8.8 हो गया है।

यूनिकॉर्न बन चुकी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) को भी पिछले वित्त वर्ष में $568 मिलियन का ऑपरेशनल नुकसान हुआ है। हालांकि, कंपनी अपना एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो कम रखने में कामयाब रही है। फ्लिपकार्ट का एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो फिलहाल 1.4 है। एक और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मिशो (Meesho) को भी पिछले वित्त वर्ष में $422 मिलियन का ऑपरेशनल रेवेन्यू लॉस हुआ। इस दौरान कंपनी का एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो 2.0 रहा।

फूड डिलिवरी स्टार्ट-अप कंपनी स्विगी (Swiggy) को $398 मिलियन का ऑपरेशनल लॉस हुआ है। कंपनी का एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो 1.7 रहा है। वहीं, ऐडटेक कंपनी अनएकेडमी (Unacademy) का 2021-22 में ऑपरेशनल लॉस $352 मिलियन का था। इस दौरान कंपनी का एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो 4.8 रहा है।

वहीं, वर्स (VerSe), पेटीएम (Paytm), उडान (Udaan) और फोनपे (PhonePe) भी टॉप-10 ऑपरेशनल घाटे वाले यूनिकॉर्न में शामिल हैं। इनका ऑपरेशनल लॉस क्रमशः $343, $320, $229 और $227 मिलियन था। वहीं, इनका एक्सपेंडिचर-टू-रेवेन्यू रेश्यो क्रमशः 3.3, 1.5, 3.9 और 2.1 चल रहा है।

स्टार्टअप्स के सामने चुनौतियां

भारत में स्टार्टअप के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिसका असर इनके बिजनेस पर पड़ता है। स्टार्टअप के लिए इन चुनौतियों पर समय से पार पा लेना बेहद जरूरी है। जिनमें सही टैलेंट हायर करना, प्रोडक्ट या सर्विस की मांग को बरकरार रख पाना समेत कस्टमर रिटेंशन और फंडिंग मिलते रहना आदि शामिल हैं।

केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्टार्टअप फंडिंग के पीछे भागते हैं, जिसकी वजह से उनका ध्यान कस्टमर रिटेंशन पर नहीं जाता है और ग्राहक छूट जाते हैं। वहीं, फंडिंग के कम्पीटिशन में बने रहना भी जरूरी है, लेकिन किसी भी बिजनेस को चलाने के लिए ग्राहक का भरोसा बेहद जरूरी होता है।

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