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Soft Drinks: दिमाग को कमजोर कर सकते हैं सॉफ्ट ड्रिंक, नए अध्ययन में खुलासा

एक बार फिर यह तथ्य सामने आया है कि डायट कोक में ऐसा रसायन मिला होता है, जिसके पीने से आदमी की यादाश्त कमजोर हो सकती है और उसकी सीखने की शक्ति कम होती जाती है। फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ मेडिसिन ने चूहों पर 16 सप्ताह के प्रयोग के बाद यह निष्कर्ष निकाला है।

अध्ययन में पाया गया कि कृत्रिम मिठास एस्पार्टेम के सेवन से चूहों की फुर्ती और वस्तु पहचानने की शक्ति कम हो गई है। यह पहली बार नहीं है जब सॉफ्ट ड्रिंक को लेकर नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में कोई खबर आई है।

Soft drinks

सॉफ्ट ड्रिंक्स और उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव
सॉफ्ट ड्रिंक्स एक प्रकार के नॉन-एल्कोहोलिक कार्बोनेटेड ड्रिंक्स हैं। इनमें बहुत अधिक मात्रा में फ्लेवर और मिठास होती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैलोरी और चीनी की मात्रा अधिक होती है, जिसकी वजह से मोटापा और वजन बढ़ता है। अत्यधिक चीनी वाले ड्रिंक्स का सेवन करने से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। प्रतिदिन केवल सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से मधुमेह (डायबिटीज) होने का खतरा भी बढ़ता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स के एसिड और चीनी दांतों के इनेमल को हानि पहुंचा सकते हैं और दांतों में सड़न पैदा कर सकते हैं।

सॉफ्ट ड्रिंक्स को बनाने की सामग्री
सॉफ्ट ड्रिंक्स को बहुत अलग-अलग प्रकार की सामग्रियों को मिलाकर बनाया जाता है। इसका मुख्य अवयव कार्बोनेटेड पानी है जो उसमें बुलबुले पैदा करता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में मिठास के लिए चीनी या एस्पार्टेम या सुक्रालोज़ जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर डाला जाता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में तीखापन लाने और उसे ज्यादा समय तक बचाए रखने के लिए एसिडुलेंट्स, सिट्रिक एसिड और फॉस्फोरिक एसिड का उपयोग किया जाता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में अलग स्वाद के लिए नैचुरल और आर्टिफिशियल दोनों तरह के फ्लेवर डाले जाते हैं। इसके अलावा सॉफ्ट ड्रिंक्स में अलग रंग देने के लिए आर्टिफिशियल कलर का उपयोग किया जाता हैं। फिर कोला में कैफीन भी होता है।

भारत में सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड्स का व्यवसाय
भारत सॉफ्ट ड्रिंक्स उद्योग का एक महत्वपूर्ण बाजार है जो पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रहा है। स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक बाजार का आकार वर्तमान में 4,704 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है और 2027 तक 5.39% प्रति वर्ष बढ़ने का अनुमान है। भारत में शीर्ष सॉफ्ट ड्रिंक्स ब्रांडों में कोका-कोला, पेप्सी, थम्स अप, स्प्राइट, फैंटा, माज़ा, 7अप और मिरिंडा हैं। स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 तक, भारत में कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स बाजार में स्प्राइट की हिस्सेदारी 20% थी। कर्ली टेल्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, माज़ा भारत में सबसे अधिक बिक्री वाला सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड है। वित्तीय वर्ष 2021 में, माज़ा ने घरेलू बाज़ार में ₹2,826 करोड़ की कुल बिक्री दर्ज की, जो भारत में कोका-कोला की बिक्री से भी अधिक है।

सॉफ्ट ड्रिंक्स पर पूर्व में रिसर्च
सॉफ्ट ड्रिंक्स को कई प्रकार की शारीरिक बीमारी का कारण बताया जाता है। जिनमें वजन बढ़ना, मधुमेह, हृदय संबंधी समस्याएं और दांत की समस्याएं शामिल हैं। अमेरिका की राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) ने सॉफ्ट ड्रिंक्स पर 88 अध्ययनों की एक व्यवस्थित रिपोर्ट और मेटा-रिपोर्ट में सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन और खराब पोषण और स्वास्थ्य परिणामों के बीच स्पष्ट संबंध पाया गया। एनआईएच की रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन गुस्से, डिप्रेशन, आत्महत्या करने के विचार से भी जुड़ा है। हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी युक्त सोडा के सेवन से हृदय रोग के मामले 75 प्रतिशत बढ़ सकते हैं। कैंसर काउंसिल विक्टोरिया द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सॉफ्ट ड्रिंक्स के नियमित सेवन से स्तन कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

भारतीय हस्तियों द्वारा सॉफ्ट ड्रिंक्स का प्रचार!
भारतीय मशहूर हस्तियाँ, विशेषकर बॉलीवुड सितारे, वर्षों से सॉफ्ट ड्रिंक्स का प्रचार-प्रसार करते आ रहे हैं। लगभग सभी शीर्ष अभिनेताओं ने सॉफ्ट ड्रिंक्स का प्रचार और विज्ञापन किया है। शाहरुख खान, सलमान खान, महेंद्र सिंह धोनी, प्रियंका चोपड़ा जोनास, ऐश्वर्या राय, आमिर खान, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर कुछ भारतीय हस्तियां हैं जिन्होंने शीतल पेय का प्रचार किया है। सलमान खान और अक्षय कुमार ने पेप्सी और कोका कोला दोनों का विज्ञापन किया है।

युवा पीढ़ी को सॉफ्ट ड्रिंक्स की लत!
कई अध्ययनों में पाया गया है कि 12 से 15 वर्ष की आयु के युवाओं में सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन से मोटापा, दांतो के सड़न और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा, जर्नल ऑफ एडिक्शन मेडिसिन के एक अध्ययन में पाया गया कि अमेरिका में लगभग 30 प्रतिशत छात्र एनर्जी ड्रिंक, 40 प्रतिशत छात्र सॉफ्ट ड्रिंक्स का रोजाना सेवन करते है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 15-19 वर्ष के आयु वर्ग के किशोर 40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों की तुलना में सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन लगभग 1.7 गुना अधिक करते है। स्वास्थ्य शिक्षा अनुसंधान के अध्ययन में पाया गया कि भारत में 50 प्रतिशत से अधिक युवा सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन करते हैं।

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