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North Korea and Russia: कैसी रही पुतिन-किम जोंग की मुलाकात

North Korea and Russia: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग की बुधवार को मुलाकात हुई। दोनों राष्ट्र प्रमुखों के बीच द्विपक्षीय और डेलीगेशन लेवल की बैठक के बाद पुतिन ने किम जोंग के स्वागत और सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित किया। डक सलाद, फिश सूप, मशरूम-आलू, मार्बल्ड बीफ, कंडन्स्ड मिल्क और नट्स जैसे व्यंजनों वाले डिनर के दौरान भी दोनों नेताओं की गर्मजोशी दिखी। किम जोंग ने यूक्रेन का नाम लिए बिना रूस को सैन्य कार्रवाई में जीत की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बुराई के खिलाफ अपने सैन्य अभियान में निश्चित तौर पर रूस की जीत होगी।

किम जोंग ने पुतिन को उत्तरी कोरिया आने का भी न्योता दिया।

वहीं, पुतिन ने इस मौके पर महज औपचारिक खुशी जताई। उन्होंने सैटेलाइट-रॉकेट लॉन्चिंग में मदद के सवाल पर कहा कि हम इसीलिए स्पेस सेंटर में मिल रहे हैं और हमारे पास बहुत समय है। हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बाद में दोनों नेताओं के बीच लगभग 5 घंटे की मुलाकात में मिलिट्री को-ऑपरेशन को लेकर चर्चा होने और फिलहाल किसी दस्तावेज पर दस्तखत नहीं किए जाने की जानकारी दी।

North Korea and Russia relation How was Putin-Kim Jongs meeting?

रूस और उत्तरी कोरिया का लव हेट रिलेशनशिप

पुतिन और किम जोंग के मुलाकात के बाद दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस विरोध के बावजूद उत्तरी कोरिया से रिश्ते मजबूत करता रहेगा। क्योंकि हम पड़ोसी हैं। बहरहाल, पड़ोसियों के साथ रिश्ते को भारतीय लोगों से बेहतर कौन समझ सकता है। रूस और उत्तरी कोरिया में कमोबेश भारत का पाकिस्तान और चीन के साथ जैसा ही रिश्ता है। और यूएनएससी में रूस भी उत्तरी कोरिया को लेकर अपने पक्ष पर अडिग है। हालांकि, दोनों देशों ने फिर से दावा किया है कि यह मसला उनके रिश्तों और द्विपक्षीय साझेदारी के बीच आड़े नहीं आएगा।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञों के मुताबिक रूस से उत्तरी कोरिया की हालिया नजदीकी की बड़ी वजह अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच लगातार चलने वाला सैन्य अभ्यास है। पूर्वोत्तर एशिया में और अधिक खटास और विभाजन के हालात पैदा करने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास से दोनों देश आशंकित हैं। किम जोंग इसी प्रमुख वजह से अपनी बहन किम यो जोंग के साथ खानदानी प्राइवेट ट्रेन से करीब 20 घंटे का सफर कर पुतिन से मिलने रूस के व्लदिवोस्तोक शहर पहुंचे थे। रूस के पूर्व नेता जोसेफ स्टालिन ने इस ट्रेन को 1949 में किम जोंग उन के दादा किम इल संग को तोहफे में दिया था। तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को झेल रहे दोनों देश के नेताओं की मुलाकात का एक बड़ी बात यह भी है कि पुतिन और किम जोंग अपने देश से बेहद कम बाहर निकलने को लेकर दुनिया भर में मशहूर हैं।

किन हालात में हैं डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया

डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया यानी उत्तरी कोरिया की मौजूदा हालत बेहतर नहीं कही जा सकती। प्योंगयांग में बैठकर किए जाने वाले तानाशाह किम जोंग उन के फैसले देश की सेहत सुधार नहीं पा रहे। मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर में अलग-थलग पड़े और दुनिया के सबसे गरीब और सबसे कम विकसित देशों में से एक उत्तरी कोरिया की हालत किसी से छिपी नहीं है। किम जोंग उन के निरंकुश तानाशाही राज में उत्तर कोरिया की आम जनता मानवाधिकारों के हनन समेत तमाम तरह की पाबंदियां झेल रही है। वहां के लोग बाहरी दुनिया से किसी तरह का संपर्क नहीं कर सकते। सूचना और समाचार के मामले में उत्तर कोरिया एक कथित ब्लैकहोल बन चुका है। गरीबी का आलम यह है कि आम परिवार ढंग से खाना नहीं खा पाता।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन बाजारों से उत्तरी कोरिया के लोग अपना खाना खरीदते हैं, वो अब लगभग खाली हो चुके हैं। चावल, मक्के और मसालों की कीमतें आसमान छू रही हैं। उत्तर कोरिया इतना अनाज नहीं उगा पाता कि अपने लोगों का पेट भर सके। दूसरे देशों से आयात के भरोसे उत्तर कोरिया के तानाशाह ने अपने देश की सीमाएं सील कर लोगों के लिए अनाजों की आपूर्ति रोक दी। इसके चलते खेती के लिए जरूरी खाद और मशीनरी भी आनी बंद हो गईं। उत्तरी कोरिया में पुरुषों के लिए सरकारी नौकरी करना अनिवार्य है, लेकिन उन्हें बेहद मामूली सैलरी मिलती है। इससे परिवार का गुजारा नहीं हो सकता। इसीलिए घर चलाने के लिए महिलाएं दोहरी मार झेलती हैं।

हथियार, परमाणु आशंकाएं और गीदड़ भभकियों के अलावा किम जोंग के पास दुनिया को देने के लिए फिलहाल कोई बड़ी चीज नहीं है। इस पर भी तुर्रा ये कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रमों की वजह से उस पर लगाए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रतिबंधों के तहत हथियारों की खरीद-बिक्री पर रोक है। उत्तरी कोरिया पर लगाए इन प्रतिबंधों में रूस की रजामंदी भी पूरी तरह से शामिल थी।

महानता के दावे करते रूस का मौजूदा कड़वा सच

विदेश नीति में रूसी राजनयिकों की अहम भूमिका वाला समय अब पूरी तरह बदल गया है। पुतिन ने जबसे यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की है, रूस के राजनयिकों ने अपनी अहमियत खो दी है। दुनिया भर में उनकी भूमिका क्रेमलिन के आक्रामक बयान को हवा देने भर की रह गई है। नाटो की दबिश, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, अमेरिका से दुश्मनी और यूक्रेन के साथ लंबा खींच रहा संघर्ष रूस की आर्थिक सेहत के लिए भारी पड़ता जा रहा है। सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन क्लीन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक अध्ययन के अनुसार, प्रतिबंधों के कारण मॉस्को को हर दिन क़रीब 175 अरब डॉलर का नुक़सान हो रहा है। दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले रूस की हालत चरमरा गई है। राष्ट्रपति पुतिन की माली हालत को कमजोर करने के लिए पश्चिम ने रशियन सेंट्रल बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार का 324 अरब डॉलर फ्रीज कर दिया था। रूस में महंगाई की दर 13.4 फीसदी तक पहुंच गई है। इसके बाद रूस के केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ गई।

सितंबर की शुरुआत में चीन ने अपना एक नया नक्शा जारी कर दुनिया के कई देशों को आपत्ति करने पर मजबूर कर दिया था। चीन की इस घटिया हरकत पर भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपीन्स, नेपाल और ताइवान ने कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन रूस चुप था। चीन ने उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित विवादित बोल्शोई उस्सुरीस्की द्वीप को भी पूरा अपने नक्शे में शामिल कर लिया, जबकि इस द्वीप में रूस का भी हिस्सा है। मॉस्को के गोला-बारूद, हथियार वगैरह तेजी से कम हो रहे हैं। रूस के उत्तर कोरिया पर हालिया डोरे डालने को इसी से जुड़ा कदम माना जा रहा है।

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