Pakistan: पाकिस्तान में हो गया सत्ता का बंटवारा: शाहबाज पीएम तो जरदारी प्रेसिडेंट!
Pakistan: पाकिस्तान में 8 फरवरी को हुए आम चुनाव में किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला। इसलिए जोड़ तोड़ की सरकार ही वहाँ बन रही है। 13 फरवरी को देर शाम पीएमएल एन और पीपीपी के बीच यह सहमति बन गई कि दोनों मिल कर सत्ता में भागीदारी करेंगे।
अभी तक जो मामले तय हुए हैं, उसके अनुसार शाहबाज शरीफ वजीर ए आजम बनेंगे तो आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान के नए सदर चुने जाएंगे। यानि 18 महीने सरकार चला चुकी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) फिर से हुकूमत में आएगा, भले ही इस बार गठबंधन में कुछ नए चेहरे शामिल हों।

पीपीपी के नेता आसिफ अली जरदारी ने इस नए समीकरण के बनने के बाद मीडिया में आकर कहा कि "हमने एक साथ बैठने और सरकार बनाने का फैसला किया है। ईश्वर ने चाहा तो हम पाकिस्तान को मुश्किल से बाहर निकाल लेंगे।"
किसी को बहुमत नहीं
पिछले हफ्ते, नेशनल असेंबली चुनावों में पीटीआई समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवारों की संख्या 93 पर आकर अटक गई। सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 134 सीटों की आवश्यकता है। पीएमएल-एन के 79 एमएनए जीत कर आए हैं तो पीपीपी के 54। इसके अलावा भी कई पार्टियों ने अपना समर्थन पीएमएल-एन को देने का ऐलान कर दिया है।
इमरान खान अभी भी जेल में है और उनके साथ कोई और पार्टी इस समय सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं है। वक्त का फायदा उठाते हुए पीपीपी और पीएमएल-एन ने केंद्र और सूबों में अपनी सरकार बनाने का दांव खेल दिया है। पंजाब में नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज चीफ मिनिस्टर बनने जा रही है, जबकि बलूचिस्तान में पीपीपी अपना सीएम बना रही है। हालांकि पीटीआई पंजाब में मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन के साथ गठबंधन की घोषणा कर चुकी है, लेकिन फिलहाल इसका कोई फायदा इमरान खान को नहीं होने वाला है।
नई सरकार के सामने चुनौतियों का अंबार
पाकिस्तान में बन रही नई सरकार के एजेंडे में देश को कर्ज के दलदल से निकालने और अब तक ले चुके कर्ज की अदायगी के लिए नए संसाधन जुटाना सबसे प्रमुख लक्ष्य है। पहली चुनौती अर्थव्यवस्था है, जिसे पटरी पर लाना कठिन कार्य है। इस समय पाकिस्तान बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां महंगाई का असर गरीबों पर पड़ रहा है और आर्थिक संकट गहरा रहा है।
2023 पाकिस्तान के लिए एक ऐसा वर्ष था जब राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में रोज नए संकट देखे गए। आर्थिक संकट एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गया है जहां शहरी उच्च वर्ग के नागरिकों को भी परेशानी महसूस होने लगी है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के कैलेंडर वर्ष के दौरान कीमतें लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गईं। बढ़ती मुद्रास्फीति ने जीवन-यापन के संकट को बढ़ा दिया है।
अगली सरकार को आईएमएफ के साथ शीघ्रता से बातचीत करनी होगी क्योंकि स्टैंड-बाय व्यवस्था मार्च में समाप्त हो जाएगी। आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को अपनी भारी विदेशी ऋण देनदारियों को पूरा करने के लिए इसकी तत्काल आवश्यकता है। शेयर बाजार में लगातार गिरावट और पाकिस्तान के सॉवरेन डॉलर बांड में कमजोरी भी बड़ी चुनौती होगी।
क्यों चूके नवाज
कहा जा रहा है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सुप्रीमो नवाज शरीफ ने खुद अपने छोटे भाई शाहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित किया है। अभी तक तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पद को संभाल चुके नवाज शरीफ चौथी बार क्यों चूक गए, इसे लेकर तरह तरह की कहानियाँ सामने आ रही हैं।
उनके प्रधानमंत्री ना बनने की सबसे बड़ी वजह उनकी बेटी मरियम नवाज को बताया जा रहा है। चूंकि मरियम को पंजाब का सीएम बनाया जा रहा है, इसलिए नवाज नहीं चाहते थे कि अवाम में यह संदेश जाए कि बाप बेटी मिलकर सत्ता हथियाने में लगे हैं। चूंकि पंजाब में पीएमएल-एन को लगभग पूर्ण बहुमत हासिल हो चुका है, इसलिए वहाँ की सरकार केंद्र से ज्यादा स्थिर होगी और नवाज शरीफ पीछे से सरकार को पूरे पाँच साल चला सकते हैं।
पंजाब असेंबली में कुल 371 सीटें है, सरकार बनाने के लिए किसी एक पार्टी या गठबंधन को 186 चुने हुए सदस्यों का समर्थन चाहिए। कुछ जीते आजाद उम्मीदवारों के पीएमएल-एन में शामिल होने के बाद यह संख्या मरियम को हासिल हो गई है। अभी तक मरियम नवाज किसी बड़े ओहदे पर नहीं रही हैं, उनको नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते उनके साथ काम करने का अनुभव है।
पीपीपी को ऐतराज के बदले राष्ट्रपति पद
नवाज शरीफ के पीएम न बनने के पीछे एक और कारण यह बताया जा रहा है कि उनको लेकर बिलावल भुट्टो को ज्यादा एतराज है। वह नवाज शरीफ के साथ कैबिनेट में बैठने के लिए तैयार नहीं थे। तभी उन्होंने पहले यह ऐलान किया कि पीपीपी बाहर से समर्थन देगी। बाद में शाहबाज शरीफ और जरदारी की मीटिंग के बाद यह तय किया गया कि नवाज शरीफ पीएम नहीं बनेंगे और फिर पीपीपी सरकार में शामिल होने के लिए तैयार हो गई।
पाकिस्तान में इसी माह राष्ट्रपति का भी चुनाव होने वाला है और इस बात का संकेत दे दिया गया है कि आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेंगे। वह एक बार पहले भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। पीएमएल-एन और पीपीपी के साथ आने के बाद जरदारी के लिए सदर बनना आसान हो गया है। उम्मीद यही है कि जरदारी ही नई सरकार को शपथ दिलाएंगे। पाकिस्तान में नई सरकार का गठन 26 फरवरी को होने की संभावना है।
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