Afghan Refugees: पाकिस्तान और ईरान ने अफगान शरणार्थियों का जीना किया मुहाल
इन दिनों पाकिस्तान और ईरान में रह रहे अफगान शरणार्थियों की जिंदगी नरक बनी हुई है। पाकिस्तान और ईरान के शासक अफगानियों को अपने देश से जबरन निकाल रहे हैं और अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार उन्हें लेने को तैयार नहीं हैं। खास कर उन अफगानियों के लिए कोई ठिकाना नहीं है, जिनके पास अपना कोई पहचान पत्र नहीं है।
ऐसे लोगों की संख्या 5 लाख से अधिक है। एक तरफ पाकिस्तान अरबों डॉलर अफगान शरणार्थियों को पालने के नाम पर ले रहा है और दूसरी तरफ ग़रीब अफगानियों पर जुल्म भी कर रहा है। पाकिस्तान ने यह पहले ही घोषणा कर दी है कि 31 अक्टूबर तक सभी गैर पंजीकृत शरणार्थियों को वह देश से निकाल देगा।

बार बार उजड़ते रहे हैं अफगानी
लाखों अफगानी पिछले चार दशक से पाकिस्तान और ईरान में शरण लिए हुए हैं। अफगानी एक बार नहीं चार-चार बार वतन बदर हुए हैं। पहले अफगानिस्तान पर सोवियत के कब्जे के समय, फिर अमेरिकी फ़ोर्स आने के बाद, तालिबान और अमेरिका के बीच चले युद्ध के समय और अब पुनः तालिबान के शासन आने के बाद। डॉन अख़बार ने 4 साल की उम्र में पाकिस्तान आ गए 40 वर्षीय अफगानी फल विक्रेता फ़ज़ल अहमद की प्रतिक्रिया इन शब्दों में लिखी है, "मैं खुद को पाकिस्तानी मानता हूं क्योंकि मैं कभी अफगानिस्तान वापस नहीं गया, लेकिन अब हम डर के दिन गिन रहे हैं '।
पाकिस्तान ने कुछ ही सामान के साथ अफ़ग़ान शरणार्थी को सीमा पार जाने की अनुमति दी है। यानी इतने दिन उन्होंने जो भी कमाया है सब छोड़ कर जाना पड़ रहा है। जबरन भेजे जाने वाले इसी बात पर आंसू बहा रहे हैं। "हमारा पैसा यहीं फंसा हुआ है। हमारी जीवन भर की सारी कमाई और बचत यहीं फंसी हुई है। हमने यहां कारोबार स्थापित किया है, लेकिन उन्हें कोई परवाह नहीं है,' ऐसी शिकायत करने वाले हज़ारों अफगानी हैं।
करोड़ों डॉलर की सहायता प्राप्त कर रहा है पाकिस्तान
यह जानना जरुरी है कि पाकिस्तान अफ़ग़ान शरणार्थियों के भरण पोषण के नाम पर करोड़ों डालर की सहायता प्राप्त कर रहा है। केवल अमेरिका 2002 से अभी तक 273 मिलियन डॉलर (लगभग 62 अरब रुपये) से अधिक सहायता प्रदान कर चुका है। पिछले वर्ष 2022 में अमेरिका ने लगभग 60 मिलियन डॉलर (13 अरब रुपये से अधिक) की सहायता प्रदान की थी।
पाकिस्तान की पुलिस की निर्दयता
पाकिस्तान की पुलिस पिछले कई दिनों से छापेमारी कर रही है। सीमा पर महिलाओं के साथ भी ज्यादती हो रही है। गर्भवती महिलाओं और विकलांगों को भी नहीं बख्सा जा रहा है। गिरफ्तारी के डर के कारण सीमा पर भीड़ इकट्ठा होती जा रही है। पाकिस्तानी अधिकारी किसी का भी अपमान करने से नहीं चूकते। अफगानिस्तान और ईरान में बिना दस्तावेज वाले विदेशियों की वापसी में तेजी लाने के लिए कई क्रॉसिंग पॉइंट खोले गए हैं। अकेले पंजाब से 33,000 अवैध रूप से रह रहे अफ़ग़ानियों की पहचान की गई है। 16,000 से अधिक अफगान पहले ही चमन सीमा के माध्यम से अफ़ग़ानिस्तान में भेज दिए गए हैं। पूरे पाकिस्तान में 99,000 अवैध अप्रवासियों की पहचान की गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पाकिस्तान में लगभग 1.3 मिलियन अफगान पंजीकृत शरणार्थी हैं।
आतंकवाद के लिए अफ़ग़ानियों को दोषी मानता है पाकिस्तान
पाकिस्तान का यह कहना है कि अवैध रूप से रह रहे अफगानी ही उनके यहां आतंकवाद के लिए जिम्मेदार हैं। पिछले कुछ समय में ही पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में 24 आत्मघाती बम विस्फोट हुए, जिनमें से 14 में अफगान नागरिकों के रूप में हमलावरों की पहचान की गई। उन हमलों में दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक और अधिकारी भी मारे गए।
पाकिस्तान की सरकार और सेना भी लगातार कहती रही है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार सीमा के पार से हमले की साजिश रचने वाले आतंकवादियों पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं कर रही है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ भी यह कह चुके हैं कि "पाकिस्तान में आतंकवादी कृत्यों में अफगान नागरिकों की संलिप्तता चिंताजनक है और इसे तत्काल संबोधित करने की आवश्यकता है '। अफगानिस्तान में टीटीपी के लिए उपलब्ध सुरक्षित पनाहगाहों पर तत्काल कार्रवाई चाहता है पाकिस्तान।
ईरान से भी अफगानी बाहर किए जा रहे हैं
तेहरान ने हाल ही में उन लाखों अफ़गानों को बाहर निकालने की कसम खाई थी, जो वहां कथित रूप से अवैध रह रहे हैं। दशकों से, युद्ध, उत्पीड़न और गरीबी से भाग कर लाखों अफगानों ने ईरान में शरण ली है। 27 सितंबर की घोषणा के बाद से ही ईरान में बड़े पैमाने पर अफगान समुदाय के सदस्यों के खिलाफ उत्पीड़न की कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो साझा किए गए हैं जिसमे लाठियों से लैस ईरानी पुरुषों और लड़कों के एक समूह द्वारा अफगानों के घरों पर हमला करते हुए दिखाया गया है। कुछ ईरानी नागरिकों के समूहों द्वारा अफ़गानों की पिटाई करते हुए भी दिखाया गया है।












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