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Actors in Politics: तमिल सुपर स्टार विजय भी राजनीति में, जानें कैसा रहा है फिल्मी हस्तियों का राजनीतिक सफर

तमिल अभिनेता विजय ने भी राजनीति में आने का ऐलान कर दिया है। वह एक अलग पार्टी बना रहे हैं, जिसका नाम उन्होंने तमिझागा वेत्री कज़गम रखा है। विजय दक्षिण के बहुत ही लोकप्रिय अभिनेता हैं और इनकी फीस भी करोड़ों में है। विजय ने दावा किया है कि उनकी पार्टी तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव में दम खम से उतरेगी। फिलहाल वह कुछ महत्वपूर्ण फिल्मी प्रोजेक्ट में व्यस्त हैं इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।

विजय भी समाज और प्रशासन में भ्रष्टाचार की संस्कृति को उखाड़ फेंकने के नारे के साथ राजनीति में उतर रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि वह समानता की तमिल संस्कृति और राज्य की राजनीतिक परंपराओं के अनुरूप अपनी राजनीतिक विचारधारा रखेंगे।

Tamil super star Vijay also in politics, know how has been the political journey of film personalities

विजय पहले ऐसे अभिनेता नहीं है, जिन्होंने राजनीति में छलांग लगाने का मन बनाया हो। इसके पहले भी कई फिल्मी हस्तियां राजनीति में भाग्य आजमा चुकी हैं। इनमें से कुछ तो बहुत सफल रहे हैं, पर कई बुरी तरह असफल। आइए डालते हैं एक नजर फिल्मी परदे से राजनीति के दंगल में उतरने वाली फिल्मी हस्तियों के जीवन पर।

मरुथुर गोपालन रामचन्द्रन (एमजीआर)
सफल भारतीय पुरुष अभिनेता से ज्यादा सफल राजनीतिज्ञ बनने का कारनामा करने वाले तमिलनाडु के एमजीआर बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने अभिनय छोड़कर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी बनाई और 1977 से 1987 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे।

नाटक मंडली से अभिनय की शुरुआत करने वाले एम. जी. आर. ने 1936 की फ़िल्म साथी लीलावती में सहायक भूमिका में अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी और जल्दी ही स्टार के रूप में स्थापित हो गए। एमजीआर की 1987 में जब मृत्यु हुई तब वह मुख्यमंत्री के पद पर ही थे। उनके जाने की सहानुभूति लहर पर सवार होकर एआईडीएमके 1980 और 1984 का चुनाव भी जीत गई।

जयललिता
जयललिता तमिल फिल्मी दुनिया की दूसरी सुपर स्टार रहीं हैं, जिन्हें राजनीति में भी जबर्दस्त कामयाबी मिली। उनको एमजीआर ने राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एमजीआर के साथ कई फिल्मों में काम किया था। जयललिता अपने फिल्म करियर से संतुष्ट थीं। उन्हे राजनेता बनने से ज्यादा अभिनय करना पसंद था। लेकिन एक बार राजनीति में आने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर फिर नहीं देखा।

वह 1984 में राज्यसभा सांसद के रूप में चुनी गईं थीं। वह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में बेहद सफल रहीं। हालांकि उनके खिलाफ ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा भी चला और उन्हें दोषी भी ठहराया गया। जयललिता ने अपने इशारे पर केंद्र की कई सरकारों को भी चलाया।

नंदमुरी तारक रामाराव (एनटीआर)
तेलुगु फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता रहे एन.टी. रामाराव ने भी फिल्मी करियर के बाद राजनीति में कदम रखा और 1982 में अपनी खुद की पार्टी तेलुगु देशम की स्थापना की। अगले वर्ष हुए विधानसभा चुनावों में एनटीआर की लोकप्रियता के कारण उनकी पार्टी को भारी बहुमत मिला और जनवरी 1983 में वे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

अगले वर्ष जब वे अपने इलाज के लिए विदेश गए हुए थे तो कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल पर दवाब डालकर उनकी पार्टी के ही एक नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी। लेकिन एनटीआर ने विदेश से लौटकर जोरदार आंदोलन छेड़ दिया। जिसके प्रभाव से राज्यपाल को हटना पड़ा और एनटी रामाराव को एक महीने बाद ही फिर से मुख्यमंत्री पद सौंप दिया गया।

इसके बाद वे कांग्रेस विरोधी मुहिम का हिस्सा बन गए और विपक्षी एकता के लिए सदैव सक्रिय रहे। उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रव्यापी सहानुभूति की लहर पर सवार होकर 400 से ज्यादा लोक सभा सीटें जीतने वाले राजीव गांधी आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम के सामने नहीं टिक पाए। 1984 में हुए चुनावों में कांग्रेस के बाद एनटीआर की पार्टी ही लोकसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी।

1989 का विधानसभा चुनाव वे हार गए लेकिन 1994 में फिर से उनकी सत्ता में वापसी हुई और तीसरी बार उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि एक वर्ष बाद ही उनके अपने दामाद और तेलुगू देशम पार्टी के महासचिव चंद्रबाबू नायडू ने विधायकों को तोड़ कर एनटीआर को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया और खुद मुख्यमंत्री बन गए।

कमल हासन
वर्सटाइल एक्टर के रूप में अभिनय का लोहा मनवाने वाले कमल हासन राजनीतिक आकांक्षाओं से भी भरे पड़े हैं। 2018 में कमल हसन ने अपनी राजनीतिक पार्टी मक्कल निधि माईम (एमएनएम) की स्थापना की।

2019 के लोकसभा चुनावों में कमल हासन की पार्टी ने तमिलनाडु की 37 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट पर टक्कर में नहीं आ पाई। 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कमल हासन ने कोयंबतूर दक्षिण से चुनाव लड़ा लेकिन कई पार्टियों के समर्थन के बावजूद वे भाजपा की वनाथी श्रीनिवासन से हार गए। राजनीतिक मुद्दों पर कमल हासन हमेशा मुखर रहते हैं।

चिरंजीवी
साउथ के सुपरस्टार चिरंजीवी अभिनेता के रूप में बेहद सफल रहे हैं। उन्होंने भी राजनीति में हाथ आजमाने की कोशिश की। इसी कारण उन्होंने 2007 से 2017 तक कोई भी फिल्म नहीं की क्योंकि उन्हें पूरा समय राजनीति को देना था। 2008 में उन्होंने आंध्र प्रदेश में प्रजा राज्यम पार्टी की स्थापना की थी।

2009 में आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में चिरंजीवी की पार्टी के 18 विधायक चुने गए जिनमें खुद चिरंजीवी भी एक थे। लेकिन दो वर्ष बाद उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। 2012 में वे कांग्रेस से राज्यसभा के सांसद भी चुने गए और मनमोहन सिंह सरकार में पर्यटन मंत्री का दायित्व भी उन्होंने निभाया।

पवन कल्याण
चिरंजीवी के ही छोटे भाई पवन कल्याण एक दमदार अभिनेता, निर्देशक, लेखक रहे हैं और एक सफल राजनीतिज्ञ भी। कल्याण की फिल्म थोली प्रेमा 1998 में तेलुगु की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म घोषित हुईं थी। उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। पवन कल्याण ने अपने बड़े भाई चिरंजीवी के साथ ही राजनीति में कदम रखा और उनकी प्रजा राज्यम पार्टी की युवा शाखा के प्रमुख का दायित्व संभाला।

चिरंजीवी की पार्टी के कांग्रेस में विलय के बाद पवन कल्याण ने 2014 में अपनी जन सेना पार्टी का गठन किया। पहले उन्होंने भाजपा और तेलुगू देशम पार्टी का साथ दिया लेकिन बाद में कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में उतरे, लेकिन चुनाव हार गए। उनकी पार्टी का केवल एक ही उम्मीदवार विधायक बन सका। 2020 में पवन कल्याण ने फिर से भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर पवन कल्याण बेहद सक्रिय रहते हैं।

विजयकांत
विजयकांत भी अभिनेता से नेता बने हैं। वह 2011 से 2016 तक तमिलनाडु विधानसभा में विधायक भी रहे थे। उन्होंने 2005 में केंद्र-वाम पार्टी देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम की स्थापना की और ऋषिवंदियम निर्वाचन क्षेत्र से जीत कर विधानसभा पहुंचे थे।

राम्या
दिव्या स्पंदना फिल्मी परदे पर राम्या के नाम से जानी जाती हैं। कन्नड़ फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री राम्या ने तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया है। वह दो बार फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। 2013 में, उन्होंने कर्नाटक में मांड्या निर्वाचन क्षेत्र के लिए कांग्रेस के टिकट पर उपचुनाव जीता था पर बाद में वह चुनाव हार गईं।

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