Diesel Vehicles: क्यों दुनिया भर में डीजल वाहनों पर लग रही है रोक? पढ़ें यह विशेष रिपोर्ट
एक जमाना था जब डीजल कारों का अपना रुतबा हुआ करता था। लेकिन आज भारत सहित दुनियाभर में डीजल से चलने वाले वाहनों को लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं।

हाल ही में भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक अधिकारिक पैनल ने 2027 तक दस लाख से अधिक आबादी वाले और ज्यादा प्रदूषण वाले शहरों में डीजल से चलने वाले चौपहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। पैनल की रिपोर्ट सामने आने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इस सुझाव पर अभी तक सरकार की स्वीकृति आनी बाकी है।
डीजल से चलने वाले वाहनों को लेकर सरकार की तरफ से आई यह कोई नयी बात नहीं है। दरअसल, बीतें कुछ सालों से डीजल से चलने वाले वाहनों पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाये जा रहे है। ऐसा ही रहा तो, इस बात की प्रबल संभावना है कि निकल भविष्य में डीजल से चलने वाले वाहनों, विशेषकर कारों पर, पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जायेगा। इन सबके बीच आइये आपको बताते हैं कि दुनियाभर में ऐसे वाहनों को लेकर क्या हो रहा है? साथ ही जानेगें कि भारत में कितनी खपत है डीजल की?
भारत में डीजल की कितनी खपत?
स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में भारत में डीजल की खपत लगभग 79.3 बिलियन लीटर थी। जिसका एक बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से परिवहन उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है। परिवहन के लिए सालाना औसतन 33 मिलियन टन डीजल का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, भारत सरकार का लक्ष्य आने वाले दशकों में डीजल की खपत को कम करना है। 2021 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि साल 2070 तक भारत अपने कार्बन उत्सर्जन को शून्य कर देगा।
डीजल का विकल्प?
प्रदूषण को कम करने और हवा को साफ रखने के लिए डीजल के उपयोग सीमित करने संबंधी लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। जैसे अप्रैल 2020 में, भारत सरकार ने BS-VI उत्सर्जन नियम लागू किये। इन नियमों में डीजल इंजन सहित वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन और सख्त उत्सर्जन मानकों के उपयोग शामिल थे। फिर अक्टूबर 2020 में, आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर, 2021 से दिल्ली में डीजल जनरेटरों की बिक्री एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसी बीच सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है। साथ ही राजधानी दिल्ली सहित एनसीआर में एक सख्त नियम भी लागू कर रखा है, जिसके तहत वहां 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को नहीं चलाया जा सकता है। साथ ही पकड़ें जाने पर गाड़ी को जब्त करने के भी आदेश दिये गये है।
क्यों डीजल को लेकर है समस्या?
डीजल को लेकर चिंता बढ़ने के दो प्रमुख कारण है। पहला तो यही है कि इससे वायु प्रदूषण बहुत होता है। इसके प्रयोग से हानिकारक अवयव जैसे सल्फर और कार्बन वातावरण में अधिक फैलते हैं। यह दोनों ही हृदय और फेफड़ों संबंधी गंभीर बीमारियों के एक बड़े कारण हैं।
जबकि दूसरा कारण है कि निकट भविष्य में डीजल समाप्त होने की कगार पर है। तेजी से बढ़ती खपत और वाहनों की बिक्री ने डीजल के अस्तित्व पर ही संकट पैदा कर दिया है। साल 2020 में ब्रिटिश पेट्रोलियम द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया में लगभग 392 बिलियन गैलन डीजल ईंधन बचा है। रिपोर्ट में यह भी अंदेशा जताया गया कि यह ईंधन लगभग 47 वर्षों तक चल सकता है।
इसका मतलब है कि अब डीजल की खपत को रोकना होगा जिससे इसका इस्तेमाल आगे भी जरुरी तौर पर होता रहे। साथ ही इसके पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर युद्ध स्तर पर विचार करना होगा। मगर इसके लिये सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों को एक साथ आना होगा। तो आइये आपको बताते हैं कि दुनिया के दूसरे मुल्क इसपर क्या कार्यवाही कर रहे हैं।
यूनाइटेड किंगडम
यूनाइटेड किंगडम ने 2030 से नए पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री पर रोक लगाने की योजना बनाई है। हालांकि, कुछ हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों को 2035 तक बेचने की अनुमति दी जाएगी। यह प्रतिबंध वाहनों के अलावा डीजल ईंधन के उपयोग पर लागू नहीं होगा।
फ्रांस
फ्रांस के कुछ शहरों में डीजल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। रेडियो फ्रांस इंटरनेशनल के अनुसार, फ्रांस की राजधानी पेरिस में 15 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। जबकि ग्रेटर पेरिस में, 2005 से पहले निर्मित सभी डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। अब ऐसी योजना है कि ग्रेटर पेरिस में जनवरी 2024 तक सभी डीजल वाहनों को हटा दिया जायेगा।
नॉर्वे
'इंडिपेंडेंट' न्यूज पोर्टल के मुताबिक, नॉर्वे में 2025 तक डीजल सहित सभी जीवाश्म ईंधन वाली कारों की बिक्री पर रोक लग जायेगी। नॉर्वे का लक्ष्य 2025 तक 100 प्रतिशत नॉर्वेजियन कारों को हरित ऊर्जा पर चलाना है। फिलहाल राजधानी ओस्लो में डीजल वाहनों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, ओस्लो में जिस दिन वायु प्रदूषण ज्यादा होता है उस दिन वहां पर डीजल वाहनों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया जाता है। हवा की गुणवत्ता में सुधार होने पर प्रतिबंध हटा लिया जाता है।
चीन
चीन ने डीजल ईंधन पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन कारों के उत्पादन एवं बिक्री सीमित करने को लेकर काम चल रहा है। ट्रांसपोर्ट पॉलिसी और द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2035 में डीजल समेत पेट्रोल और गैस कारों पर चीन प्रतिबंध लगा देगा। अप्रैल 2022 में चीनी सरकार ने अपनी रिफाइनरियों को गैसोलीन और डीजल का निर्यात रोकने के लिए कह दिया है।
जर्मनी
2018 में, जर्मनी के एक न्यायालय ने फैसला सुनाया कि शहरों में पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले डीजल वाहनों पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। फिर साल 2019 में जर्मन सरकार ने स्टटगार्ट, म्यूनिख, हैम्बर्ग और बॉन जैसे शहरों में पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगा दी थी। सरकार वहां के कुछ शहरों को 'ब्लू जोन' भी बना रही है, जहां केवल यूरो-6 उत्सर्जन मानक का पालन करने वाले डीजल वाहनों को ही प्रवेश करने की अनुमति होगी।
ताइवान
ताइवान के आर्थिक मंत्रालय के अनुसार गैर-इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल की नयी बिक्री पर 2035 से और कारों पर 2040 से प्रतिबंध लगा दिया जायेगा। फिलहाल ताइवान ने 2030 तक सभी बसों और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक मॉडल में बदलने की योजना बनाई है।
दक्षिण कोरिया
राजधानी सियोल में नयी डीजल कारों की खरीद पर प्रतिबंध है। जबकि 2025 तक टैक्सी, एयरपोर्ट बसों सहित सभी डीजल वाहनों को सार्वजनिक परिवहन से हटाने की योजना है। एशिया सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार, सियोल अगले पांच वर्षों में अधिकांश डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों से बदलने की योजना बना रहा है।
सिंगापुर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से सिंगापुर में डीजल कारों और टैक्सियों को रजिस्टर नहीं किया जायेगा। मार्च 2021 में सिंगापुर के परिवहन मंत्री ओंग ये कुंग द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के तहत यह घोषणा की गई थी।
ऑस्ट्रेलिया
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ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने फिलहाल डीजल को प्रतिबंधित नहीं किया है लेकिन आने वाले वर्षों में उनकी ऐसा करने की योजना है। सरकार के अनुसार, 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन को हासिल करने के लिए 2035 तक नये गैसोलीन और डीजल वाहनों की बिक्री पर रोक लगा दी जाएगी। नेशनल रोड्स एंड मोटरिस्ट्स एसोसिएशन ने 2035 तक डीजल और पेट्रोल दोनों कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का लक्ष्य रखा है। 2017 तक ऑस्ट्रेलिया में 22 प्रतिशत डीजल इंजन वाली गाड़ियां थी।
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