Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के दो साल पूरे: न कोई हारा, न कोई जीता
Russia Ukraine War: 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन संघर्ष के दो साल पूरे हो जाएंगे। रूस पर लगातार प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी ना तो गोलीबारी बंद हुईं है और ना लड़ाई रोकने का रास्ता ही निकल पाया है।
यह दशकों का सबसे बड़ा क्षेत्रीय और व्यापक गंभीर परिणामों वाला संघर्ष बन गया है। न तो रूस और ना ही यूक्रेन इतने रक्तपात के बाद भी आत्मचिंतन के लिए तैयार दिख रहे हैं।

रूस की उपेक्षा बनी युद्ध की वजह
रूस-यूक्रेन युद्ध समग्र रूप से पूरे विश्व के लिए एक त्रासदी है। यह सही है कि यूक्रेन संकट रातोरात नहीं उभरा, बल्कि इसका एक जटिल ऐतिहासिक संदर्भ है। हालांकि टकराव टालने या संकट को हल करने के कुछ मौके भी आए, लेकिन उन्हें जाया होने दिया गया। स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई और संघर्ष का यह भयानक स्वरूप हमारे सामने आया।
अमेरिका और सोवियत के शीत युद्ध के बाद रूस एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया, लेकिन यूरोप और अमेरिका ने रूस को कोई सम्मान नहीं दिया। कुछ अमेरिकी रणनीतिक विचारकों ने अमेरिकी नीति निर्माताओं को इस पर ध्यान देने की चेतावनी भी दी थी। पर अमेरिका और पश्चिम यूरोप ने रूस और यूक्रेन की ऐतिहासिक और भौगोलिक संवेदनशीलता पर विचार किए बिना नाटो के पूर्व की ओर विस्तार को बढ़ावा दिया और आख़िरकार स्थिति बेकाबू हो गई।
क्या मध्यस्थता का अब भी है कोई स्कोप?
यह कोई नहीं जानता कि संघर्ष कब तक चलेगा। कोई विजेता होगा भी या नहीं। अमेरिका और यूरोप भी अब थकान महसूस करने लगे हैं। यूक्रेन को मदद देने के मामले में अमेरिकी जनता की राय भी अब डगमगा रही है, जिससे यूक्रेन को सैन्य समर्थन की संभावनाएं भी अनिश्चित लगने लगी हैं और किसी शांतिपूर्ण तरीके व बातचीत के माध्यम से रूस-यूक्रेन संघर्ष को हल करने के प्रति लोगों का आग्रह बढ़ रहा है।
जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका में भी लोग अब ऐसा ही चाहते हैं। यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक सर्वेक्षण से भी यह बात सामने आई है कि लगभग 37 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि युद्ध बातचीत के माध्यम से समाप्त हो जाना चाहिए। यूरोप इस समय यूक्रेन को रूस के साथ बातचीत शुरू करने के लिए मनाने का आग्रह करने को तैयार हैं।
यूक्रेन के लिए सब कुछ अमेरिकी सहायता पर निर्भर
पिछले वर्ष की तुलना में, इस समय यूक्रेन को दो चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सैन्य रूप से पश्चिम, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से आवश्यक सैन्य सहायता मिले बिना यूक्रेन को लड़ाई जारी रखने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ेगा। इसके लिए यूक्रेन को अमेरिकी संसद को यह विश्वास दिलाना पड़ेगा कि वह युद्ध जीत सकता है।
पश्चिमी राजनीतिक नेताओं को अंततः इस बात का एहसास हो गया है कि यह एक लंबा युद्ध होगा। इसे देखते हुए पश्चिमी देशों ने रक्षा उत्पादन में भारी निवेश के जरिए रूस को संकेत देने का प्रयास किया है कि मास्को कीव को पछाड़कर जीतने की उम्मीद नहीं रखे। इस साल अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों में चुनाव होंने वाले हैं, इसलिए यह कम ही उम्मीद है कि चुनाव में जाने वाले देश यूक्रेन नीति में कोई बड़ा बदलाव करे।
रूस की भी हालत बहुत अच्छी नहीं
2022 से लेकर अभी तक रूस के भी हजारों सैनिकों की मृत्यु हो चुकी है। साथ ही बड़ी संख्या में रक्षा सामग्री का विनाश हुआ है। परिणामस्वरूप रूस की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। यूक्रेनी सशस्त्र बलों के धैर्य ने रूस के इस भ्रम को तोड़ दिया है पुतिन के विशेष सैन्य अभियान को पस्त नहीं किया जा सकता।
कहा तो यह भी जा रहा है कि संभव है कि रूसी सेना 2024 की गर्मियों के दौरान ध्वस्त हो जाए। इसलिए 2024 के अंत तक नए सिरे से आक्रामक कार्रवाई दोनों ओर से देखी जा सकती है। यह बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि अमेरिका में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व परिवर्तन होता है कि नहीं।
दूसरी तरफ रूस युद्ध सामग्री के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है। वह इस समय उत्तर कोरिया और ईरान सहित कई देशों को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है ताकि अपनी अर्थव्यवस्था संभाले रहे। पुतिन इस बात के भी इंतजार में हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में कोई राजनीतिक अस्थिरता आए और यूक्रेन को मिल रहे सैन्य समर्थन को पंगु बनाया जा सके।
रूस ने अभी परमाणु युद्ध के विकल्प को भी खुला रखा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब पुतिन को यह लगेगा कि यूक्रेनी जीत रहे हैं और रूसी हार रहे हैं तो अपनी हार को टालने के लिए वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन यूक्रेन हमले की विफलता के कारण फिलहाल रूसी परमाणु युद्ध का खतरा काफी कम हो गया है। यदि रूसी सेना आने वाली गर्मी में परास्त महसूस करेगी तो यह खतरा फिर से बढ़ सकता है।
अमेरिकी साख भी दांव पर
यदि यूक्रेन युद्ध हारता है तो अमेरिका विरोधियों का हौसला बढ़ जाएगा और एक बार फिर से अमेरिका की रणनीतिक गलती सामने आएगी। इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव का परिणाम जो भी हो, यूक्रेन को अमेरिकी सहायता पर रोक संभव नहीं होगी। हाँ, यदि अमेरिकी कांग्रेस किसी भी अतिरिक्त सहायता को मंजूर नहीं करती तो संसाधनों में भारी कटौती जरूर होगी। तब यूक्रेनियन सैनिकों और समाज के मनोबल पर भी असर पड़ेगा।
लाखों यूक्रेनियन इस समय विदेश में विस्थापित हैं। यदि यूक्रेन का एक समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले लोकतंत्र के रूप में पुनर्निर्माण होता है तो इसमें विदेश में रहने वाले उच्च शिक्षित और उद्यमशील यूक्रेनियन की भूमिका प्रमुख होगी। यूक्रेन के पुनर्निर्माण का प्रयास अमेरिका और यूरोपीय देश संयुक्त रूप से करेंगे, जिसमें यूक्रेन स्वयं प्राथमिकताएं तय करेगा।












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