Apple: सेहत और दौलत के स्रोत सेब की रोचक कहानी
सर्दियां आने से ठीक पहले बाजार में देसी सेब आ जाता है। भारत में सेब की मुख्य खेती जम्मू कश्मीर और हिमचाल में होती है। कश्मीर अकेले देश के कुल सेब उत्पादन का 70 प्रतिशत देता है। हिमाचल प्रदेश में भारतीय सेब की मात्रा का लगभग आठवां हिस्सा पैदा होता है।
उत्तराखंड भारत में तीसरा सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है। हालाँकि उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर और तमिलनाडु में भी सेब उगाए जाते हैं, लेकिन उनकी मात्रा नगण्य है।

घरेलू सेब आने के कारण ही गरीबों को भी यह फल मिल जाता है, अन्यथा ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड से आने वाले फल तो सिर्फ अमीर ही खरीद सकते हैं। खाने वाले को सेहत और उगाने वाले को दौलत देने वाला यह रसीला फल भारत आया कैसे इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है।
सेब के कई नाम
सेब को भारत में कई नाम से जानते है। गुजरात में इसे सफ़रजन, मराठी में सफ़रचंद और तेलुगु में सीमा रेगु कहा जाता है। ज्यादातर हिमालय की तलहटी में बसे जम्मू-कश्मीर में सेब की जो वैरायटी उपजाई जाती हैं, उनमें कशूर फराश, महाराजा, शिरीन दहन और अंबरी जैसी देशी सेब की किस्में हैं। अगस्त - सितंबर के हफ्तों में सेब के फूल खिल आते हैं और खुशबू से पूरा बगान महक उठता है। अंबरी सेब आयातित गोल्डन डिलीशियस और रेड डिलीशियस को टक्कर देता है।
सेब को कई प्रकार से खाया जाता है। कच्चा फल की तरह, उबाल कर सेब की कई रेसेपी बनाते हैं। काफी मात्रा में इसे सुखा कर भी रखते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में होख कहा जाता है। सर्दियों में इसे फ्राई कर के खाते हैं और ग्रेवी में भी डालते हैं।
कहां से आया सेब
कश्मीरी हिंदुओं का मानना है कि श्रीफल और सेब स्वर्ग में अनुपलब्ध दुर्लभ चीजें हैं, इसलिए अंत्येष्टि के समय या किसी अन्य आयोजन पर इसे भेंट भी किया जाता है। सेब के परांठे भी कश्मीरी लोग बनाते हैं। हल्की खट्टी महराजी चटनी और अचार के लिए भी सेब का खूब इस्तेमाल होता है।
भले ही सेब की उत्पत्ति मध्य एशियाई देशों चीन, कज़ाखस्तान और क्रिगिस्तान में मानी गयी हो, पर भारत के पुराने ग्रंथ कल्हण की राजतरंगिणी में इस फल का उल्लेख है। यानि 1000 ईसा पूर्व राजा नारा के शासनकाल के पहले से ही भारत में सेब मौजूद है।
छठी शताब्दी में भारत आये चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने भी सेब के फलों का जिक्र किया था। चौदहवीं शताब्दी ई. में फ़िरोज़ शाह तुगलक के शासनकाल के दौरान बड़े पैमाने पर सेब सहित कई फलों के पेड़ उगाए गए। सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के मुगलों के खानपान में सेब अनिवार्य रूप से शामिल होता था।
जब ब्रिटिश भारत में आए तो उन्होंने सेब को व्यावसायिक तौर पर उगाने का प्लान बनाया। ब्रिटिश सेना के कैप्टन आर सी स्कॉट ने 1870 में हिमाचल कुल्ल घाटी में सेब की खेती को प्रोत्साहन दिया। अंग्रेज अपने भोजन पकाने के लिए खट्टे सेबों का उपयोग करते थे।
सेब का आयात
भारत चीन, न्यूज़ीलैंड, अमेरिका, इटली, तुर्की और पोलैंड से सेब आयात करता है, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान और ईरान से सस्ते सेब भी आ रहे हैं, जिसका स्थानीय सेब उत्पादक विरोध करते हैं। भारत सेब का निर्यात भी करता है लेकिन अधिकतर अपने पड़ोसी देशों को। अनुमान है कि भारत में 2022/23 में सेब का उत्पादन 23.5 लाख टन रहेगा, जो पिछले साल के लगभग बराबर रहेगा। इस वर्ष मानसून भी सामान्य ही रहा है। वर्ष 2022-23 में भारत में सेब की खपत 26 लाख टन है।
आधुनिक खुदरा आउटलेट धीरे-धीरे बाजार हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। घरेलू स्तर पर उत्पादित सेब मिक्स ग्रेड के होते हैं। सीमित कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के कारण मुख्य रूप से उत्तरी भारत के शहरी क्षेत्रों में खपत होती है। सभी अन्य भारतीय क्षेत्र नियमित रूप से अत्यधिक खराब होने वाली घरेलू वस्तुओं के वितरण की चुनौतियों का सामना करते हैं। नतीजतन, आयातित सेब पर निर्भरता बनी रहती है।
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