Independent Candidates: निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए मुश्किल है संसद की राह, क्या कहते हैं आंकड़ें

Independent Candidates: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी छोटे-बड़े दल अपने-अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर रहे हैं। जिन नेताओं का टिकट पार्टी ने काट दिया है, वे अब खुलेआम बगावत कर अपनी ही पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय लड़ने का ऐलान करने लगे हैं।

कई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी से टिकट न मिलने की स्थिति में वरुण गांधी जैसे बड़े नेता भी निर्दलीय प्रत्‍याशी के तौर पर पर्चा दाखिल कर सकते हैं। वैसे चुनाव के समय निर्दलीय उम्मीदवारों की सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार में होती आई है।

Independent Candidates

चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले कई लोकसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन इनके जीत का मार्जिन लोकसभा चुनाव में लगातार घटा है। साल 2019 में ही लोकसभा की 542 सीटों के लिए कुल 8,039 उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें से 3,376 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। जबकि जीत केवल 4 को ही मिली मतलब 0.12% उम्मीदवार ही जीते थे।

कौन होते हैं निर्दलीय उम्मीदवार?

निर्दलीय उम्मीदवार का मतलब होता है, जो किसी भी रजिस्टर्ड पार्टी का उम्मीदवार नहीं है। निर्दलीय पूरी तरह से स्वतंत्र प्रत्याशी (इंडिपेंडेंट कैंडिडेट) होते हैं। कई जगहों पर इन निर्दलीय उम्मीदवारों को वोटकटवा भी कहा जाता है क्योंकि इनकी वजह से प्रत्याशियों की संख्या बढ़ जाती है और वोटों का बंटवारा भी हो जाता है। 2019 में ही देश की हर सीट पर औसतन 6-6 निर्दलीय मैदान में थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इन निर्दलीय उम्मीदवारों की वजह से चुनाव आयोग को 2019 में करीब 8 करोड़ का फायदा हुआ था। क्योंकि, लोकसभा चुनाव 2019 में 3376 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें से 4 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि 10-15 उम्मीदवारों ने अपनी जमानत बचा ली। इस हिसाब से 99 प्रतिशत से भी ज्यादा उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए। इससे चुनाव आयोग को 8 करोड़ का फायदा निर्दलीय दे गए।

क्या होती है जमानत राशि?

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार जो उम्मीदवार कुल वैध वोटों का कम से कम छठा हिस्सा हासिल करने में विफल रहते हैं, उनकी जमा राशि जब्त हो जाती है। ऐसे उम्मीदवारों की जमा राशि राजकोष में भेज दी जाती है। बता दें कि लोकसभा चुनाव में 25000 रुपये जमानत राशि जमा कराई जाती है। जबकि एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ये राशि 12,500 रुपये है।

17 लोकसभा चुनावों में अब तक कितने निर्दलीय पहुंचे संसद?

अब तक हुए 17 लोकसभा चुनावों के परिणाम पर नजर डालें तो पूरे देश से कुल 226 निर्दलीय उम्मीदवार ही संसद तक सफर तय कर सांसद बन पाए हैं। जबकि 17 लोकसभा चुनावों में अब तक कुल 48,338 निर्दलीय उम्मीदवार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसका मतलब ये हुआ कि आजादी के बाद अब तक जितने भी निर्दलीय मैदान में उतरे थे उनमें से केवल 0.47% लोगों को ही जीत मिली है।

आइए आंकड़ों में देखते हैं कि कैसे हर लोकसभा चुनाव के बाद निर्दलीय सांसदों की संख्या कम होती गईं। देश में अब तक सबसे अधिक निर्दलीय सांसद (42) 1957 में जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। जबकि इससे पहले देश के पहले आम चुनाव में 1952 में निर्दलीय सांसदों की संख्या 37 थी।

1962 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय सांसदों की संख्या 20 थी। यह वह साल था जब पिछले चुनाव के मुकाबले निर्दलीय सांसदों की संख्या आधे से भी कम हो गई। हालांकि, इसके बाद वाले चुनाव में एक बार फिर निर्दलीय सांसदों की संख्या बढ़ी। उसके बाद घटती ही गईं। साल 1989 में 12 निर्दलीय उम्मीदवार सांसद बने। इसके बाद से दहाई का भी आंकड़ा निर्दलीय पार नहीं कर पाएं।

देखें लिस्ट, 17 लोकसभा चुनावों में किस साल कितने निर्दलीय जीते

चुनाव निर्दलीय सांसदों की संख्या
1952 37
1957 42
1962 20
1967 35
1971 14
1977 09
1980 09
1984 05
1989 12
1991 01
1996 09
1998 06
1999 06
2004 05
2009 09
2014 03
2019 04

2019 में केवल चार निर्दलीय उम्मीदवार बने सांसद

2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत हासिल की। जबकि दूसरे दलों के कई बड़े नेता चुनाव हार गए थे। ऐसे में केवल चार निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। तब इन चारों उम्मीदवारों की चर्चा काफी हुई थी।

इन चारों उम्मीदवारों में महाराष्ट्र की अमरावती सीट से नवनीत राणा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची थी। उन्होंने इस सीट पर एनडीए गठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ रहे शिवसेना प्रत्याशी अब्सुल आनंदराव विठोबा को 36 हजार 951 वोटो से हराया था।

इसके अलावा कर्नाटक की मांड्या सीट से निर्दलीय उम्मीदवार सुमनलता अम्बरीश ने चुनाव जीता था। सुमनलता ने जेडीएस प्रत्याशी व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल को 1 लाख 25 हजार 876 वोटों से मात दी थी।

असम की कोकराझार लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार नबा कुमार सरानिया ने जीत दर्ज की थी। सरानिया ने एनडीए गठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ रहीं बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंड की प्रेमिला रानी ब्रह्मा को 37 हजार 786 वोट से मात दी थी।

वहीं केंद्रशासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से निर्दलीय प्रत्याशी देलकर सांजीभाई की जीत हुई थी। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नत्थूभाई गोमनभाई पटेल को 9001 वोट से मात दी थी।

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