Startups in India: किस राज्य में कितने स्टार्टअप्स, कितने पैदा हुए रोजगार
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने 31 दिसंबर 2023 तक 1,17,254 स्टार्टअप को मान्यता दी है, उनमें गुजरात, कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में काफी आगे हैं।
वहीं, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय को टॉप प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में चिन्हित किया गया है। स्टार्टअप्स के जरिए भारत इनोवेशन के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है। यह क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता जा रहा है।

विभाग का कहना है कि इन स्टार्टअप ने 12.42 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों को देखें तो देश के हर एक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में कम से कम एक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप जरूर है और वह 80 फीसदी से अधिक जिलों में फैला हुआ है। यही नहीं डीपीआईआईटी की रिपोर्ट यह भी कहती है कि मान्यता प्राप्त 55,816 स्टार्टअप में कम से कम एक महिला डायरेक्टर जरूर है।
संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने भी राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि मोदी सरकार ने देश में नवाचार, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और स्टार्टअप में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) का निर्माण कर दिया है। उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी, 2016 को स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत मोदी सरकार ने की थी।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्टार्टअप से पैदा रोजगार
डीपीआईआईटी ने रिपोर्ट जारी कर केंद्र शासित प्रदेश-वार मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या और उनके द्वारा पैदा हुई प्रत्यक्ष नौकरियों की संख्या के आंकड़े सामने रखे है। इसमें खास तौर से पिछले पांच वर्षों में यानी 2019, 2020, 2021, 2022 और 2023 के बारे विस्तृत रूप से बताया गया है। मोदी सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जो योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं, डीपीआईआईटी ने उनके विवरण को भी सार्वजनिक किया है। डीपीआईआईटी के अनुसार देश में अब तक करीब 1,800 मान्यता प्राप्त स्टार्टअपस ने पेटेंट भी हासिल किए हैं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंच चुके हैं स्टार्टअप
पिछले पांच वर्षों में, 2019 से 2023 तक की अवधि के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और उनसे पैदा रोजगारों की संख्या में औसतन तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। कुछ राज्यों में यह आंकड़ा अधिकतम 8 गुना तक पहुंच गया है। आंकड़ों को विस्तार से देखें तो पता चलता है कि स्टार्टअप का इकोसिस्टम अब छोटे शहरों तक पहुंच चुका है। डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में से 50 फीसदी टियर-2 और टियर-3 शहरों में सक्रिय हैं।
नेशनल स्टार्टअप अवार्ड के चौथे एडिशन में छोटे शहरों से 58 फीसदी आवेदन
डीपीआईआईटी ने साल 2020 में स्टार्टअप को सम्मान और अलग पहचान दिलाकर, इनको अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए नेशनल स्टार्टअप अवार्ड (एनएसए) की शुरुआत की थी। हाल ही में आयोजित एनएसए के चौथे एडिशन में 2,324 स्टार्टअप ने हिस्सा लिया था। इसमें खास बात यह रही कि इस साल विभाग के पास आए कुल आवेदनों में लगभग 58 फीसदी टियर-2 और टियर-3 शहरों से थे।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का इस बारे में कहना है कि इनोवेशन के लिए भारत वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है। बीते साल देश ने इस क्षेत्र में कई उपलिब्धयां हासिल की हैं। आज स्टार्टअप को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझा जाता है। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में स्टार्टअप काफी मददगार साबित हो रहे हैं। इसलिए देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में कई मंत्रालय साझा तौर पर योजना बनाकर काम कर रहे हैं।
डीपीआईआईटी से कैसे मान्यता प्राप्त कर सकते हैं स्टार्टअप
डीपीआईआईटी से रजिस्टर्ड या मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को केंद्र सरकार की तरफ से बहुत सारे फायदे मिलते हैं, हालांकि, हर स्टार्टअप यहां रजिस्टर नहीं हो सकता है। डीपीआईआईटी से मान्यता पाने के लिए स्टार्टअप को कई पैमानों पर खरा उतरना पड़ता है। स्टार्टअप कंपनी की उम्र 10 साल से ज्यादा न हो, कंपनी पीएलसी, आरपीएफ या एलएलपी के दायरे में हो। किसी भी साल बिजनेस का टर्नओवर 100 करोड़ से ज्यादा न हो। वह किसी बड़े बिजनेस का हिस्सा नहीं, बल्कि ओरिजिनल एंटिटी हो। इसके साथ ही बिजनेस इनोवेटिव और रोजगार पैदा करने वाला भी होना चाहिए।
इन सभी शर्तों को पूरा करने के बाद ही स्टार्टअप को डीपीआईआईटी से मान्यता मिलती है। उसके बाद शुरुआती 10 सालों में लगातार 3 साल तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को टैक्स में छूट मिलती है। साथ ही कई सारी औपचारिकताओं को पूरा करने से भी स्टार्टअप बच जाता है। जिससे बिजनेस से जुड़े कई काम आसान हो जाते हैं। बहुत सारे सरकारी रेगुलेशन से भी स्टार्टअप को छूट मिलती है।












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