Jaipur Book Festival: किताबों की दुनिया को पाठकों तक पहुंचा रहा है बुक्स प्लाजा

Jaipur Book Festival: वैसे तो जयपुर, लिटरेचर फेस्टिवल के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, पर आजकल जयपुर में बुक्स फेस्टिवल की भी काफी चर्चा हो रही है। चर्चा इसलिए कि इस किताब के मेले में एक लाख से अधिक पुस्तकें आईं हैं, जहां हर उम्र और हर रूचि वालों के लिए किताबें उपलब्ध हैं। शैक्षणिक पाठ्क्रमों से लेकर कल्पना लोक तक से जुड़ी पुस्तकें इस जयपुर बुक्स फेस्टिवल में मिल रही हैं।

जिस दौर में मोबाइल और अन्य स्क्रीनों पर लोग ज्यादा से ज्यादा समय बिता रहे हैं, उस दौर में हर घर तक किताबों को पहुंचाने के उद्देश्य को लेकर कोई काम कर रहा है, तो वाकई यह शानदार कोशिश है। यह प्रयास बुक्स प्लाजा के नाम से किताबों के विपणन और वितरण करने वाली फर्म कर रही है। इसके प्रमुख प्रवीण शाह किताब प्रेमियों के लिए एक विशेष अभियान चल रहे हैं। उनका दावा है कि उनके साथ सोशल मीडिया और अन्य माध्यम के जरिए 25 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। उनका अगला पड़ाव गुजरात के अहमदाबाद में है।

Jaipur Book Festival: Books Plaza is bringing the world of books to the readers

2001 से जारी है बुक फेस्टिवल का सफर

वनइंडिया से बात करते हुए प्रवीण शाह ने कहा कि लोगों तक कम दाम और अच्छी प्रिंटिंग के साथ किताब पहुंचाने के लिए बुक्स फेस्टिवल का यह सफर 2001 से जारी है। अब तक 25 से ज्यादा जगहों पर बुक्स प्लाजा का यह मेला लग चुका है। देश के हर कोने में जाने का संकल्प और लक्ष्य रखा गया है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार आदि 10 प्रदेशों में यह बुक फेस्टिवल पहुंच चुका है। अगले कुछ सालों में 100 शहरों तक जाने का लक्ष्य है।

प्रवीण शाह के अनुसार बुक्स प्लाजा की कोशिश सिर्फ किताब बेचने की नहीं है, बल्कि लोगों को किताबों से परिचय कराने की है। चूंकि वे सभी प्रमुख प्रकाशकों के साथ जुड़े हैं, तो उनके लिए किताबों का चयन और संकलन कठिन काम नहीं है। बुक प्लाजा हालांकि प्रमुख रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित पुस्तकों की मार्केंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन करता है। लेकिन बुक्स फेस्टिवल में अनिवार्य रूप से उस प्रांत की भाषा की पुस्तकें जरूर होती हैं, जहां फेस्टिवल आयोजित होता है।

50 रुपये में उपलब्ध कराते हैं किताबें

बुक्स प्लाजा अपने फेस्टिवल में किताबों की कीमतों का खास ध्यान रखता है। जहां इस समय प्रमुख लेखकों की किताबों का बाजार मूल्य 1000 से 2000 रुपये तक होता हैं, वहां बुक प्लाजा में 50 रुपये के न्यूनतम मूल्य पर भी किताबें उपलब्ध होती हैं। यह पूछने पर कि फिर किताबों की लागत कैसे निकलती है, प्रवीण शाह कहते हैं कि आजकल सरकारी नीति है कि पाठ्यक्रम के लिए चयनित हर पुस्तक की कम से कम तीन प्रतियां पुस्तकालय के लिए जरूर खरीदी जानी चाहिए।

एक वितरक होने के नाते उनके लिए यह बहुत बड़ा बाजार है। वह अपनी लागत का एक बड़ा हिस्सा वहां से निकाल लेते हैं। बाकी फेस्टिवल में किताबों की कीमत इसलिए कम रखते हैं कि लोग कम से कम पैसे की किल्लत के चलते किसी पुस्तक से वंचित ना रहें। बुक्स प्लाजा बच्चों के लिए उनके पाठ्यक्रम की किताबें 250 रुपये प्रति किलो देते हैं और अन्य सभी पुस्तकों पर एक अच्छा खासा डिस्काउंट भी।

पाठकों की कोई कमी नहीं

यह धारणा गलत है कि वर्तमान समय में किताबों के पाठक कम हो गए हैं। प्रवीण शाह कहते हैं कि कोई हमारी दुनिया में आ कर देखे तो यह धारणा मिट जाएगी कि किताब पढ़ने वाले कम हो गए हैं। उन्होंने केवल पाठकों के लिए ही बुक्स प्लाजा क्लब का गठन किया है। इंस्टाग्राम फेस बुक और अन्य सोशल मीडिया साइट्स के जरिए हजारों लोग उनसे जुड़े हैं। जयपुर में लगे बुक्स फेस्टिवल में भी रोजाना 600 से अधिक लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। प्रवीण शाह बताते हैं कि इस फेस्टिवल की खास बात यह है कि इसे जयपुर के प्रशासन का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। शिक्षण संस्थान के लोग नियमित रूप से फेस्टिवल में आ रहे हैं। 31 जनवरी 2024 तक चलने वाले इस फेस्टिवल में 50 हजार से ज्यादा लोगों की आने की अपेक्षा है।

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