Sharad Pawar Family: शरद पवार परिवार की तीन पीढ़ियां हैं राजनीति में, जानें कौन किस पद पर

महाराष्ट्र के तीन बार के मुख्यमंत्री, केंद्रीय रक्षामंत्री व कृषि मंत्री रहे शरद पवार के परिवार के ज्यादातर लोग कहीं-न-कहीं राजनीति से जुड़े हुए हैं।

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Sharad Pawar Family: साल 1960 में शरद पवार ने राजनीति में कदम रखा और तब से लेकर छह दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। जुलाई 1978 में शरद पवार को महाराष्ट्र के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का श्रेय मिला था। उसके बाद साल 1986 में कांग्रेस में उनकी वापसी हुई और 1988 में महाराष्ट्र के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। फिर साल 1993 में तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। वहीं 1996 से पवार केंद्र की राजनीति करने लगे।

इसी दौरान साल 1999 में शरद पवार ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया और उनका कांग्रेस से विवाद हो गया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर 10 जून 1999 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई। इसके बाद से उनके परिवार का भी राजनीति में वर्चस्व बढ़ने लगा। धीरे-धीरे पवार परिवार के सदस्य राजनीति में ज्यादा सक्रिय होने लगे।

शरद पवार ने की थी पद छोड़ने की बात

हाल ही में 2 मई 2023 को शरद पवार ने एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इसके बाद से पार्टी में उत्तराधिकारी के लिए खलबली मच गई थी कि आखिर कौन होगा एनसीपी का अगला अध्यक्ष? इसके बाद 5 मई को उन्होंने पद छोड़ने की बात वापस ले ली। लेकिन, एक सवाल जो सबके मन में उठा था कि आखिर शरद पवार के बाद कौन होगा उनका अगला वारिस? इसके लिए आपको जानना होगा कि शरद पवार के परिवार में कितने लोग हैं जो राजनीति से जुड़े हैं और सक्रिय भूमिका में हैं।

गोविंद राव पवार

आप कह सकते हैं कि राजनीति शरद पवार के खून में थी क्योंकि उनके पिता गोविंद राव पवार में स्वाभाविक संसाधनशीलता और नेतृत्व कौशल था। उन्होंने ही पूरे बारामती के गन्ना उत्पादकों को एकजुट किया था और एक सहकारी समिति बनाई थी। यह एक बड़ी सफलता थी और तब बारामती के आसपास के अन्य जिलों में भी सहकारी गतिविधि फैलने लगी। इसमें से साख समितियां और चीनी सहकारी कारखाने शुरू किये गये थे। जिसमें बड़ी भूमिका गोविंद राव पवार की थी। हालांकि, जिले में उनका नाम था पर उन्होंने कभी खुलकर राजनीति नहीं की।

दिनकरराव गोविंदराव पवार उर्फ अप्पा साहेब पवार

शरद पवार के सबसे बड़े भाई अप्पा साहेब पवार थे। वह पवार परिवार से खुलकर राजनीति में उतरने वाले पहले सदस्य थे। महाराष्ट्र में किसानों और मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ने वाले बड़े नेता के तौर पर उनकी पहचान थी। ऐसा कहा जाता है कि अप्पा साहेब ने ही अपने तीसरे नंबर के भाई शरद पवार को राजनीति में उतारा और कांग्रेस से जुड़ने के लिए राजी किया था।

अजित पवार

साल 1982 से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के साथ किया था। कभी एक जमाने में अजीत पवार एनसीपी के अंदर दूसरे सबसे मजबूत नेता माने जाते थे और उत्तराधिकारी भी। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक शरद पवार हर मुद्दे पर अजीत पवार से बातचीत करके ही कोई फैसला लेते थे। अजित पवार साल 1991 में लोकसभा सांसद भी बने। इसके बाद उन्होंने चाचा शरद पवार की खातिर अपनी लोकसभा सीट छोड़ दी और फिर 1991 में बारामती सीट से विधानसभा पहुंचे। इसके बाद अजीत पवार 1995, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में उसी निर्वाचन क्षेत्र से फिर से चुने गये। इस दौरान वे कई बार मंत्री बने, डिप्टी सीएम और महाराष्ट्र विधानसभा के विपक्ष के नेता भी चुने गये।

सुप्रिया सुले

साल 2006 में शरद पवार की इकलौती बेटी सुप्रिया सुले ने पहली बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपनी राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद वह 2009 में बारामती से सांसद बनीं। फिर 2014 और 2019 में इसी लोकसभा सीट को जीतकर संसद पहुंची। राजनीतिज्ञ होने के अतिरिक्‍त वह पवार पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्‍ट की अध्‍यक्ष भी हैं और कई सामाजिक संस्‍थाओं जैसे एनएबी विमन काउंसिल, नेहरू सेंटर (मुंबई), वाईबी चव्‍हाण केंद्र (मुंबई) और इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑन नोमेडिक एंड डि-नोटेड ट्राइब्‍स आदि की सदस्‍य भी हैं।

पार्थ पवार

अजीत पवार के बड़े बेटे हैं पार्थ पवार। पार्थ पवार ने 2019 में आम चुनाव अपने दादा शरद पवार की सीट से लड़ा था और शरद पवार की सीट हार कर गवां दी थी। पवार परिवार से चुनाव हारने वाले पार्थ पहले सदस्‍य थे। गौर करने वाली बात यह है कि पवार जिस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, मावल को महाराष्ट्र में एनसीपी के लिए सबसे सुरक्षित सीटों में से एक माना जाता था।

रोहित पवार

रोहित पवार, शरद पवार के बड़े भाई अप्पा साहेब के पोते हैं। 2017 में रोहित ने पवार परिवार के बारामती के होम टाउन से जिला परिषद का चुनाव जीता था। तब से रोहित पवार खामोशी के साथ राज्य में अपनी जमीन बनाते आ रहे हैं। वहीं पार्टी के कई कार्यकर्ता उन्हें शरद पवार के बाद वास्तविक जननेता के रूप में देखते हैं। खबरों के मुताबिक रोहित पवार, पार्थ पवार के विपरीत बड़े आत्मविश्वास के साथ लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच सार्वजनिक मौजूदगी दर्ज कराते हैं।

शरद पवार के फैमिली ट्री को समझें?

गोविंद राव पवार और शारदा पवार के चार बेटे और एक बेटी हुए। उन चार बेटों में सबसे बड़े अप्पासाहेब, दूसरे नंबर पर अनंतराव, तीसरे नंबर शरद पवार और सबसे छोटे प्रताप हुए। उनकी एक बेटी भी हुई जिनका नाम सरोज पटेल है, जो एक गृहिणी हैं।

● सबसे बड़े अप्पासाहेब दिवंगत हो चुके हैं। उनके दो बेटे राजेंद्र और रंजीत। राजेंद्र पवार बिजनेसमैन हैं। जबकि रंजीत एक वाइन इंडस्ट्री से जुड़े हैं। राजेंद्र के बेटे रोहित पवार हैं।

● अनंतराव पवार (दिवंगत) के दो बेटे (श्रीनिवास और अजीत) और एक बेटी (विजया पाटिल) हैं। बड़े बेटे श्रीनिवास का कृषि और ऑटोमोबाइल का कारोबार है। जबकि अजीत पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रह चुके हैं और एनसीपी के सबसे मजबूत नेता माने जाते हैं। जबकि अनंतराव की बेटी विजया पाटिल मीडिया में काम करती है। अजित पवार के दो बेटे हैं जय और पार्थ।

● तीसरे नंबर पर आते हैं शरद पवार। शरद पवार की एक बेटी है जिसका नाम है सुप्रिया सुले। सुप्रिया सुले लोकसभा में सांसद हैं और उनके पति सदानंद सुले एक बिजनेसमैन हैं।

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    ● शरद पवार के सबसे छोटे भाई का नाम प्रताप है। जो शराब और मीडिया उद्योग से जुड़े हुए हैं। उनके बेटे अभिजीत भी मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े हैं।

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