इतिहास के पन्नों से- आओ चलें स्वामी विवेकानंद से लेकर नेताजी के कालेज में
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भारत के पहले राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद, अर्मत्य सेन, सत्यजीत राय और हिन्दी फिल्मों के बेजोड़ अभिनेता अशोक कुमार में क्या समानता है?
अगर आपको इस सवाल का जवाब मालूम नहीं तो हम आपको बताते हैं कि ये सभी कोलकाता के प्रेसिडेंसी कालेज से पढ़े। इसमें पढ़ते हुए इनकी सोच का विस्तार हुआ। [इतिहास के पन्नों से- जेएनयू जाने वाली बस नंबर 615]
सोच का विस्तार
ये आगे चलकर देश-दुनिया के अपने-अपने क्षेत्रों की महान हस्तियां बने। जाहिर है, इन पर प्रेसिडेंसी कालेज को गर्व होगा। शायद ही देश में कोई दूसरा शिक्षण संस्थान हो जिसने इस तरह के महान छात्र निकाले हों।
1817 में स्थापित
इस कालेज की स्थापना सन 1817 में हुई थी। पहले इसका नाम हिन्दू कालेज होता था। बेशक ये देश के सर्वश्रेष्ठ कालेजों में एक रहा और अब भी इसका कोई सानी नहीं है। इसकी फैकल्टी के बारे में कहा जाता है कि यहां पर देश के सबसे काबिल टीचर पढ़ाते हैं।
और भी दिग्गज
उक्त विभूतियों के अलावा हिन्दी फिल्मों के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर प्रीतम, अपर्णा सेन, स्वाधीनता सेनानी बंकिम चंद्र चटर्जी वगैरह भी इधर ही पढ़े। पाथेर पांचली जैसी महान फिल्म बनाने वाले सत्यजीत राय ने यहां से इक्नोमिकस में बीए आनर्स की डिग्री ली। वे यहां के बेहतरीन विद्यार्थियों में से थे। वे आगे चलकर फिल्मों की दुनिया से जुड़े।
अर्मत्य सेन का कालेज
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्मत्य सेन ने भी इधर 1949 में दाखिला लिया। वे अब भी बड़े फख्र से बताते हैं कि वे प्रेसिडेंसी कालेज के छात्र रहे। वे इधर आते रहते हैं। अगर बात नेताजी सुभाष चंद्र बोस करें तो वे इधर साल 1913 में पढ़ने के लिए आए। वे भी बेहद मेधावी छात्र रहे। वे तो देश के महानत स्वाधीनता सेनानी माने जाते हैं।
स्वामी विवेकानंद ने इधर साल 1879 में दाखिला लिया। उनके बारे में कुछ भी लिखना सूरज को दीया दिखाने के समान ही होगा। उनका असली नाम नरेन्द्र नाथ दत्ता था। बेशक, उम्मीद करनी चाहिए कि कोलकाता का प्रेसिडेंसी कालेज आगे भी बेहतरीन छात्र देश को देता रहेगा।













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