Rajya Sabha Elections: क्या है राज्यसभा के उपसभापति चुनने का नियम?
नई दिल्ली। आज राज्यसभा को उसका नया उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के रूप में मिल गया है, एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश ने आज उपसभापति के चुनाव में भारी जीत हासिल की है। उनके पक्ष में आज 125 वोट पड़े जबकि उनके खिलाफ खड़े हुए कांग्रेस के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद के हक में केवल 105 वोट आए, जिसके बाद उच्च सदन के उपसभापति की कुर्सी अब हरिवंश सिंह के हिस्से में आई है।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव होता कैसे है... चलिए जानते हैं विस्तार से...

संविधान के आर्टिकल 89 में है जिक्र
भारत के संविधान के आर्टिकल 89 में कहा गया है कि राज्यसभा अपने एक सांसद को उपसभापति पद के लिए चुन सकता है, जब यह पद खाली हो। इस वक्त ये पद प्रोफेसर पीजे कुरियन के कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद खाली हुआ है, उनका कार्यकाल 1 जुलाई को खत्म हो गया था।

ये है नियम
कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है लेकिन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है।

सदन का बहुमत
- अगर किसी प्रस्ताव में एक से ज्यादा सांसद का नाम हैं तो इस स्थिति में सदन का बहुमत तय करेगा कि कौन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना जाता है।
- अगर सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो इस स्थिति में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाता है।
- राज्यसभा उपसभापति पद के लिए अबतक कुल 19 बार चुनाव हुए हैं. इनमें से 14 मौकों पर सर्वसम्मति से इस पद के लिए उम्मीदवार को चुन लिया गया था।
- 1969 में पहली बार उपसभापति के पद के लिए चुनाव हुआ था।
- उपसभापति राज्यसभा के सभापति/उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में राज्यसभा का संचालन करना होता है।
- उच्च सदन की कार्यवाही को भी सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी उसके कंधों पर होती है।

खास बात
उपसभापति का क्या काम है












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