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Gir Lions: गिर के जंगलों में सिंह हो रहे मृत्यु के शिकार, बीतें सालों में हुई हैं सैकड़ों मौतें

गुजरात का गिर जंगल एशियाटिक लॉयन (सिंह या बब्बर शेर) का एकमात्र ‘हैबिटेट’ है। वहां हर साल औसतन 122 सिंह मर रहे हैं।

Gir forest of Gujarat Hundreds of lions deaths in the past years

Gir Lions: 6 मार्च 2022 को गुजरात विधानसभा में राज्य के वनमंत्री मुरुभाई बेरा ने बताया कि साल 2022-23 में गिर में 100 बब्बर शेरों (सिंहों) की मौत हो गई। जिसमें 20 नर, 21 मादा और 59 शावक थे। 89 सिंहों की मौत प्राकृतिक और 11 की मौत अप्राकृतिक तरीके से हुई थी। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े एक अप्रैल 2022 से 31 जनवरी 2023 तक के हैं। साल 2020 में जनगणना के अनुसार गिर में कुल 674 सिंह है। इस प्रकार मरने वाले सिंहों की संख्या कुल आबादी का 15वां हिस्सा है।

गौरतलब है कि बब्बर शेरों की गिनती हर पांच साल में एक बार होती है और अगली बार यह 2025 में होगी। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि पिछले 2 सालों की तुलना में सिंहों की मृत्युदर में काफी कमी आई है। आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2020-21 में कुल 137 बब्बर शेरों की मौत हुई थी, जिसमें 14 अप्राकृतिक मौतें शामिल हैं। वहीं साल 2021-22 में कुल 129 सिंहों की मौत हो गई थी। जिसमें 16 अप्राकृतिक मौतें हुईं थीं। यानि पिछले तीन सालों में सरकार के अनुसार अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2023 तक 366 बब्बर शेरों की मौत हो चुकी है।

बीते दो सालों में 240 सिंहों की मौत

इससे पहले 28 फरवरी 2023 को भी गुजरात विधानसभा में वनमंत्री ने सिंहों की मौत से संबंधित एक रिपोर्ट पेश की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि गिर अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान पिछले दो सालों में 240 सिंहों को खो चुका हैं। यह मौतें गिर के सिंहों की आबादी का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा थी। राज्य सरकार ने विधानसभा को बताया कि गिर अभयारण्य और आसपास के इलाकों में 31 दिसंबर 2022 तक दो सालों में प्राकृतिक और अप्राकृतिक कारणों से 128 शावकों सहित 240 सिंहों की मौत हुई है।

यहां गौर करने वाली बात ये है कि मई 2020 में राज्य सरकार ने सिंहों की आबादी 674 बताई थी। जो 2015 के 523 के आंकड़े से 29 प्रतिशत अधिक है। वहीं 2021 में सरकार ने सिंहों की मौत का आंकड़ा 124 रखा, जबकि 2022 में यह घटकर 116 हो गया। पिछले दो सालों में हुई 240 सिंहों की मौत में से 53 नर और 59 मादा थी। वहीं 214 सिंह प्राकृतिक कारणों और 2021 में 26 और 2022 में 13 सिंह अप्राकृतिक कारणों से मारे गये थे। इस रिपोर्ट के अनुसार दो सालों में 240 मौतों में से 53 प्रतिशत शावक हैं। लगभग 50 प्रतिशत शावक आपसी लड़ाई में मारे जाते हैं या वन्य जीवों के भक्षण के शिकार होते हैं। गिर में सालाना औसतन 120 से 140 सिंह के शावक पैदा होते हैं।

अप्राकृतिक मौतों का कारण?

सिंहों की अप्राकृतिक मौतों का प्रमुख कारण खुले कुएं में गिरना, वाहनों अथवा रेलगाड़ियों की चपेट में आना है। वहीं साल 2018 में गिर के जंगलों में एशियाई शेरों की मौत केनाइन डिस्टेंम्पर वायरस (सीडीवी) के कारण भी हुई थी। यह वायरस कुत्तों से दूसरे जंगली जीवों में फैलता है और बेहद घातक होता है। सीडीवी ने 1994 में तंजानिया के सेरेन्गेटी अभयारण्य के करीब 1000 बब्बर शेरों की जान ले ली थी।

बाघों की भी मौत चिंताजनक

भारत में सिंह (बब्बर शेर) ही नहीं बल्कि बाघों (शेरों) की मौत ज्यादा चिंता का विषय बनी हुई है। साल 2023 (1 जनवरी से 8 फरवरी) के सिर्फ पहले महीने में ही 24 बाघों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि पिछले साल इसी अवधि में 16 बाघों की मौत हुई थी, जबकि 2021 में इसी अवधि में 20 मौतें हुई थीं। अधिकतम मौतें इस साल मध्य प्रदेश (9) से, इसके बाद महाराष्ट्र (6), राजस्थान (3), कर्नाटक (2), उत्तराखंड (2) और असम और केरल से एक-एक मामले सामने आये हैं।

एशियाई सिंहों का इतिहास

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के बाहर 1884 में आखिरी बार एशियाई सिंह देखा गया था, जबकि गुजरात में सिंह सौराष्ट्र क्षेत्र में जैसे धरंगधरा, जसदन, चोटीला, बरदा हिल्स, गिरनार और गिर वनों के कुछ हिस्सों में रहते हैं। वहीं धीरे-धीरे उनकी संख्या गिर के जंगलों तक ही सीमित रह गई। तब जूनागढ़ के नवाबों ने सिंहों के संरक्षण के बारे में सोचना शुरू किया। तभी से हर पांच साल पर इनकी गिनती की जाती है। ये एशियाई सिंह राज्य के आठ जिलों के 22,000 किलोमीटर के क्षेत्र में रहते हैं। वहीं सौराष्ट्र में स्थित गिर उपवन करीब 1400 वर्ग किलोमीटर में फैला है।

1000 करोड़ रुपए खर्च हो रहे सिंहों पर

साल 2022 में गुजरात सरकार ने गिर अभयारण्य में एशियाई सिंहों के आवास के संरक्षण के लिए 'प्रोजेक्ट लॉयन' के तहत केंद्र सरकार से अनुदान के रूप में 2,000 करोड़ रुपये के बजट की मांग की थी। फिलहाल केंद्र ने 1,000 करोड़ रुपये मंजूर किये हैं। इस प्रोजेक्ट का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य को वहन करना होगा।

यह भी पढ़ें: Gir National Park में पिछले दो साल में हो चुकी है 240 शेरों की मौत, गुजरात सरकार ने बताई वजह

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