मोदी और इंदिरा एक जैसे, मंत्रियों में व्याप्त हैं पीएम मोदी का डर

किताबें लोगों के लिए नयी जानकारी, अनुभव या वृतांत लेकर आती हैं। लेकिन सुर्खियों में आने के लिए किताबों को लिखने का दौर शुरु हो गया है। पूर्व सीएजी विनोद राय, कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह सहित कई ऐसे लोग हैं जिनकी किताबों से जुडे विवादो नें सुर्खियां बटोरी है। इसी कड़ी में राजदीप सरदेसाई अपनी नयी किताब 2014 दी इलेक्शन दैट चेंज्ड इंडिया लेकर आये हैं।

rajdeep sardesai

इंदिरा भी विपक्ष को कमजोर करती थी

इंदिरा भी विपक्ष को कमजोर करती थी

अपनी किताब में सरदेसाई ने मोदी की तुलना इंदिरा से करते हुए कहा है कि दोनों ही विपक्ष को कमजोर करने के समर्थक रहे हैं

मोदी के मंत्रियों के घर में लगे खुफिया कैमरे

मोदी के मंत्रियों के घर में लगे खुफिया कैमरे

सरदेसाई ने किताब में लिखा है कि हर मंत्रियों को नहीं पता है कि उनके किस कमरे में खुफिया कैमरे लगे हैं।

राजनीति में विफल रहे राहुल

राजनीति में विफल रहे राहुल

किताब में राहुल गांधी कि विफलता का जिक्र किया गया है। राहुल गांधी की असफलता के चलते कांग्रेस के सहयोगी उनका सम्मान नहीं करते।

कांग्रेस को गांधी परिवार से इतर सोचना होगा

कांग्रेस को गांधी परिवार से इतर सोचना होगा

सरदेसाई ने लिखा है कि गांधी परिवार को अब कांग्रेस को उपर उठाने के बारे में सोचना होगा। अभी भी कांग्रेस में पूंजी और दायित्व मौजूद है।

सरदेसाई अपनी पत्रकारिता के जरिए हमेशा से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के के नकारात्मक पहलुओं को लोगों के सामने लेकर आते रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिका में मोदी समर्थकों की राजदीप सरदेसाई से हाथापाई तक हो गयी थी। लेकिन इस बार सरदेसाई ने अपनी किताब में नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की है। किताब में सरदेसाई ने राहुल गांधी की विफलता को भी दर्शाया है।

किताब में सरदेसाई ने पीएम मोदी के उनके मंत्रियों और विपक्षियों में व्याप्त भय की चर्चा की गयी है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार के एक मंत्री ने उन्हें (सरदेसाई) अपने घर में प्रवेश करने के लिए पिछले दरवाजे से आने के लिए कहा। इस मंत्री ने यह भी कहा कि वे अपने मुख्य हॉल में नहीं, बल्कि आवास के पीछे बगीचे में बात करेंगे। किताब में मंत्री के हवाले से कहा गया है, "इन दिनों यह जान पाना कठिन है कि किसके किस कमरे में खुफिया कैमरे लगे हैं।"

किताब के अनुसार, मोदी सरकार में कैबिनेट और अन्य मंत्रियों की सूची मोदी के विश्वासपात्र अरुण जेटली और अमित शाह ने बनाई थी और उसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उसे देखी थी। किताब में कहा गया है, "विभागों के बंटवारे सहित सूची को अंतिम रूप प्रधानमंत्री ने खुद दिया था। सरदेसाई के अनुसार, मोदी ने निस्संदेह जेटली पर भरोसा किया, जो आज वित्त और रक्षा मंत्री दोनों हैं, लेकिन सुषमा स्वराज पर भरोसा नहीं किया, जो विदेश मंत्रालय देखती हैं।

किताब के अनुसार, "यह भी बात थी कि मोदी ने स्मृति ईरानी को अहम पद (मानव संसाधन मंत्रालय) इसलिए दिया, क्योंकि वह सुषमा को एक संदेश देना चाहते थे कि भाजपा में सिर्फ वही महिला चेहरा नहीं हैं।" किताब में कहा गया है, "जेटली और कुछ अन्य को छोड़कर अपने बाकी कैबिनेट सहयोगियों की क्षमताओं से मोदी संतुष्ट नहीं थे।"

मोदी के ठीक विपरीत राहुल गांधी ऐसा कोई गुण नहीं दिखा पाए, जो उन्हें एक नेता के रूप में मान्यता दे और एक संघर्षरत पार्टी को उबार सके। किताब के अनुसार, "नेहरू-गांधी परिवार के शायद वह पहले सदस्य हैं, जिनके प्रति उनकी खुद की पार्टी के लोग सम्मान नहीं रखते।" सरदेसाई के अनुसार, अकेले वंशवाद कांग्रेस को जिंदा नहीं रख पाएगा, यद्यपि गांधी परिवार के पास एक पूंजी और एक दायित्व दोनों मौजूद है।

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