पुण्यतिथि विशेष- राज ही रहेगा शास्त्री जी की मौत का सच
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। तो देश को जय जवान-जय किसान का नार देने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत का राज कभी सामने नहीं आएगा। आज उनकी पुणयतिथि पर यह सवाल फिर पूछा जा रहा है। शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री का कहना था कि उनके पति की मृत्यु संदिग्ध हालातों में हुई थी।
प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के परिवार के सदस्यों के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई इस जानकारी को यह कहकर ठुकरा दिया गया कि यदि 11 जनवरी 1966 की घटना को सार्वजनिक किया गया तो इसके कारण विदेश संबंधों को नुकसान पहुंचेगा। शास्त्री जी के निजी चिकित्सक डा. आर.के.करौली कहते हैं कि सरकार को उनकी मौत का सच सबके सामने लाना चाहिए।
शास्त्री जी की मौत 11 जनवरी 1966 को हुई, जिसे अब 49 वर्ष बीत चुके हैं। इस मामले में अब तक न तो कोई जांच-पड़ताल हुई और न ही सरकार की ओर से कोई जानकारी दी गई।
दुख इस बात है कि उनकी हत्या के पश्चात देश में ने कितनी सरकारें आर्इं और कितने ही प्रधानमंत्री बने, लेकिन भारत की जनता के सामने इसका जवाब नहीं आया कि उस दिन आखिर ताशकंद में ऐसा क्या घटा था जिसके चलते उनकी मौत हुई।
क्या हुआ था उस रोज
सूचना के अधिकार के तहत शास्त्री जी के परिवारजनों ने सरकार से यह जानना चाहा है कि किस प्रकार से उनकी ताशकंद में हत्या हुई? पर सरकार ने इस मामले में संसद के पटल पर कोई ठोस जानकारी नहीं रखी है। ऐसी कौन सी बात हो गई कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान उनकी मृत देह को लेकर भारत आए? जिस पाकिस्तानी तानाशाह ने 1965 में भारत पर आक्रमण किया था वे भारत के प्रति और विशेषत: शास्त्री जी के प्रति इतने उदार क्यों हो गए? युद्ध विराम के बाद भारत और पाकिस्तान के नेता ताशकंद गए, उस बीच यह घटना घटी थी। तब रूस के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपने देश की संसद में क्या वक्तव्य दिया था? उनकी मौत का क्या कारण बताया था?
कैसे हुई मौत
शास्त्री जी के पुत्र सुनील शास्त्री का कहना है कि उनके परिवार के होने के नाते आज भी हम से लोग यह सवाल करते रहते हैं कि "भारत के उस प्रधानमंत्री की मृत्यु कैसे हुई? सरकार कुछ भी जवाब दे, लेकिन उसके तथ्य किसी के गले नहीं उतरते हैं। अब वक्त का ताकाजा है कि देश को पता चले कि क्यों हुई शास्त्री की मौत।













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