Positive India: डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने उठाये बड़े कदम
Positive India: देश का शायद ही कोई सरकारी अस्पताल होगा, जहां प्रशासनिक लापरवाही से मरीजों की मौत नहीं हुई हो! क्या हर बार वजह लापरवाही ही होती है? ऐसा नहीं है। कई बार डॉक्टरों के समय से नहीं पहुंच पाने के कारण या फिर डॉक्टरों के उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण भी मरीज दम तोड़ देते हैं।
सच पूछिए तो यह एक बड़ा संकट है, जिससे उबरना बेहद जरूरी है। और शायद इस बात को केंद्र सरकार ने समझ लिया है। इसीलिये देश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की ओर सकारात्मक कदम उठाये हैं।
हमारे देश में 12वीं पास करने के बाद ही छात्र या छात्रा मेडिकल की प्रवेश परीक्षा देने के लिए योग्य हो जाता है लेकिन मेडिकल कॉलेजों में उतनी सीट नहीं जितने परिक्षार्थी एग्जाम देते हैं, जिसके कारण प्रवेश परीक्षा काफी टफ होने लगी है। इस कारण अब बच्चों का रूझान इस प्रवेश परीक्षा के प्रति कम होने लगा है।
कोचिंग संस्थानों के सर्वे में चिंताजनक बात
उनके दिमाग में यह बात बैठ गयी है कि इस एग्जाम के लिए मेहनत और वक्त व्यर्थ करने से अच्छा है कि हम अच्छा और बेहतर विकल्प तलाशे क्योंकि मेडिकल सीट काफी कम है और बच्चे बहुत ज्यादा, यह बात कोचिंग संस्थानों के सर्वे में निकल कर सामने आयी है।
मेडिकल कॉलेजों की संख्या बहुत कम
देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बहुत कम है, जिसके कारण सीटों की कमी हैं और इस कारण बच्चे अब इस ओर आने में हिचक रहे हैं। इस वजह से इस क्षेत्र में नये लोगों की रूचि कम हो रही है जो कि एक चिंताजनक बात है।
मनचाही नौकरी नहीं मिल रही
तीसरा बड़ा कारण यह है कि जिन छात्र/छात्राओं को कड़ी मेहनत से मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में मिलता है उन्हें पांच साल की पढ़ाई और एक साल के हाउस जॉब के बाद भी मनचाही नौकरी नहीं मिल रही है। जिसके कारण लोग इस क्षेत्र में आने से हिचक रहे हैं।
डॉक्टर को नौकरी शहर में, चाहिए ना कि गांव में
हर डॉक्टर को नौकरी शहर में, चाहिए ना कि गांव में। इसके कारण गांवों और कस्बों में डॉक्टरों की कमी हो रही है। कुछ साल पहले उत्तराखंड सरकार ने डॉक्टरों को एग्रीमेंट पॉलिसी बनायी थी जिसके तहत डॉक्टरों को पांच साल तक पर्वतीय इलाकों में नौकरी करनी थी वरना उन्हें लाइसेंस नहीं मिलता लेकिन इस बात पर इतना विरोध हुआ कि सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
नौ लाख अठारह हज़ार डॉक्टर
हालांकि हालात आज भी काफी खराब है, बीबीसी की खबर के मुताबिक देश की सवा अरब की आबादी पर सिर्फ़ नौ लाख अठारह हज़ार डॉक्टर हैं।
देश में चार लाख डॉक्टरों की और ज़रूरत
- भारत सरकार के मुताबिक देश में चार लाख डॉक्टरों की और जरूरत है।
- देश में सबसे ज्यादा डॉक्टरों की संख्या महाराष्ट्र और तमिलनाडु में है जबकि बिहार और बंगाल में इनकी सबसे ज्यादा कमी है।
- वैसे देश में नौ लाख से डॉक्टर पंजीकृत हैं लेकिन देश में काम करने वाले डॉक्टरों की संख्या सिर्फ छह से साढ़े छह लाख ही है।
- बीबीसी के मुताबिक भारत में औसतन 1217 लोगों पर मात्र एक डॉक्टर हैं।
- देश में फिलहाल एमबीबीएस की 56638 और पोस्ट ग्रेजुएट की 25346 सीटें ही उपलब्ध हैं।
सरकार ने उठाये बड़े कदम
- इन चिंताजनक आंकड़ों के कारण देश के स्वास्थ्य महकमे ने अब वाजिब कदम उठाया है और उसने कुछ अच्छे फैसले किये हैं।
- देश में करीब 50 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है।
- सभी एमडी/एमएस विषयों में शिक्षक और छात्र अनुपात 1:1 से बढ़ाकर 1:2 कर दिया गया है और अनेस्थिसियोलॉजी, फॉरेंसिंक मेडिसन, रेडियोथेरेपी, मेडिकल आंकोलोजी विषयों में यह अनुपात 1:1 से बढ़ाकर 1:3 किया गया है।
- शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए डीएबी योग्यता को फैकल्टी के रूप में नियुक्ति हेतु मान्यता दी गई है।
- एमबीबीएस स्तर की अधिकतम भर्ती क्षमता को बढ़ाकर 150 से 250 कर दिया गया है।
- मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक/डीन/प्रिंसिपल/निदेशक के पदों के लिए नियुक्ति/विस्तार/पुनर्नियुक्ति के लिए आयु सीमा 65 से बढ़ाकर 70 कर दी गई है।
- भूमि, फैकल्टी, कर्मचारी बिस्तर/बिस्तर संख्या और अन्य अवसंरचना की जरूरत के रूप में मेडिकल कॉलेजो की स्थापना के लिए मानदंडों में छूट दी गई है।
- नए पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को शुरू करने/पोस्ट ग्रेजुएट सीटों को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों में निधि की हिस्सेदारी बढ़ाकर 75:25 कर दी गई है।
- देश के कम सेवा उपलब्ध जिलों में जिला/रैफरल अस्पतालों के उन्नयन द्वारा नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए पूर्वोत्तर/विशेष श्रेणी के राज्यों में अनुपात 90:10 किया गया है जबकि अन्य राज्यों में यह अनुपात 75:25 है।
- पूर्वोत्तर/विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में केंद्र सरकार और राज्यों में धन की हिस्सेदारी के साथ एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों के सुदृढ़ीकरण/उन्नयन के लिए प्रति एमबीबीएस के लिए ऊपरी सीमा बढ़ाकर 1.2 करोड़ रुपये कर दी गई है।
पॉजिटिव इंडिया
अगर वाकई में केन्द्र सरकार की यह योजनाएं क्रियान्वित होती हैं तो देश में डॉक्टरों की कमी नहीं होगी और इसकी वजह से दुनिया के सबसे नोबेल प्रोफेशन में आने से लोग घबरायेंगे नहीं क्योंकि जिनके हाथों में हम अपनों का जीवन सौंपते हैं उन्हें भी तो एक सेक्योर लाइफ चाहिए।
लाइफ-लाइन देने वाले को संजीवनी की जरूरत
जिस दिन उनके दिल-दिमाग में यह बात बैठ जायेगी कि वो सेफ जोन में हैं उस दिन से उनकी सर्विस वाकई में मानवता में तब्दील हो जायेगी वो वाकई में भगवान के दूत बन जायेंगे जो लोगों को सिर्फ और सिर्फ जीवनदान देंगें..वो भी एक मधुर मुस्कान के साथ.. लेकिन पहले उन्हें भी संजीवनी की जरूरत है।
Positive India: दिमाग करो स्वच्छ, साफ हो जायेगा इंडिया













Click it and Unblock the Notifications