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Unemployment: बेरोजगारी के मुद्दे पर कितना कामयाब होगा विपक्ष?

Unemployment: कांग्रेस और इंडिया गठबंधन में उसके सहयोगी दल अब इस कोशिश में हैं कि चुनाव का एजेंडा रोजगार और महंगाई पर ले आया जाए। काँग्रेस ने 30 लाख सरकारी नौकरी वाले विज्ञापन के साथ अपना चुनाव प्रचार तेज कर दिया है, तो बिहार से आरजेडी ने अपने घोषणा पत्र में एक करोड़ नौकरी देने का वायदा कर दिया है।

जवाब में बीजेपी रोजगार की परिभाषा में केवल नौकरी के बजाय स्वरोजगार और पेशेवर अवसरों को भी शामिल कर रही है और एक बड़ा आंकड़ा पेश करने की कोशिश कर रही है। लेकिन विपक्ष 2014 में मोदी द्वारा 2 करोड़ नौकरी देने के वायदे पर सत्ता पक्ष की खिंचाई करने का अवसर जाने नहीं देना चाहता और इसी पर पीएम मोदी को घेरने की रणनीति पर काम भी कर रहा है।

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बीजेपी का भ्रष्टाचार और वंशवाद के खिलाफ जोर

बीजेपी और एनडीए के घटक दल चुनाव में प्रचार की दिशा विपक्ष का भ्रष्टाचार, राष्ट्रवाद का विरोध, हिंदू धर्म के प्रति उनकी अनास्था और भाई भतीजावाद की तरफ रखना चाहते हैं। भाजपा यह भी प्रचार कर रही है कि विपक्ष के नेता सरकार में आने के बाद केवल पैसे और सत्ता के बारे में सोचते हैं, अपने बेटों और बेटियों को शक्तिशाली पदों पर नियुक्त करते हैं।

पीएम मोदी किसी भी सभा में यह बताना नहीं भूलते कि कांग्रेस मूल रूप से वंशवादी है। खासकर गांधी परिवार का सारा ध्यान अपनी अगली पीढ़ियों को पार्टी में स्थापित करना है, ताकि उनकी पारिवारिक विरासत जीवित रहे। विपक्ष अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति पर अब भी कायम है।

अर्थव्यवस्था पर मोदी का विपक्ष को जवाब

भाजपा नेता अब भी यह तर्क देते हैं कि उनको 2014 में एक विफल अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी। पीएम मोदी दस वर्षों में सभी पुरानी खामियों को ठीक कर बहुत कुछ बदलाव ले आए हैं ताकि 140 करोड़ जनता का भविष्य सुरक्षित रहे। बीजेपी यह भी दावा कर रही है कि पार्टी ने सत्ता में आने के बाद अपने सभी वादों को पूरा किया है। खासकर भाजपा अपने वैचारिक वादों पर 100 प्रतिशत खड़ी उतरी है। कांग्रेस जब सत्ता में थी तो 20 प्रतिशत अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण करने के लिए 80 प्रतिशत बहुमत को नजरअंदाज करती थी।

बीजेपी सिर्फ नौकरी के आधार बेरोज़गारी डेटा को सही नहीं मानती। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि देश में बेरोजगारी मापने के लिए अभी भी हमारे पास कोई मजबूत तंत्र नहीं है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के अवसर पर नजदीकी नज़र रखने का प्रयास किया है।

महंगाई को मापने वाली मुद्रास्फीति की दर औसत 4 प्रतिशत के आस पास रही है। 7 प्रतिशत से ऊपर जीडीपी वृद्धि की भी देखी जा रही है। फिर यह कहना कि देश में बहुत महंगाई है और बेरोजगारी चरम पर है सरकार के प्रति बेहद अन्यायपूर्ण व्यवहार होगा। कुछ वस्तुओं की कीमतों की मौसमी व अस्थायी वृद्धि को देश भर में महंगाई का दर्जा नहीं दिया जा सकता। भारत में स्टार्ट-अप्स की संख्या लाखों में है, जो रोजगार की समस्या का कुछ हद तक समाधान करते हैं। हाँ, अकुशल या अर्ध-कुशल लोगों के साथ कुछ समस्या है।

क्या है सरकारी आंकड़ा

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च 2023 के दौरान 6.8 प्रतिशत थी, जो एक साल पहले 8.2 प्रतिशत पर थी। हरियाणा, राजस्थान और बिहार जैसे कुछ राज्यों में बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।

बेरोज़गारी या अल्प-रोज़गार की यह दर दर्शाती है कि लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार काम मिलने में कठिनाई हो रही है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या कुछ कुशल और संसाधन वाले लोगों के लिए यह विकास है, अशिक्षित, अकुशल या अर्धकुशल लोगों के लिए योजनाएं फेल हो रही हैं। क्या सरकार ईमानदारी से इस समस्या से जूझ रहे लोगों के साथ न्याय नहीं कर सकी है। जबकि सरकार का दावा है कि शिक्षा की गुणवत्ता, कौशल, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है और देश में एक मजबूत इको-सिस्टम तैयार हुआ है, जिससे बेहतर रोजगार सृजन संभव हो सकता है।

हाल ही में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (आईएलओ) की 'द इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 ने देश में एक अलग तरह की बहस छेड़ दी है। यह रिपोर्ट देश के 80 करोड़ युवाओं के लिए एक निराशाजनक चित्र प्रस्तुत करती है। इसमें कहा गया है कि बेरोजगारों में, शिक्षित युवाओं का अनुपात, जिन्होंने माध्यमिक स्तर या उच्चतर शिक्षा प्राप्त की है, 2022 में 65.7 प्रतिशत तक पहुँच गया है। 2000 में यह दर 35.2 प्रतिशत थी।

इस रिपोर्ट के आते ही विपक्ष पीएम मोदी पर और हमलावर हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर कहा कि लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा भाजपा द्वारा थोपी गई बेरोजगारी है। युवा नौकरियां खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और देश जनसांख्यिकीय दुःस्वप्न का सामना कर रहा है। खड़गे ने कहा कि 'युवा न्याय' के तहत कांग्रेस की पहली नौकरी पक्की' गारंटी देंगी और काम और सीखने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करेगी ताकि करियर के विकास के नए रास्ते खुलें।

कुछ दिन पहले ही लोकनीति सीएसडीएस ने भी यह दावा किया है कि 2024 के मतदाताओं में से 27 प्रतिशत की प्राथमिक चिंता बेरोजगारी है और 23 प्रतिशत लोगों के लिए मूल्य वृद्धि बड़ा मुद्दा है। इस सर्वेक्षण में भी कहा गया है कि सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत लोगों ने माना है कि पिछले पांच वर्षों में नौकरियां ढूंढना और अधिक कठिन हो गया है। पर साथ में लोग यह भी मानते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और पीएम मोदी ही तीसरी बार सत्ता में आएंगे और वही बेरोजगारी भी दूर करेंगे।

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