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आखिर अमर सिंह से इतनी नफरत क्यों करते हैं अखिलेश?

आखिर अमर सिंह ने ऐसा क्या किया है जिसके कारण सीएम अखिलेश यादव उनसे नफरत करते हैं।

लखनऊ। आज एक बार फिर से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने भरी सभा में अखिलेश यादव को फटकार लगाई और दोहराया कि अमर सिंह मेरे दोस्त, मेरे भाई इसलिए मैं उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन सकता हूं।

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लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आखिर अमर प्रेम में ऐसी कौन सी शक्ति है जिसके चलते आज एक बार फिर से मुलायम सिंह ने अपने लाडले बेटे अखिलेश यादव को भी खरी-खरी सुना दी और ऐसी कौन सी कड़वाहट अखिलेश यादव के मन में ठाकुर अमर सिंह के लिए भरी हुई है जो बार-बार उफनाती रहती है।

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आईबीएन 7 में छपी हरिगोविंद विश्‍वकर्मा की खबर को माने तो जहर के ये बीज आज से नहीं पनपे हैं बल्कि इस शुरूआत आज से 35-40 साल पहले हो चुकी थी। खबर के मुताबिक अखिलेश को अमर सिंह पर गुस्सा तब से है जब से उन्होंने श्रीमती साधना गुप्ता को अखिलेश यादव की दूसरी मां बनने में मदद की थी।

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आगे की खबर तस्वीरों में...

1982 में मुलायम औऱ साधना बने दोस्त

1982 में मुलायम औऱ साधना बने दोस्त

ये वो वक्त था जब मुलायम सिंह यादव यूपी की राजनीति में बहुत बड़ा नाम बनकर उभरे थे। साल 1982 में जब मुलायम सिंह यादव लोकदल के अध्यक्ष बने तब उनकी मित्रता पार्टी की गई युवा पदाधिकारी साधना गुप्ता पर पड़ी जो कि निहायत ही खूबसूरत और आकर्षक महिला के नाम से विख्यात थीं। उम्र में वो नेताजी मुलायम सिंह यादव से 20 साल छोटी थीं लेकिन इसके बावजूद दोनों में गहरी मित्रता हो गई थी।

शादीशुदा थीं साधना गुप्ता

शादीशुदा थीं साधना गुप्ता

आपको बता दें कि साधना गुप्ता भी मुलायम सिंह की तरह मैरड थीं, उनकी शादी फर्रुखाबाद जिले के छोटे से व्‍यापारी चुंद्रप्रकाश गुप्‍ता से हुई थी। लेकिन बाद में साधना की शादी टूट गई, कहा जाता है मुलायम से दोस्ती ही उनकी शादी के टूटने का कारण थी। पार्टी के अंदर दोनों को लेकर बातें होती थीं लेकिन दबी जुबान में क्योंकि मुलायम की ताकत के आगे किसी की हिम्मत नहीं थी कि वो कुछ उन्हें कह सके।

1988 में प्रतीक का जन्म

1988 में प्रतीक का जन्म

साल 1988 में साधना गुप्ता ने प्रतीक गुप्ता को जन्म दिया, तब तक अधिकारिक रूप से मुलायम सिंह ने उन्हें अपनी पत्नी नहीं माना था और कहा जाता है कि इस बात को लेकर मुलायम की पहली पत्नी और अखिलेश की मां मालती सिंह में काफी तनातनी थीं लेकिन उन्होंने कभी भी खुलकर सार्वजनिक मंच पर इस बात के लिए विरोध नहीं किया। बस यहीं से अखिलेश यादव को साधना गुप्ता के बारे में जानकारी मिली, वो अपनी मां के काफी करीबी कहे जाते थे तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका हक छीनने वाली के प्रति उन्हें लगाव तो होगा नहीं।

1996 में हुई मुलायम की लाइफ में अमर सिंह की एंट्री

1996 में हुई मुलायम की लाइफ में अमर सिंह की एंट्री

साल 1996 में मुलायम की लाइफ में अमर सिंह जैसे छोटे भाई की एंट्री हुई जिसने यूपी की सत्ता और सपा पार्टी को नीचे से लेकर ऊपर तक बदल दिया। मुलायम और अमर सिंह की कसीदे राजनैतिक गलियारों में पढ़े जाने लगे। सपा ने यूपी में वर्चस्व स्थापित किया और अमर ने मुलायम के दिल में, आलम ये था कि मुलायम, ठाकुर अमर सिंह के बिना एक कदम नहीं चलते थे।

2003 में अखिलेश की मां का निधन

2003 में अखिलेश की मां का निधन

साल 2003 में अखिलेश की मां मालती सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया और इसके बाद साधना गुप्ता की पूरी कोशिश मुलायम की ब्याहता पत्नी बनने में लग गई। वो अमर सिंह और शिवपाल के काफी करीब थीं और उनकी मदद से उन्होंने इस कोशिश को असली जामा पहनाया क्योंकि साल 2007 में अमर सिंह ने सार्वजनिक मंच से मुलायम से साधना को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आग्रह किया और इस बार मुलायम उनकी बात मानने के लिए तैयार हो गए।

अमर सिंह ने कराई शादी

अमर सिंह ने कराई शादी

और इसके बाद साधना गुप्ता मिसेज साधना गुप्ता यादव और प्रतीक गु्प्ता यादव बन गए और इसी वजह से अखिलेश यादव के मन में अमर सिंह के लिए सम्मान कम और नफरत ज्यादा हो गई। मुलायम का परिवार भी साधना और प्रतीक को अपनाना नहीं चाहता था लेकिन मुलायम के आगे किसी की नहीं चली और आज कहा जाता है कि सपा परिवार के अंदर वो ही होता है जो कि साधना कहती हैं।

नफरत का अंकुर फूटा!

नफरत का अंकुर फूटा!

लेकिन साल 2012 में जब मुलायम सिंह ने अखिलेश को सीएम बनाया तो साधना को अपना और अपने बेटे प्रतीक का भविष्य अंधकार में दिखने लगा और यहीं से नफरत की रस्सा-कस्सी शुरू हुई, जो आज सड़क पर दिखाई पड़ रही है। साधना ने शिवपाल औऱ अमर सिंह के जरिए अपनी बातें कहीं और नतीजा आप देख ही रहे हैं। फिलहाल इन खबरों में कितनी सच्चाई है ये तो हम नहीं कह सकते हैं लेकिन इसमें कोई शक नहीं आज यूपी की राजनीति का सबसे बड़ा परिवार चाचा-भतीजे के झगड़े के कारण घर-घर में हंसी और आलोचना का पात्र बना हुआ है।

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