Turmeric Farming: किसानों के लिए हल्दी की खेती किसी वरदान से कम नहीं

Turmeric Farming: बीते दिनों भारत में हल्दी की सबसे बड़ी मंडी सांगली (महाराष्ट्र) व तेलंगाना की निजामाबाद मंडी ने आशंका व्यक्त की है कि इस वर्ष हल्दी का उत्पादन कम हो सकता है। दरअसल, हल्दी की खेती के रकबे में लगभग 30% की कमी का अनुमान है और कुछ राज्यों में वर्षा की अधिकता के कारण हल्दी की फसल भी खराब हो गयी है। जिसके चलते हल्दी की कीमतों में वृद्धि होने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। बावजूद इसके हल्दी की खेती हमेशा से किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी रही है। आइये इसके बारे में जानते हैं।

राज्यवार हल्दी की खेती

हल्दी की खेती भारत के लगभग सभी राज्यों में होती है। मगर तेलंगाना में हल्दी की खेती सबसे ज्यादा होती है। यहां भारत के कुल उत्पादन का लगभग 28.09 प्रतिशत हल्दी पैदा होती है। इसके साथ-साथ महाराष्ट्र में 22.34 प्रतिशत, कर्नाटक में 11.14 प्रतिशत, तमिलनाडु में 8.13 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 6.35 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 5.86 प्रतिशत हल्दी की खेती होती है। यानि इन 6 राज्यों में भारत के कुल हल्दी उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत पैदा होता है।

Turmeric Farming benefits for farmers in india

हल्दी की किस्में और पैदावार

हल्दी का वैज्ञानिक नाम कुरकुमा लौंगा है। यह एक मसाला व औषधि भी है। जिसकी खेती इसके कंद (तने का परिवर्तित रूप) के लिए की जाती है। भारत में हल्दी की करीब 30 किस्में पैदा होती हैं। इनमें अधिकतर लकाडोंग, अल्लेप्पी, मद्रास, सांगली, इरोड, सोनिया, गौतम, रश्मि, सुरोमा, रोमा, कृष्णा, गुन्टूर, मेघा, कस्तूरी, सुवर्णा, सुकर्ण, सुरोमा और सुगना आदि प्रमुख किस्में शामिल हैं।

हल्दी की खेती के लिए 20 सेटीग्रेड से कम तापमान व दोमट, जलोढ़ तथा लैटेराइट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। वहीं इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान 5 से 7.5 के बीच होना चाहिये। प्रति एकड़ 5 से 8 क्विंटल हल्दी के बीज की आवश्यकता होती है और हल्दी की खेती का उपयुक्त समय 15 मई से लेकर 15 जून तक माना जाता है। करीब 8-9 महीने में हल्दी की खेती तैयार हो जाती है।

भारत में हल्दी उत्पादन

भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक हैं। विश्व स्तर पर हल्दी का उत्पादन लगभग 12-14 लाख टन प्रति वर्ष होता है। जिसमें भारत का योगदान 80 प्रतिशत, चीन का 8 प्रतिशत, म्यांमार का 4 प्रतिशत, नाईजीरिया व बांग्लादेश का 3 प्रतिशत हैं।

अगर भारत में हल्दी उत्पादन के आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान भारत में हल्दी उत्पादन 11.2 लाख टन हुआ। जिसमें तेलंगाना (3.13 लाख टन), महाराष्ट्र (2.26 लाख टन), कर्नाटक (1.30 लाख टन), तमिलनाडु (0.86 लाख टन), आंध्र प्रदेश (0.73 लाख टन), मध्य प्रदेश (0.60 लाख टन) टन) और पश्चिम बंगाल (0.45 लाख टन) आदि राज्यों में हल्दी का उत्पादन हुआ। जबकि वर्ष 2022 में भारत में हल्दी का उत्पादन 13.3 लाख टन हुआ।

अगर हल्दी के निर्यात को देखें तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत ने 1.71 लाख टन हल्दी का निर्यात किया था। इनमें बांग्लादेश (49,522 टन), संयुक्त अरब अमीरात (12,182 टन), ईरान (10,964 टन), अमेरिका (9,712 टन) और मोरक्को (8,522 टन) प्रमुख देश हैं।

हल्दी की खेती से कमाई

एक एकड़ में हल्दी की खेती के लिए हल्दी बीजों पर करीब 40-50 हजार रूपये का खर्च आता है। इसके अलावा बुवाई, सिंचाई, खाद और अन्य खर्च पर लगभग 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। अर्थात एक एकड़ में हल्दी की खेती पर लगभग 70-80 हजार रुपये का खर्च आता है।

जबकि प्रति एकड़ औसतन 100-150 क्विंटल हल्दी का उत्पादन होता है। हल्दी का 6000 से 8000 प्रति क्विंटल बाजार मूल्य होता है। इस हिसाब से एक एकड़ से लगभग 7 से 10 लाख रूपये का हल्दी उत्पादन हो जाता है। खर्च को निकालकर हल्दी किसान को एक एकड़ से लगभग 5-6 लाख रूपये की शुद्ध कमाई हो सकती है।

हल्दी के गुण व लाभ

हल्दी एक मसाले के साथ-साथ एक जड़ीबूटी भी है। कच्ची हल्दी में करक्यूमिन सबसे अधिक मात्रा में होता है। हल्दी का विशेषतौर पर मसाले के रूप में प्रयोग होता है। इसके साथ-साथ सर्दी-जुकाम, त्वचा रोग व अन्य बिमारियों में भी इसका प्रयोग होता है। हल्दी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण होते है। करक्यूमिन (एंटी-कैंसर) के कारण हल्दी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारों के खतरे को रोकने में सहायक होती है। हल्दी में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट से पाचन तंत्र (लिवर आदि) मजबूत होता है।

हल्दी एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक औषधि है, इसलिए छोटी चोट में हल्दी बहुत लाभदायक होती है। चोट पर लगाने से बहने वाला खून रुक जाता है और घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है। दूध के साथ हल्दी के सेवन से भी चोट में बहुत आराम मिलता है तथा हड्डियां भी मजबूत होती है। हल्दी के सेवन से रक्त शुद्ध होता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याएं दूर होती है।

जोड़ों के दर्द (अर्थराइटिस) में हल्दी का सेवन मददगार होता है। दातों में पायरिया होने पर हल्दी में सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर मालिश करने से लाभ मिलता है। सौन्दर्य क्रीम में हल्दी का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि हल्दी चेहरे के कील मुहाँसे, दाग-धब्बों को कम कर देती है, जिसमें चेहरा साफ व सुन्दर हो जाता है।

इस प्रकार अगर हल्दी को हम सीमित मात्रा में लेते हैं तो फायदेमंद होती है। अगर इसको असीमित मात्रा में लेते है तो यह शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है। ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होने के कारण किडनी मरीज को हल्दी अधिक मात्रा में नहीं लेनी चाहिए। हल्दी पथरी बनाने का काम भी करती है, यदि लगातार असीमित मात्रा में हल्दी खा रहे हैं तो इससे पथरी की समस्या और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा पीलिया (हेपेटाइटिस) मरीज को भी हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+