Narcotics: क्या है डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और नशे के कारोबार की तिकड़ी का कनेक्शन?
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो खतरनाक नशीले ड्रग्स के व्यापार पर रोकथाम के लिए सक्रिय है। मगर डार्क वेब के जरिये क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन उसके लिए समस्या बन गए हैं।

Narcotics: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 6 जून (मंगलवार) को देशभर में 'डार्क वेब' के जरिये मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे एक गिरोह का खुलासा किया है। साथ ही लीसर्जिक एसिड डाईएथिलेमाइड (LSD) की अबतक की सबसे बड़ी खेप 15000 ब्लॉट्स भी जब्त करने का दावा किया है। एनसीबी के उपमहानिदेशक (उत्तरी रेंज) ज्ञानेश्वर सिंह के अनुसार यह एक ही अभियान में देश में एलएसडी ब्लॉट्स की सबसे बड़ी जब्ती थी। अबतक कर्नाटक पुलिस द्वारा साल 2021 और कोलकाता में साल 2022 में एनसीबी द्वारा एक अभियान में एलएसडी की 5000 ब्लाट्स जब्त की थी।
अधिकारियों के अनुसार जब्त की गई खेप (लगभग पांच हजार से सात हजार रुपये प्रति ब्लॉट) की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹10 करोड़ रुपये से अधिक है। एनसीबी द्वारा छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें छात्र तथा युवा शामिल हैं। यह गोपनीय इंटरनेट-आधारित ऐप और डब्ल्यूआईसीकेआर (WICKR) जैसी मैसेंजर सेवाओं के जरिये अपनी पहचान छिपाकर 'नशे का अवैध कारोबार कर रहे थे।
एलएसडी क्या होता है?
लिसर्जिक एसिड डाइथिलेमाइड यानि एलएसडी वास्तव में सिंथेटिक रसायन आधारित एक मादक पदार्थ है। इसे मतिभ्रमकारी (illusion) बढ़ाने वाले पदार्थ के रूप में जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे ताकतवर मूड बदलने वाला एक रसायन है। इसे चाटकर या निगलकर खाया जाता है। एलएसडी को एसिड, ब्लॉटर या डॉट्स भी कहा जाता हैं। यह स्वाद में कड़वा, गंधरहित और रंगहीन होता है। बाजार में यह रंगीन टेबलेट, पारदर्शी तरल, जिलेटिन के पतले-पतले वर्ग के रूप में या सोख्ता कागज (ब्लॉटर पेपर) के रुप में मिलता है। आमतौर पर नशे के आदी लोग इसका ब्लॉटर पेपर या टेबलेट के रूप में सेवन करते है। जबकि जिलेटिन और तरल के रूप में इसे आंखों में रखा जा सकता है।
इसका सेवन करने वालों की आंखों की पुतलियां तन जाती है। जैसे पुतलियां खींचकर लंबी कर दी गयी हों। बहुत ज्यादा पसीना आना, व्यक्ति में असहजता और घबराहट की स्थिति इसके सेवन के अन्य लक्षण हैं।
दुष्प्रभाव क्या है?
एलएसडी का सेवन करने से गंभीर मनोरोग होने की संभावना होती है। इसका प्रयोग करने वालों को कभी-कभी एलएसडी फ्लैश बैक हो जाता है। यानी इस स्थिति में व्यक्ति को बिना यह ड्रग्स लिए ही उसके प्रभाव का अनुभव होने लगते हैं। यह स्थिति ड्रग्स बंद करने के कुछ दिनों से लेकर सालभर बाद कभी भी हो सकती है। यह स्थिति सालों तक बनी रह सकती है।
डार्क वेब क्या होता है?
डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जहां वैध और अवैध दोनों तरीके के काम को अंजाम दिया जाता है। इंटरनेट का 96 प्रतिशत हिस्सा डीप वेब और डार्क वेब के अंदर आता है। एक साधारण इंटरनेट यूजर, इंटरनेट कंटेंट के केवल 4 प्रतिशत हिस्से का ही इस्तेमाल करते हैं, जिसे सरफेस वेब कहा जाता है। डीप वेब पर मौजूद कंटेंट को एक्सेस करने के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है, जिसमें ई-मेल, नेट बैंकिंग वगैरह आते हैं। डार्क वेब को खोलने के लिए टॉर ब्राउजर (Tor Browser) का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे काम करता है डार्क वेब?
डार्क वेब ओनियन राउटिंग टेक्नोलॉजी (प्याज रूटिंग कंप्यूटर नेटवर्क पर अज्ञात संचार के लिए एक तकनीक) है। इसमें एन्क्रिप्शन की परतों में संदेशों को एनकैप्सुलेट किया जाता है। यह प्याज की परतों के समान काम करता है। यह यूजर्स को ट्रैकिंग और सर्विलांस से बचाता है और उनकी गोपनीयता बरकरार रखने के लिए सैकड़ों जगह रूट और री-रूट करता है।
आसान शब्दों में कहा जाए तो डार्क वेब ढेर सारी आईपी एड्रेस से कनेक्ट और डिस्कनेक्ट होता है, जिससे इसको ट्रैक कर पाना असंभव हो जाता है। यहां यूजर की इन्फॉर्मेशन इंक्रिप्टेड होती है, जिसे डिकोड करना नाममुकिन है। डार्क वेब पर डील करने के लिए वर्चुअल करेंसी जैसे बिटकॉइन का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा इसलिए होता है, ताकि ट्रांजेक्शन को ट्रेस न किया जा सके।
क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल
एनसीबी के मुताबिक डार्कनेट या डार्कबेव में संचालित होने वाला नेटवर्क भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करता है। इसका बिजनेस और डार्कवेब का इस्तेमाल पोलैंड, नीदरलैंड, अमेरिका और भारत जैसे कई देशों में किया जा रहा है। अप्रैल 2023 में देश के गृह मंत्री अमित शाह ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था, जहां उन्होंने देश को 2047 तक नशा मुक्त करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने क्रिप्टो करेंसी और डार्क नेट का मुकाबला करने के लिए राज्य के नारकोटिक्स अधिकारियों को लगातार सेंट्रल एजेंसियों के संपर्क में रहने की भी सलाह दी थी।
देश में डार्क नेट और क्रिप्टो करंसी के द्वारा नशे का कारोबार कोई नया नहीं है। साल 2018-19 में भी ऐसी कई खबरें सामने आई थीं। इन बीते सालों में क्रिप्टो करंसी से नशे की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त तेजी से बढ़ी है जोकि अब एंटी नारकोटिक्स एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। नारकोटिक्स एजेंसियों के अनुसार डार्क नेट नशे के तस्करों के लिए सुरक्षित जगह बन गया है। दरअसल, डार्क नेट और क्रिप्टो करंसी से ड्रग्स की खरीद बढ़ने की कई वजह हैं। जैसे ड्रग्स हासिल करने के लिए लोगों को अब सीधे अपराधियों या ड्रग्स तस्करों से संपर्क नहीं करना पड़ता। न ही इसमें सरकारी करेंसी अथवा विनिमय का इस्तेमाल होता है। यह इन्टरनेट के सामान्य इस्तेमाल से भी अलग है। यही कारण है कि जांच एजेंसियों को कार्रवाई करना मुश्किल होता है।
पिछले कुछ मामले
26 मई 2023 को पुणे में फूड डिलिवरी ऐप के जरिए ड्रग्स सप्लाई के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ था। इसमें पुलिस ने 5 युवाओं को गिरफ्तार किया था। ये लोग फूड डिलिवरी ऐप के जरिए देर रात में एलएसडी की सप्लाई किया करते थे। इनके पास से ₹53 लाख की एलएसडी बरामद की गयी थी।
22 अक्टूबर 2021 को हिमाचल प्रदेश में कुल्लू पुलिस ने नशीले ड्रग्स के साथ केरल के दो युवकों को गिरफ्तार किया था। इन दोनों के पास से पुलिस को एलएसडी के 37 पेपर मिले थे। हालांकि, इसकी कीमतों का खुलासा नहीं किया गया था।
फरवरी 2020 में जयपुर में कमिश्नरेट पुलिस की विशेष टीम ने इंजीनियरिंग के एक ऐसे छात्र को पकड़ा था, जो एलएसडी बेचता था। इसके कब्जे से दस-दस हजार के सात टिकट बरामद किये थे। इस गिरफ्तारी के बाद छात्र ने नशे के पूरे नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किये थे। पुलिस ने इस कार्रवाई में 40 जगहों पर दबिश दी थी, जिसमें 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक विदेशी मॉर्डन ड्रग एलएसडी की जब्ती का जयपुर में यह पहला मामला था।












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