Crimes against Women: लिव इन में महिलाओं पर बढ़ते अपराध, जानें साइकोलॉजिस्ट और सीनियर एडवोकेट की राय
Crimes against Women: बीते कुछ महीनों से लिव-इन रिलेशनशिप बेहद चर्चाओं में है। दरअसल एक के बाद एक ऐसे हत्याकांड सामने आये हैं जहां लिव इन में रह रही महिला को उसके पुरुष पार्टनर ने जान से मार दिया। इसमें श्रद्धा, निक्की और सरस्वती जैसी तमाम लड़कियां हैं जिनकी उनके ही पार्टनर ने हत्या कर दी।
गौरतलब है कि इन सभी लड़कियों को न सिर्फ बेरहमी से मारा गया बल्कि उन्हें शवों के साथ भी अमानवीय तरीके से छेड़छाड़ की गयी। हैवानियत के इस पूरे क्रम में आपको जानना जरुरी है कि यह कौन सी मानसिकता है जिसके चलते ऐसे हत्याकांड बार-बार सामने आ रहे है। साथ ही लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे पार्टनर्स कैसे कानूनी तौर पर अपने को सुरक्षित कर सकते है।

अभी तक के चर्चित हत्याकांड
अभी हाल ही में मुंबई की सरस्वती वैद्य (32) को उनके लिव इन पार्टनर मनोज (56) ने निसृंश तरीके से मार दिया। पुलिस को इसकी जानकारी दो दिन बाद मिली। मनोज ने सरस्वती की हत्या कर उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिये। पुलिस से बचने के लिये वह उन टुकड़ों को कुकर में उबालकर बाहर फेंकता रहा।
कुछ महीनों पहले दिल्ली का श्रद्धा वॉकर हत्याकांड चर्चा में रहा। 18 मई 2022 को श्रद्धा (27) के बॉयफ्रेंड आफताब पूनावाला ने उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। अफताव ने श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े किये थे। श्रद्धा महाराष्ट्र की रहने वाली थी और अपने प्रेमी के साथ दिल्ली में काफी समय से लिव-इन में रह रही थी।
इसी साल 14 फरवरी को दिल्ली में निक्की यादव की हत्या कर दी गयी। निक्की के बॉयफ्रेंड साहिल गहलोत ने उसकी हत्या कर शव को फ्रिजर मे रख दिया था। हालांकि, साहिल जब निक्की की लाश को ठिकाने लगाता, उससे पहले पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
मानसिक तौर पर फिट नही होते ऐसे अपराधी
इस बारे में साइकलॉजिस्ट डॉ. अनामिका पापडीवाल का कहना है कि सामान्य इंसान इस तरीके के अपराध के बारे में नही सोचता। ऐसे जघन्य अपराध करने वाले मानसिक रोगी होते हैं। दरअसल, मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति को लड़कियों को टॉर्चर करने का ख्याल आएगा। किसी के साथ क्रूरता करने या किसी को दर्द पहुंचाने पर खुशी मिले तो यह एक तरीके का मनोरोग है। इससे पीड़ित व्यक्ति को किसी का रेप कर, घायल कर या हत्या कर, मारपीट या अन्य तरीके से टॉर्चर करने में खुशी मिलती है। वहीं उकसाने वाले कटेंट और क्राइम पर बनी वेब सीरीज भी ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती हैं। इससे महिलाओं के खिलाफ अत्याचार भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे है।
मेंटल ट्रीटमेंट जरुरी
डॉ. अनामिका पापडीवाल कहती है कि एक दिन में कोई अपराधी नही बनता, ऐसे लोग समय समय पर छोटी-मोटी गतिविधियां करते रहते हैं। लेकिन वे यह बात बताते नहीं है। यही वजह है कि बाद में चलकर ये लोग किसी बड़ी वारदात को अंजाम देते हैं। मानसिक रोगी कानून और इमोशंस के बारे में सोचने में सक्षम नहीं होते। इसलिए जरूरी है कि ऐसे लोगों की मेंटल हेल्थ का भी इलाज किया जाये। वहीं इनके पेरेंट्स से भी बात करनी चाहिए ताकि उनके बच्चों में होने वाली ये मानसिक परेशानी का सही इलाज किया जा सके। बच्चों के मानसिक विक्षिप्तता के तार उनके बचपन या किसी पुरानी यादों, लगातार किसी अग्रेसिव कंटेट के सपंर्क में रहने से हो सकते हैं। इसीलिए पेरेंटस से इस विषय पर बात करना बहुत जरूरी हो जाता है।
प्री-मैरिटल कॉन्ट्रेक्ट एक उपाय
राजस्थान हाईकोर्ट में महिला सीनियर एडवोकेट प्रदीप लता माथुर का कहना है कि देश में हर जगह ऐसी वारदातें बढ़ती जा रही हैं। देखने में आया है कि ज्यादातर केस लिव इन रिलेशनशिप के हैं। इसलिए लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लड़की या लड़के को अपने परिवार, दोस्तों आदि के साथ संपर्क में रहना चाहिए। ताकि वे किसी बात से परेशान है तो उनसे सलाह ले सकें। अगर लड़के-लड़कियां एक-दूसरे को जानने के लिए लिव इन में रहना चाहते हैं तो उन्हें प्री-मैरिटल कॉन्ट्रेक्ट करना चाहिए। जिसमें सब कुछ लिखा हो और कोई भी किसी का अनुचित लाभ न उठा सके। वहीं महिलाओं को सशक्त होने की बहुत जरुरत है जिससे महिलाएं खुलकर घरेलू हिंसा पर आवाज उठा सकें।












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